सुवेंदु ने शाह के पैर छुए और सब बदल गया: बंगाल में 3 सीटों वाली बीजेपी 207 पर पहुंची
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी का नाम आज सबसे बड़े गेमचेंजर के तौर पर देखा जा रहा है। कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे सुवेंदु ने जब बीजेपी का दामन थामा, तब राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल गई। जिस बीजेपी के पास कभी सिर्फ 3 सीटें थीं, वह आज 200 से ज्यादा सीटों पर मजबूत चुनौती देने वाली पार्टी बन चुकी है। अमित शाह के पैर छूने वाली तस्वीर से लेकर नंदीग्राम की लड़ाई तक, सुवेंदु की राजनीतिक यात्रा अब बंगाल की सबसे चर्चित कहानी बन चुकी है।
लेखक
Vinay Mishra

सुवेंदु ने शाह के पैर छुए और सब बदल गया: बंगाल में 3 सीटों वाली बीजेपी 207 पर पहुंची
पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में जो सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला, उसके केंद्र में एक नाम लगातार बना रहा — सुवेंदु अधिकारी। कभी तृणमूल कांग्रेस की ताकत माने जाने वाले सुवेंदु आज बीजेपी के सबसे बड़े बंगाली चेहरे बन चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में अक्सर कहा जाता है कि जिस दिन सुवेंदु अधिकारी ने अमित शाह के पैर छुए, उसी दिन बंगाल की राजनीति की दिशा बदल गई।
आज स्थिति यह है कि जिस बीजेपी को कभी बंगाल में गंभीरता से नहीं लिया जाता था, वही पार्टी राज्य की सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सुवेंदु अधिकारी का तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाना रहा।
बंगाल में बीजेपी कभी क्यों नहीं थी मजबूत?
पश्चिम बंगाल लंबे समय तक वाम दलों और बाद में तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रहा। बीजेपी के लिए यहां जमीन तैयार करना बेहद मुश्किल माना जाता था। 2011 तक बीजेपी के पास विधानसभा में केवल 3 सीटें थीं। पार्टी संगठन कमजोर था और ग्रामीण बंगाल में उसकी पकड़ लगभग न के बराबर थी।
लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव ने तस्वीर बदलनी शुरू कर दी। बीजेपी ने बंगाल में बड़ी बढ़त हासिल की और उसके बाद पार्टी ने लगातार संगठन मजबूत करने पर काम किया।
इसी दौरान सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे अहम बनकर सामने आया।
कौन हैं सुवेंदु अधिकारी?
सुवेंदु अधिकारी पूर्वी मिदनापुर के प्रभावशाली अधिकारी परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी लंबे समय तक बंगाल की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। सुवेंदु ने शुरुआत कांग्रेस से की, लेकिन बाद में ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।
नंदीग्राम आंदोलन में उनकी भूमिका ने उन्हें बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा बना दिया। यही आंदोलन ममता बनर्जी को सत्ता तक ले जाने में निर्णायक साबित हुआ।
तृणमूल सरकार में सुवेंदु अधिकारी को बेहद मजबूत नेता माना जाता था। लेकिन समय के साथ ममता बनर्जी और सुवेंदु के बीच दूरी बढ़ती गई।
अमित शाह से मुलाकात और राजनीतिक भूचाल
राजनीतिक माहौल उस समय पूरी तरह बदल गया जब सुवेंदु अधिकारी ने बीजेपी जॉइन की। उस दौरान अमित शाह के साथ उनकी तस्वीरें और पैर छूने वाला दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
बीजेपी ने इसे बंगाल में अपने सबसे बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में इस्तेमाल किया। पार्टी ने यह दिखाने की कोशिश की कि बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा अब उनके साथ है।
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस में बगावत का दौर शुरू हो गया। कई नेता बीजेपी में शामिल हुए और बंगाल की राजनीति दो ध्रुवों में बंटती चली गई।
नंदीग्राम की लड़ाई ने बदल दी राजनीति
2021 विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पूरे देश की सबसे चर्चित सीट बन गई। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद चुनाव मैदान में उतरीं, जबकि बीजेपी ने उनके सामने सुवेंदु अधिकारी को उम्मीदवार बनाया।
यह मुकाबला सिर्फ एक सीट का नहीं बल्कि बंगाल की राजनीतिक प्रतिष्ठा का युद्ध बन गया।
चुनाव परिणाम में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बेहद करीबी मुकाबले में हरा दिया। इस जीत ने उन्हें बीजेपी का सबसे बड़ा बंगाली चेहरा बना दिया।
3 सीटों से 207 सीटों तक कैसे पहुंची बीजेपी?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में बीजेपी के तेजी से बढ़ने के पीछे कई कारण रहे:
1. सुवेंदु अधिकारी का संगठन नेटवर्क
सुवेंदु की ग्रामीण बंगाल में मजबूत पकड़ थी। उन्होंने बीजेपी को बूथ स्तर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
2. तृणमूल के अंदर असंतोष
कई पुराने नेताओं को लगने लगा था कि पार्टी में उनकी भूमिका कम हो रही है। बीजेपी ने इसका फायदा उठाया।
3. हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की राजनीति
बीजेपी ने बंगाल में धार्मिक ध्रुवीकरण और राष्ट्रवाद के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया।
4. केंद्रीय नेतृत्व का फोकस
अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया।
क्या अब भी ममता बनर्जी के लिए खतरा हैं सुवेंदु?
राजनीतिक तौर पर देखें तो सुवेंदु अधिकारी आज पश्चिम बंगाल में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के साथ-साथ वह लगातार ममता सरकार पर हमलावर रहते हैं।
हाल के महीनों में कई मुद्दों पर उन्होंने राज्य सरकार को घेरा है। भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती घोटाला और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बीजेपी लगातार आक्रामक बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर बीजेपी को बंगाल में सत्ता तक पहुंचना है तो सुवेंदु अधिकारी की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ा?
बंगाल की राजनीति में इस बदलाव का असर सीधे आम लोगों पर भी पड़ा है।
राज्य में राजनीतिक हिंसा के आरोप बढ़े
बीजेपी और तृणमूल के बीच टकराव तेज हुआ
ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ा
चुनावी मुकाबले पहले से ज्यादा आक्रामक हुए
हालांकि बीजेपी समर्थकों का कहना है कि पार्टी ने बंगाल में मजबूत विपक्ष तैयार किया है, जबकि तृणमूल समर्थकों का दावा है कि बीजेपी बाहरी राजनीति के जरिए राज्य की संस्कृति बदलना चाहती है।
क्या 2026 में और बड़ा बदलाव संभव?
अब सभी की नजर 2026 विधानसभा चुनाव पर है। बीजेपी लगातार बंगाल में अपनी जमीन मजबूत करने में लगी हुई है, जबकि ममता बनर्जी तीसरी बार सत्ता में आने के बाद भी अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।
सुवेंदु अधिकारी की रणनीति, बीजेपी का संगठन और तृणमूल के खिलाफ माहौल आने वाले समय में बंगाल की राजनीति को और दिलचस्प बना सकता है।
निष्कर्ष
सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा सिर्फ एक नेता के दल बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है। जिस बीजेपी को कभी बंगाल में हाशिए की पार्टी माना जाता था, आज वही सत्ता के सबसे बड़े दावेदारों में शामिल है।
अमित शाह के पैर छूने वाली तस्वीर से शुरू हुई राजनीतिक चर्चा अब बंगाल की सत्ता की लड़ाई तक पहुंच चुकी है। आने वाले वर्षों में सुवेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच संघर्ष बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
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