'मुंबई के लड़के पर गर्व है...'; 174 यात्रियों की जान बचाने वाले पायलट स्मित मछार के लिए अशोक चक्र की उठी मांग
फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में कॉकपिट के भीतर हमले के बाद 174 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी की देश-विदेश में चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर उन्हें अशोक चक्र देने की मांग उठी है। राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मछार के नाम पर अशोक चक्र के लिए विचार करने का आग्रह किया है।
लेखक
Vinay Mishra
स्मित मछार की बहादुरी की देशभर में चर्चा
नई दिल्ली: फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में जानलेवा स्थिति के बीच सूझबूझ दिखाकर यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी की लगातार सराहना हो रही है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित करने की मांग उठी है।
मछार उस फ्लाइट के कप्तान थे, जिसमें कुल 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कथित तौर पर उन पर हमला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मछार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिससे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को हमलावर को काबू करने में मदद मिली। इसके बाद विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग सऊदी अरब के तबुक में कराई गई।
सोशल मीडिया पर उठी अशोक चक्र की मांग
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने कैप्टन स्मित मछार के लिए भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र की मांग की। मुंबई से जुड़े लोगों और उनके परिचितों ने भी उनकी बहादुरी पर गर्व जताया है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अशोक चक्र देने की कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। फिलहाल यह मांग सार्वजनिक अपील और राजनीतिक स्तर पर पहल के रूप में सामने आई है।
मिलिंद देवड़ा ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कैप्टन स्मित मछार को अशोक चक्र के लिए विचार करने का आग्रह किया है। देवड़ा ने अपने पत्र में मछार के साहस और सूझबूझ का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कदम से फ्लाइट में सवार सभी 174 लोगों की जान बचाने में मदद मिली।
देवड़ा की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब मछार की बहादुरी की चर्चा भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है।
घायल होने के बावजूद नहीं छोड़ी हिम्मत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कॉल के दौरान मछार ने घटना का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि हमले में घायल होने के बाद भी उन्हें एहसास था कि अगर वह वापस खड़े नहीं हुए तो यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। इसके बाद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की।
रॉयटर्स के मुताबिक, विमान घटना के दौरान करीब 14,000 फीट नीचे आया था और यह गिरावट 30 सेकंड से भी कम समय में हुई। कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद यात्रियों और चालक दल ने हमलावर को काबू करने में मदद की और विमान को तबुक में उतारा गया।
पीएम मोदी ने भी की पायलट की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल में भर्ती कैप्टन मछार से वीडियो कॉल पर बातचीत की और उनके साहस की सराहना की। मछार ने बातचीत के दौरान बताया कि वह गंभीर रूप से घायल थे, लेकिन यात्रियों को खतरे में देखकर उन्होंने कार्रवाई करने का फैसला किया।
घटना के दौरान मछार ने हनुमान चालीसा का पाठ करने की बात भी प्रधानमंत्री से साझा की।
मुंबई में परिवार और दोस्तों ने जताया गर्व
कैप्टन मछार का मुंबई से संबंध है। उनके बचपन के दोस्तों और पड़ोसियों ने उनकी बहादुरी पर गर्व जताया है। उनके एक बचपन के दोस्त प्रतीक गांधी ने बताया कि मछार बचपन से ही शांत और संयमित स्वभाव के रहे हैं।
मछार के परिवार ने हालांकि सार्वजनिक चर्चा के बीच उनकी स्वास्थ्य स्थिति और रिकवरी को प्राथमिकता देने की बात कही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार के सदस्यों ने मीडिया की लगातार मौजूदगी के बीच कहा कि उन्हें मछार पर गर्व है, लेकिन फिलहाल उनकी चिंता उनके स्वास्थ्य को लेकर है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई तारीफ
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित मछार को “true hero” बताते हुए उनकी भूमिका की सराहना की। मछार के बारे में सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनके पास लंबा व्यावसायिक उड़ान अनुभव है और वह जून 2022 से फ्लाईदुबई में कप्तान के रूप में कार्यरत हैं।
फिलहाल कैप्टन मछार का इलाज जारी है। वहीं, फ्लाइट में हुई घटना और सह-पायलट के कथित हमले की जांच संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
अशोक चक्र पर क्या होगा आगे?
कैप्टन स्मित मछार को अशोक चक्र देने की मांग अब सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। सांसद मिलिंद देवड़ा ने इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है, जबकि सोशल मीडिया पर भी ऐसी मांगें सामने आई हैं। हालांकि, किसी सैन्य या नागरिक वीरता पुरस्कार के संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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