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पूर्व डीजीपी थाचंकरी को केरल हाई कोर्ट में कोई अंतरिम राहत नहीं, बेहिसाब संपत्ति का मामला

केरल हाई कोर्ट ने पूर्व डीजीपी टोमिन जे. थाचंकरी को बेहिसाब संपत्ति मामले में फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। थाचंकरी ने चार साल की सजा पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी। अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को तय की है। इससे पहले कोट्टायम की सतर्कता अदालत ने थाचंकरी को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के मामले में चार साल के कठोर कारावास और 30.84 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

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पूर्व डीजीपी थाचंकरी को केरल हाई कोर्ट में कोई अंतरिम राहत नहीं, बेहिसाब संपत्ति का मामला

चार साल की सजा के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे थे थाचंकरी

कोच्चि: केरल हाई कोर्ट ने पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) टोमिन जे. थाचंकरी की उस याचिका पर फिलहाल सजा निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने बेहिसाब संपत्ति (Disproportionate Assets) मामले में मिली चार साल की सजा को चुनौती दी है।

जस्टिस ए. बदरुद्दीन की एकल पीठ ने राज्य अभियोजन को अपील का विरोध करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।

सतर्कता अदालत ने सुनाई थी चार साल की सजा

थाचंकरी को 17 सितंबर 2026 को कोट्टायम की एनक्वायरी कमिश्नर एंड स्पेशल जज (विजिलेंस) अदालत ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के मामले में दोषी ठहराया था।

अदालत ने उन्हें चार साल के कारावास के साथ 30.84 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया गया था।

चार साल की सजा तीन वर्ष से अधिक होने के कारण मामले में राहत के लिए थाचंकरी को हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा।

क्या है बेहिसाब संपत्ति का मामला?

यह मामला करीब दो दशक पुराना है। विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो ने आरोप लगाया था कि थाचंकरी ने जनवरी 2003 से जुलाई 2007 के बीच अपनी आय के ज्ञात स्रोतों के मुकाबले अधिक संपत्ति और खर्च जुटाए।

2007 में दर्ज FIR में कथित तौर पर बेहिसाब संपत्ति का अनुपात काफी अधिक बताया गया था। बाद में विजिलेंस ने मामले की जांच की और 2013 में चार्जशीट दाखिल की।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जांच में करीब 64.70 लाख रुपये की ऐसी संपत्ति और खर्च सामने आए, जिन्हें आय के ज्ञात स्रोतों से स्पष्ट नहीं किया जा सका। अभियोजन ने दावा किया कि यह रकम उनकी ज्ञात आय से 135.80 प्रतिशत अधिक थी। ये अभियोजन पक्ष और जांच एजेंसी के मामले से जुड़े आंकड़े हैं, जिन्हें अदालत की दोषसिद्धि के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

थाचंकरी ने क्या दलील दी?

थाचंकरी की ओर से पहले यह दलील दी गई थी कि विवादित संपत्तियों का एक हिस्सा पारिवारिक बंटवारे और उपहार के जरिए मिला था। उन्होंने मामले से मुक्त किए जाने की मांग भी की थी, लेकिन अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी और चार्जशीट को कानूनी रूप से टिकाऊ माना था।

अब हाई कोर्ट में दाखिल अपील में उन्होंने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है और अपनी सजा पर रोक की मांग की है।

राज्य सरकार ने अंतरिम राहत का विरोध किया

हाई कोर्ट में राज्य की ओर से थाचंकरी की सजा निलंबित करने की मांग का विरोध किया गया। सरकारी पक्ष ने मामले को “exceptional case” बताते हुए दलील दी कि थाचंकरी लंबे समय तक एक उच्च पद पर रहे पुलिस अधिकारी थे।

अदालत ने राज्य को अपना लिखित जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया है। इसके बाद अदालत अंतरिम राहत की मांग पर आगे विचार करेगी।

लंबे समय से लंबित था मुकदमा

यह मामला 2007 में दर्ज हुआ था और 2013 में चार्जशीट दाखिल की गई थी। मुकदमे की सुनवाई लंबे समय तक लंबित रही। बाद में केरल हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद ट्रायल को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट ने 2025 में भी मामले की सुनवाई में देरी पर चिंता जताते हुए विशेष अदालत को कार्यवाही तेज करने का निर्देश दिया था।

थाचंकरी कौन हैं?

टोमिन जे. थाचंकरी 1987 बैच के केरल कैडर के IPS अधिकारी रहे हैं। वह पुलिस विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे और 2023 में DGP रैंक के अधिकारी के तौर पर सेवानिवृत्त हुए।

अब उनकी चार साल की सजा के खिलाफ अपील पर केरल हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है। फिलहाल अदालत ने सजा पर रोक लगाने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है और राज्य का जवाब आने के बाद मामले पर आगे सुनवाई होगी।

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