'डॉक्टरों पर हमला बर्दाश्त नहीं...', शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत SC से रद; तीन दिन में करना होगा सरेंडर
महाराष्ट्र के डोंबिवली अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से कथित मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद रमेश सुखरिया म्हात्रे की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने उन्हें तीन दिनों के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। यह मामला शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों पर कथित हमले से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस मामले की सुनवाई के दौरान डॉक्टरों पर अस्पताल के भीतर हमले को गंभीरता से लेने की बात कह चुका है। 1 सितंबर को अदालत ने कहा था कि मेडिकल प्रोफेशनल्स पर इस तरह के हमले को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
लेखक
Jyoti Mukherjee
डॉक्टरों पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के डोंबिवली स्थित शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ पर कथित हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद रमेश सुखरिया म्हात्रे को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट से मिली उनकी जमानत रद्द कर दी और उन्हें तीन दिनों के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
मामले में म्हात्रे पर अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के साथ मारपीट का आरोप है। सितंबर में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर कड़ी टिप्पणियां की थीं।
क्या है पूरा मामला?
मामला 6 जुलाई 2026 का है। आरोप है कि डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में इलाज से जुड़े विवाद के बाद रमेश म्हात्रे और उनके साथियों ने डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मारपीट की। घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद मामले ने व्यापक ध्यान खींचा।
म्हात्रे को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में निचली अदालत ने उन्हें जमानत दी, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए उस जमानत पर रोक लगा दी और उन्हें दोबारा हिरासत में जाने का निर्देश दिया था।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बाद में दी थी जमानत
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बाद में 7 अगस्त को रमेश म्हात्रे को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी थी। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें मुकदमे की सुनवाई शुरू होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहने समेत कई शर्तों का पालन करना था। डॉक्टरों से दूर रहने और मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए थे।
इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने म्हात्रे की जमानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस चुनौती पर सुनवाई शुरू की और म्हात्रे को नोटिस भी जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हमले को लेकर क्या कहा था?
1 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर अस्पताल के भीतर होने वाली हिंसा पर कड़ी चिंता जताई थी। अदालत ने कहा था कि अगर मेडिकल कर्मचारियों को इस तरह धमकाया या पीटा जाएगा, तो लोगों की मदद के लिए कौन आगे आएगा।
अदालत ने यह भी कहा था कि बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मामले का स्वत: संज्ञान लेना और शुरुआती जमानत आदेश पर रोक लगाना उचित था। सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात का भी उल्लेख किया कि घटना का वीडियो सामने आया था।
म्हात्रे ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका वापस ली थी
सितंबर की एक पिछली सुनवाई में रमेश म्हात्रे ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई कुछ जमानत शर्तों को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस ले ली थी। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार की ओर से जमानत रद्द करने की अलग याचिका पर कार्यवाही जारी रही।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान डॉक्टरों पर बार-बार हो रहे हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। अदालत के सामने महाराष्ट्र में एक अन्य अस्पताल में मेडिकल स्टाफ पर कथित हमले का मामला भी रखा गया था।
कोर्ट ने तीन दिन में सरेंडर का दिया निर्देश
अब सुप्रीम कोर्ट ने म्हात्रे की जमानत रद्द करते हुए उन्हें तीन दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही डॉक्टरों पर हमले से जुड़े इस मामले में उनकी जमानत का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत का जोर इस बात पर रहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि, रमेश म्हात्रे के खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा। सितंबर में एक निचली अदालत ने म्हात्रे और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे और सभी ने आरोपों से इनकार किया था।
आगे क्या होगा?
तीन दिनों के भीतर सरेंडर के बाद रमेश म्हात्रे को मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। वहीं, डॉक्टरों पर कथित हमले का मुकदमा अपनी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगा।
यह मामला अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को लेकर न्यायपालिका के रुख के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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