‘सभी फैसले सर्वसम्मति से’, SIR पर मतभेद के आरोपों के बाद चुनाव आयोग की सफाई
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने बुधवार को सफाई जारी की। आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में SIR समेत उसके सभी फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यह सफाई उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। आयोग ने कहा कि आंतरिक नोट, सुझाव और सवाल किसी भी संस्था की सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
लेखक
Vinay Mishra
SIR को लेकर चुनाव आयोग ने क्या कहा?
नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबरों पर 8 बिंदुओं में स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय, सुझाव और तकनीकी टिप्पणियां निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अंतिम फैसले से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
ECI ने अपने बयान में कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करता है। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में लिए गए उसके सभी फैसले पूरी कमिशन की सर्वसम्मति से लिए गए।
रिपोर्ट में 14 आपत्तियों का दावा
यह विवाद The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने, वोटर डेटाबेस के प्रबंधन और SIR से संबंधित प्रक्रियाओं जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में दोनों आयुक्तों ने फैसलों की जानकारी या प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे।
EC ने कहा- अलग-अलग राय सामान्य प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था में अंतिम निर्णय से पहले नोट्स, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और सवाल उठना सामान्य है।
आयोग के मुताबिक, कमिश्नरों द्वारा ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए ऑपरेशनल सवाल भी चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से होते हैं। ECI ने यह भी कहा कि केवल तीन चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का कोई भी अधिकारी चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव दे सकता है।
‘सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए’
ECI ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि पिछले एक साल में आयोग द्वारा लिए गए फैसले, जारी किए गए निर्देश और शुरू की गई करीब 40 नई पहल पूरी कमिशन की सर्वसम्मति का परिणाम हैं।
आयोग ने कहा कि इनमें देशभर में मतदाता सूची के संशोधन, जिसमें SIR भी शामिल है, से जुड़े कदम भी शामिल हैं। आयोग ने हाल में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव तथा चुनाव संबंधी प्रक्रियाएं पूरी कराने का भी उल्लेख किया।
वोटर डेटाबेस और डेटा सुरक्षा पर भी सफाई
SIR विवाद के बीच मतदाता डेटाबेस की सुरक्षा को लेकर उठाए गए सवालों पर भी आयोग ने प्रतिक्रिया दी। ECI ने कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिसमें ECINet शामिल है, सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं।
आयोग के अनुसार, IT सिक्योरिटी चेक और ऑडिट कंट्रोल राष्ट्रीय डेटाबेस में इस्तेमाल होने वाले सामान्य साइबर सुरक्षा उपाय हैं। साथ ही, Electoral Registration Officers (EROs) और District Election Officers (DEOs) कानून के तहत उन्हें मिली शक्तियों के अनुसार मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने की प्रक्रिया संचालित करते हैं।
आयोग ने कहा- केवल आंतरिक नोट देखने से पूरी तस्वीर नहीं मिलती
ECI ने यह भी कहा कि 10 महीनों की अवधि में सामने आए कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट्स और टिप्पणियों को अलग से देखने से निर्णय प्रक्रिया की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
आयोग के मुताबिक, इस दौरान बड़ी संख्या में अनुमोदन, फैसले, निर्देश और चुनाव सुधार संबंधी पहल भी हुई हैं। इसलिए आंतरिक टिप्पणियों को अंतिम फैसलों के बराबर मानना उचित नहीं होगा।
क्या सच में आयोग के भीतर मतभेद हैं?
यहां आयोग के आधिकारिक पक्ष और मीडिया रिपोर्ट में अंतर है। Indian Express की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कई मौकों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। दूसरी ओर, ECI का कहना है कि ये टिप्पणियां और सुझाव निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा थे और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
इसलिए फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना अधिक सटीक है कि आयोग के भीतर कुछ प्रक्रियात्मक मुद्दों पर टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि आयोग ने अंतिम निर्णयों में किसी असहमति से इनकार किया है।
SIR क्या है?
Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना तथा कानून के अनुसार अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाना है।
SIR को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक और कानूनी बहस चलती रही है। ऐसे में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वह संवैधानिक जिम्मेदारियों का पालन कर रहा है और SIR सहित सभी अंतिम फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
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