अमेरिका-ईरान तनाव पर बड़ा खुलासा, जंग खत्म करने के लिए रखीं 5 सख्त शर्तें
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वॉशिंगटन ने जंग खत्म करने के लिए ईरान के सामने 5 बड़ी शर्तें रखी हैं। इनमें एनरिच्ड यूरेनियम सौंपना, मुआवजा न मांगना और जब्त संपत्तियों का केवल 25% लौटाने जैसी शर्तें शामिल हैं। इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
लेखक
Vinay Mishra

अमेरिका-ईरान तनाव पर बड़ा खुलासा, जंग खत्म करने के लिए रखीं 5 सख्त शर्तें
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते या जंग खत्म करने की दिशा में पांच कड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह नियंत्रण स्वीकार करे और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सहयोग करे। सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान को किसी भी तरह का युद्ध मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता लगातार बढ़ रही है और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं तेल कीमतों तथा सुरक्षा संकट को लेकर चिंतित हैं।
क्या हैं अमेरिका की 5 बड़ी शर्तें?
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के सामने जिन प्रमुख शर्तों को रखा है, उनमें कई बेहद सख्त मानी जा रही हैं।
1. ईरान को नहीं मिलेगा कोई मुआवजा
अमेरिका ने कथित तौर पर साफ कर दिया है कि युद्ध या प्रतिबंधों के कारण हुए आर्थिक नुकसान के बदले ईरान को कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। ईरान लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों से हुए नुकसान की भरपाई की मांग करता रहा है, लेकिन अमेरिका इस पर तैयार नहीं दिख रहा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह शर्त ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हो सकती है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही गंभीर दबाव में है।
2. एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को सौंपना होगा
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों के हवाले करे।
यह मांग इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि पश्चिमी देशों को डर है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार क्षमता हासिल कर सकता है। हालांकि ईरान हमेशा कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और रिसर्च के लिए है।
3. जब्त की गई संपत्ति का सिर्फ 25% लौटाया जाएगा
अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान की विदेशों में जब्त संपत्तियों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल 25 प्रतिशत संपत्ति ही वापस की जाएगी।
ईरान लंबे समय से अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को वापस लेने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अमेरिका की यह शर्त दोनों देशों के बीच नए विवाद को जन्म दे सकती है।
4. परमाणु गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु केंद्रों और रिसर्च गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA को पूरी पहुंच दे।
इसमें अचानक निरीक्षण और तकनीकी डेटा साझा करने जैसी शर्तें भी शामिल हो सकती हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका बिना सख्त निगरानी के किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं देगा।
5. क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों में कटौती
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने यह भी कहा है कि ईरान को मध्य पूर्व में अपने समर्थित सशस्त्र समूहों और सैन्य गतिविधियों को सीमित करना होगा।
यह मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए चिंता का विषय रहा है। विशेष रूप से इजराइल और खाड़ी देशों ने ईरान की क्षेत्रीय भूमिका पर लगातार सवाल उठाए हैं।
क्यों अहम है यह रिपोर्ट?
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में कई बार दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष टकराव की खबरें सामने आईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन शर्तों पर सहमति नहीं बनती है तो मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
तेल और पेट्रोल की कीमतों पर असर
अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा।
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव
मध्य पूर्व संकट बढ़ने पर वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हैं। इससे शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
वैश्विक सुरक्षा चिंता
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि बातचीत विफल होती है तो पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संकट गहरा सकता है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय यात्रा और व्यापार पर भी पड़ेगा।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिका की ये शर्तें बेहद कड़ी हैं और ईरान के लिए इन्हें पूरी तरह स्वीकार करना आसान नहीं होगा।
कुछ विशेषज्ञ इसे दबाव की रणनीति मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करना चाहता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर कई अहम कूटनीतिक बैठकें हो सकती हैं।
क्या फिर से शुरू होगी परमाणु डील पर बातचीत?
रिपोर्ट आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या दोनों देश फिर से परमाणु समझौते की दिशा में आगे बढ़ेंगे। हालांकि फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
लेकिन वैश्विक शक्तियां इस मामले को लेकर लगातार नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका द्वारा ईरान के सामने रखी गई 5 शर्तों की रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने से लेकर मुआवजा न देने और जब्त संपत्ति का केवल 25% लौटाने जैसी शर्तें साफ संकेत देती हैं कि अमेरिका इस बार बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।
अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ईरान इन शर्तों को मानने के लिए तैयार होगा या फिर मध्य पूर्व में तनाव और गहरा जाएगा।
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