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'एल नीनो की वजह से हाई हेल्थ रिस्क पर भारत', डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच WHO की वॉर्निंग

मजबूत होते El Niño के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को उन देशों में शामिल किया है जहां आने वाले समय में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम High से Very High तक हो सकते हैं। WHO की 5 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में दक्षिण एशिया में बदलते तापमान और बारिश के पैटर्न को लेकर चेतावनी दी गई है। भारत में डेंगू और मलेरिया जैसे मच्छरजनित रोगों के बीच यह चेतावनी आई है। हालांकि, WHO ने भारत में मौजूदा डेंगू मामलों को सीधे तौर पर El Niño के कारण नहीं बताया है।

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'एल नीनो की वजह से हाई हेल्थ रिस्क पर भारत', डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच WHO की वॉर्निंग

नई दिल्ली: भारत में डेंगू और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच El Niño को लेकर WHO ने स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी जारी की है। WHO की नई रिपोर्ट के मुताबिक, El Niño के मजबूत होने से दक्षिण एशिया में तापमान और बारिश के सामान्य पैटर्न में बदलाव हो सकता है, जिससे कई तरह के स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

WHO की ‘Global Public Health Situation Analysis – El Niño 2026’ रिपोर्ट 5 सितंबर को जारी हुई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों में संभावित स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन, तैयारी और समय रहते कार्रवाई में मदद करना है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

El Niño एक प्राकृतिक समुद्री-वायुमंडलीय घटना है, जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के तापमान, बारिश और मौसम के पैटर्न पर पड़ सकता है। WHO के मुताबिक, ऐसे बदलाव हीट स्ट्रेस, बाढ़, सूखा और मच्छरजनित बीमारियों समेत कई स्वास्थ्य जोखिमों को प्रभावित कर सकते हैं।

भारत के लिए खास चिंता गर्मी और बारिश के बदलते पैटर्न को लेकर है। इससे कुछ इलाकों में अत्यधिक गर्मी, जबकि दूसरे क्षेत्रों में भारी बारिश या बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

डेंगू के बीच आई WHO की चेतावनी

WHO की चेतावनी ऐसे समय आई है जब भारत के कुछ हिस्सों में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। दिल्ली में अगस्त 2026 में 90 डेंगू मामले दर्ज किए गए, जो इस साल किसी एक महीने में सबसे ज्यादा बताए गए हैं। 29 अगस्त तक राजधानी में डेंगू के कुल मामले 311 तक पहुंच गए थे।

मलेरिया के मामले भी दिल्ली में जुलाई के 17 से बढ़कर अगस्त में 53 हुए। इस साल अब तक राजधानी में मलेरिया के 119 मामले दर्ज होने की रिपोर्ट है।

लेकिन एक अहम बात: WHO ने इन मौजूदा डेंगू या मलेरिया मामलों को सीधे El Niño के कारण नहीं बताया है। संगठन के अनुसार El Niño एक ऐसा कारक है जो स्वास्थ्य जोखिम को बढ़ा सकता है, जबकि वास्तविक असर स्थानीय मौसम, आबादी की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता पर निर्भर करता है।

गर्मी से लेकर डेंगू तक कई खतरे

बढ़ते तापमान से हीट एक्सहॉशन और हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा पहले से हृदय, सांस, किडनी और मेटाबॉलिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर गर्मी का अतिरिक्त असर पड़ सकता है।

गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए भी अत्यधिक गर्मी चिंता का विषय हो सकती है। WHO ने खाद्य असुरक्षा और कुपोषण के साथ-साथ कुछ गैर-संचारी रोगों के बढ़ते जोखिम की भी ओर इशारा किया है।

मच्छरों पर मौसम का सीधा असर

तापमान, बारिश और नमी में बदलाव Aedes मच्छरों के प्रजनन और गतिविधि को प्रभावित कर सकते हैं। यही मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया जैसे वायरस फैलाते हैं।

WHO के अनुसार, ENSO यानी El Niño-La Niña जैसी मौसमी घटनाओं और वेक्टर-बोर्न बीमारियों के बीच संबंध जटिल है। इसका प्रभाव हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता।

इसलिए केवल El Niño को डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी का अकेला कारण मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।

भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा पर भी नजर

WHO ने भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा क्षेत्रों को भी स्वास्थ्य जोखिम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना है। मौसम संबंधी आपदाओं के कारण अगर आबादी विस्थापित होती है तो कुछ इलाकों में संक्रामक रोगों के सीमा पार फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

El Niño इस बार कितना मजबूत हो सकता है?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने सितंबर की शुरुआत में चेतावनी दी थी कि 2026 का El Niño तेजी से मजबूत हो रहा है और फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। जुलाई में Niño 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2°C से अधिक ऊपर पहुंच गया था।

भारत सरकार के अनुसार भी IMD ने 2026 में El Niño की स्थिति बनने का अनुमान लगाया था और जुलाई में इसकी तीव्रता कमजोर से मध्यम स्तर तक पहुंची थी। अक्टूबर-दिसंबर के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना जताई गई थी।

कमजोर मानसून से भी जुड़ी चिंता

El Niño का असर सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। भारत में 2026 के मानसून पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। जून में बारिश सामान्य से करीब 35% कम रही और अगस्त में भी बारिश में कमी दर्ज की गई। सितंबर की बारिश फसलों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।

अगर बारिश और कमजोर होती है तो खाद्य उत्पादन, किसानों की आय और खाद्य महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।

लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

ऐसे मौसम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के मुताबिक लोगों को:

  • तेज गर्मी में लंबे समय तक बाहर रहने से बचना चाहिए।

  • पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेना चाहिए।

  • घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए।

  • कूलर, गमले, टायर और अन्य कंटेनरों में जमा पानी नियमित रूप से साफ करना चाहिए।

  • बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

  • बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक गर्मी से विशेष रूप से बचाना चाहिए।

निष्कर्ष

WHO की चेतावनी का मतलब यह नहीं है कि भारत में El Niño के कारण डेंगू की महामारी निश्चित रूप से आने वाली है। असल संदेश तैयारी और निगरानी बढ़ाने का है। बदलते तापमान, बारिश और नमी के बीच मच्छरजनित बीमारियों के साथ-साथ गर्मी, पानी, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में भारत के लिए मौसम और सार्वजनिक स्वास्थ्य—दोनों मोर्चों पर सतर्क रहना जरूरी होगा।

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