'हार्ट अटैक से भी 10 गुना खतरनाक!' जानिए क्या है कार्डियोजेनिक शॉक, जिसमें संभलने का मौका तक नहीं मिलता
कार्डियोजेनिक शॉक दिल की एक बेहद गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें हृदय शरीर के जरूरी अंगों तक पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता। यह अक्सर गंभीर हार्ट अटैक के बाद हो सकता है और स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे मरीजों में तुरंत चिकित्सा सहायता और अस्पताल में उपचार बेहद जरूरी होता है।
लेखक
Vinay Mishra
क्या है कार्डियोजेनिक शॉक?
नई दिल्ली: हार्ट अटैक को आमतौर पर अचानक आने वाली गंभीर मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में इसके बाद होने वाली एक जटिलता स्थिति को और भी गंभीर बना सकती है। इसे कार्डियोजेनिक शॉक (Cardiogenic Shock) कहा जाता है।
इस स्थिति में दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में खून पंप नहीं कर पाता। इसके कारण मस्तिष्क, किडनी, लिवर और दूसरे महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजनयुक्त रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है। इलाज में देरी होने पर कई अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
क्या यह हार्ट अटैक से '10 गुना' खतरनाक है?
सोशल मीडिया और कई स्वास्थ्य संबंधी लेखों में कार्डियोजेनिक शॉक को हार्ट अटैक से कई गुना ज्यादा खतरनाक बताया जाता है। हालांकि '10 गुना खतरनाक' कोई मानक चिकित्सकीय माप या स्थापित मेडिकल अनुपात नहीं है।
असल में कार्डियोजेनिक शॉक हार्ट अटैक से अलग बीमारी नहीं, बल्कि गंभीर हार्ट अटैक की संभावित जानलेवा जटिलताओं में से एक हो सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन से जुड़े कार्डियोजेनिक शॉक में मृत्यु दर काफी अधिक रहती है और तत्काल उपचार जरूरी है।
हार्ट अटैक और कार्डियोजेनिक शॉक में क्या अंतर है?
हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक जाने वाला रक्त प्रवाह बाधित या काफी कम हो जाता है। इसके सामान्य लक्षणों में सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, मतली, कमजोरी और शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द शामिल हो सकते हैं।
वहीं कार्डियोजेनिक शॉक में समस्या यह होती है कि हृदय इतना प्रभावी ढंग से पंप नहीं कर पाता कि शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को पर्याप्त रक्त मिल सके। यह गंभीर हार्ट अटैक के बाद हो सकता है, लेकिन हृदय की अन्य गंभीर समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
कार्डियोजेनिक शॉक के प्रमुख लक्षण
इस स्थिति में शरीर में रक्त और ऑक्सीजन की कमी के कारण कई संकेत दिखाई दे सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
ब्लड प्रेशर का बहुत कम होना
तेज या कमजोर नाड़ी
सांस लेने में परेशानी
हाथ-पैर ठंडे पड़ना
बेहोशी या चक्कर
भ्रम या मानसिक स्थिति में बदलाव
पेशाब कम होना
त्वचा का ठंडा या चिपचिपा होना
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार कार्डियोजेनिक शॉक में कम रक्तचाप, तेज धड़कन, शरीर के अंगों तक कम रक्त पहुंचना, पेशाब कम होना और मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे संकेत देखे जा सकते हैं।
किन लोगों में बढ़ सकता है खतरा?
कार्डियोजेनिक शॉक का सबसे आम कारण गंभीर हार्ट अटैक हो सकता है, खासकर तब जब हृदय की पंपिंग क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो। इसके अलावा गंभीर हार्ट फेल्योर और हृदय से जुड़ी अन्य गंभीर स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।
यह स्थिति उम्रदराज मरीजों में भी विशेष चिंता का विषय हो सकती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, एक्यूट हार्ट अटैक से जुड़े कार्डियोजेनिक शॉक की घटनाएं लगभग 7-10 प्रतिशत मामलों में देखी गई हैं और इसकी मृत्यु दर अभी भी काफी अधिक है।
इलाज में क्यों नहीं करनी चाहिए देरी?
कार्डियोजेनिक शॉक एक मेडिकल इमरजेंसी है। Cleveland Clinic के अनुसार, जितनी जल्दी मरीज को उपचार मिलता है, उतना ही लंबे समय तक होने वाले नुकसान को कम करने का अवसर बढ़ता है।
अस्पताल में डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार रक्त प्रवाह और हृदय की कार्यक्षमता को सुधारने के लिए दवाएं, आपातकालीन हृदय संबंधी प्रक्रियाएं और जरूरत पड़ने पर मैकेनिकल सर्कुलेटरी सपोर्ट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। गंभीर मामलों में ECMO, इंट्रा-एऑर्टिक बैलून पंप या अन्य अस्थायी सपोर्ट डिवाइस की जरूरत पड़ सकती है।
हार्ट अटैक के लक्षण दिखें तो क्या करें?
सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, अचानक कमजोरी, मतली या शरीर के ऊपरी हिस्से में असामान्य दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन हार्ट अटैक के संदेह में तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेने की सलाह देता है।
खास तौर पर यदि हार्ट अटैक के साथ व्यक्ति का ब्लड प्रेशर गिर रहा हो, वह बेहोशी या भ्रम की स्थिति में जा रहा हो, सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही हो या पेशाब बहुत कम हो रहा हो, तो तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
महत्वपूर्ण: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। कार्डियोजेनिक शॉक या हार्ट अटैक की आशंका होने पर घरेलू इलाज या इंतजार करने के बजाय तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लें।
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