कच्चे तेल की कीमत दो महीने में पहली बार $100 के पार, US-Iran संघर्ष और लाल सागर में हूतियों की नाकाबंदी से बढ़ी चिंता
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच लाल सागर में हूतियों द्वारा समुद्री मार्ग बाधित किए जाने से वैश्विक कच्चे तेल बाजार में बड़ा उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड दो महीने में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इसका असर भारत समेत दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल, महंगाई और शिपिंग लागत पर पड़ सकता है।
लेखक
Vinay Mishra

कच्चे तेल की कीमत दो महीने में पहली बार $100 के पार, US-Iran संघर्ष और लाल सागर में हूतियों की नाकाबंदी से बढ़ी चिंता
वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा समुद्री मार्ग पर नाकाबंदी जैसी गतिविधियों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल दो महीने में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई और ईंधन कीमतों को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या समुद्री व्यापार लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ेगा।
प्रमुख बातें
ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा।
दो महीने में पहली बार इतना बड़ा उछाल।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा सैन्य तनाव।
लाल सागर में हूती विद्रोहियों की नाकाबंदी से शिपिंग प्रभावित।
वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव।
भारत में पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर पड़ सकता है असर।
आखिर क्यों बढ़ रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?
तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता सप्लाई को लेकर है। लाल सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में तेल और अन्य सामान इसी रास्ते से भेजा जाता है।
हूती विद्रोहियों द्वारा इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले और नाकाबंदी जैसी गतिविधियों के कारण कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का मार्ग बदलना शुरू कर दिया है। इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है और तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। बाजार को डर है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा तो मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति में गंभीर बाधा आ सकती है।
लाल सागर क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
लाल सागर और स्वेज नहर वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा माने जाते हैं।
इसी मार्ग से दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। तेल टैंकरों के लिए भी यह सबसे छोटा और महत्वपूर्ण रास्ता है।
यदि जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ता है, तो यात्रा कई दिन लंबी हो जाती है। इससे ईंधन खर्च, बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई लागत बढ़ जाती है।
यही कारण है कि लाल सागर में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक बाजारों को तुरंत प्रभावित करता है।
भारत पर कितना पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर भारत पर जल्दी दिखाई देता है।
संभावित प्रभाव:
पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं।
रसोई गैस की लागत बढ़ सकती है।
परिवहन खर्च बढ़ने से खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं।
विमान किराए में बढ़ोतरी संभव।
उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
महंगाई दर पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, अंतिम फैसला तेल विपणन कंपनियों और सरकार की कर नीति पर भी निर्भर करेगा।
क्या तुरंत बढ़ जाएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
भारत में ईंधन की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति, रिफाइनिंग लागत, फ्रेट चार्ज, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स तथा तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति भी अहम भूमिका निभाती है।
अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती है, तब घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
शेयर बाजार और रुपये पर भी पड़ सकता है असर
तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ जाता है। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है।
तेल महंगा होने से कई कंपनियों की लागत बढ़ती है, जिससे शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से एयरलाइन, लॉजिस्टिक्स, पेंट, केमिकल और परिवहन क्षेत्र की कंपनियां अधिक प्रभावित हो सकती हैं।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि वर्तमान तेजी का मुख्य कारण भू-राजनीतिक जोखिम है।
यदि लाल सागर में सामान्य स्थिति जल्द बहाल नहीं होती और अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं होता, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी रह सकती हैं।
हालांकि, यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं और समुद्री मार्ग फिर से सुरक्षित हो जाते हैं, तो बाजार में कुछ राहत मिल सकती है।
सरकार की नजर हालात पर
भारत सरकार लगातार वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर बनाए हुए है। देश ने पिछले कुछ वर्षों में तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश की है ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट का असर सीमित रहे।
साथ ही, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) भी ऐसे समय में ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
आम लोगों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है, तो परिवहन और घरेलू खर्च बढ़ सकते हैं।
ऐसे में:
ईंधन की अनावश्यक खपत कम करें।
सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें।
घरेलू बजट में संभावित महंगाई को ध्यान में रखें।
सरकार और तेल कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें।
निष्कर्ष
कच्चे तेल का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना केवल ऊर्जा बाजार की खबर नहीं है, बल्कि इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था, महंगाई, व्यापार और आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है। अमेरिका-ईरान तनाव और लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है। यदि तनाव कम होता है तो बाजार को राहत मिल सकती है, लेकिन संघर्ष बढ़ने पर तेल की कीमतों में और तेजी से इनकार नहीं किया जा सकता।
Keep reading
More in व्यापार और अर्थव्यवस्था
व्यापार और अर्थव्यवस्था
देश के 5 बड़े मसाला बाजार, सिर्फ ₹70,000 से शुरू करें अपना मसाला ब्रांड; ये रजिस्ट्रेशन और बिजनेस प्लान आएगा काम
भारत में अपना छोटा मसाला ब्रांड शुरू करने के लिए शुरुआत में बहुत बड़ा प्लांट लगाना जरूरी नहीं है। खारी बावली, गोंटूर, उंझा, ईरोड और सांगली ज…
व्यापार और अर्थव्यवस्था
1500 एकड़ में खेती, 10 साल पुलिस की नौकरी; किसान से Berkshire Hathaway के चेयरमैन बनने वाले हॉवर्ड बफे की अनोखी कहानी
वॉरेन बफे के बेटे हॉवर्ड ग्राहम बफे ने पारंपरिक कॉरपोरेट करियर के बजाय खेती, कानून-प्रवर्तन, फोटोग्राफी और परोपकार के अलग-अलग क्षेत्रों में…
व्यापार और अर्थव्यवस्था
मुकेश अंबानी बंगाल में कर सकते हैं बड़ा प्रोजेक्ट शुरू, सीएम शुभेंदु से मुलाकात; क्या बना प्लान?
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मुंबई में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी से मुलाकात की। बैठक में पश्चिम बंगाल में…
व्यापार और अर्थव्यवस्था
उत्तर मध्य रेलवे ने लॉन्च किया 'टोटल' पोर्टल, 67 हजार से अधिक रेल कर्मचारियों को मिलेगा डिजिटल क्लेम का लाभ
उत्तर मध्य रेलवे ने अपने कर्मचारियों के लिए 'टोटल' (TOTAL) पोर्टल लॉन्च किया है। इस डिजिटल पहल का उद्देश्य रेल कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न…
व्यापार और अर्थव्यवस्था
चंद्रशेखरन के Tata Sons के दोबारा चेयरमैन बनने का नोएल ने क्यों किया विरोध? पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी
Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को बोर्ड ने एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त कर दिया है, लेकिन Tata Trusts के चेयरमैन नोएल…
व्यापार और अर्थव्यवस्था
देशभर में 28 सितंबर से तीन दिन बैंकों की हड़ताल, 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की तैयारी
देशभर में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के यूनियन संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने सितंबर और अक्टूबर में चरणबद्ध आंदोलन का ऐला…
