व्यापार और अर्थव्यवस्था

‘नौकरी करने लायक नहीं Gen Z’, ग्रेजुएट्स की जगह रोबोट रखने को तैयार बॉस; कंपनियों ने बताई वजह

दुनियाभर में Gen Z के नौकरी बाजार में प्रवेश को लेकर बहस तेज हो गई है। कई कंपनियां और मैनेजर युवा ग्रेजुएट्स की कम्युनिकेशन, प्रोफेशनल व्यवहार और क्रिटिकल थिंकिंग जैसी क्षमताओं पर सवाल उठा रहे हैं। एक सर्वे में 37% नियोक्ताओं ने कहा कि वे Gen Z ग्रेजुएट को नियुक्त करने के बजाय AI को प्राथमिकता देंगे। वहीं, कंपनियां एंट्री-लेवल कामों को ऑटोमेट करने पर भी तेजी से विचार कर रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या सिर्फ Gen Z की नहीं, बल्कि कंपनियों द्वारा ट्रेनिंग और मेंटरशिप में घटते निवेश की भी है।

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‘नौकरी करने लायक नहीं Gen Z’, ग्रेजुएट्स की जगह रोबोट रखने को तैयार बॉस; कंपनियों ने बताई वजह

क्या Gen Z नौकरी के लिए तैयार नहीं? AI और रोबोट को लेकर बढ़ी कंपनियों की दिलचस्पी

नई दिल्ली: कॉलेज से डिग्री लेकर निकलने वाली नई पीढ़ी के सामने नौकरी का बाजार पहले ही मुश्किल है। अब इसके साथ एक और चुनौती जुड़ गई है—क्या कंपनियां युवा ग्रेजुएट्स की जगह AI और रोबोट को प्राथमिकता देने लगी हैं?

हाल के वर्षों में कई नियोक्ताओं ने Gen Z कर्मचारियों को लेकर शिकायतें दर्ज की हैं। इनमें प्रोफेशनल व्यवहार, संवाद कौशल, क्रिटिकल थिंकिंग, ऑफिस एटिकेट और काम की अपेक्षाओं से जुड़ी बातें प्रमुख हैं। कुछ मैनेजरों का कहना है कि नए ग्रेजुएट्स को पारंपरिक ऑफिस वातावरण में काम करने के लिए ज्यादा मार्गदर्शन की जरूरत पड़ती है।

37% मैनेजर AI को दे सकते हैं Gen Z पर तरजीह

इस बहस को सबसे ज्यादा हवा उस सर्वे ने दी जिसमें करीब 37% नियोक्ताओं ने कहा कि वे Gen Z के किसी नए ग्रेजुएट को नियुक्त करने की तुलना में AI को प्राथमिकता देंगे। यह आंकड़ा Hult International Business School से जुड़े एक सर्वे पर आधारित रिपोर्ट में सामने आया था।

युवा कर्मचारियों के बारे में मैनेजरों की शिकायतों में यह धारणा भी शामिल है कि कुछ Gen Z कर्मचारी वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर ज्यादा सख्त, अथॉरिटी को लेकर कम सहज और पारंपरिक ऑफिस संस्कृति के अनुरूप ढलने में कठिनाई महसूस करते हैं। हालांकि यह पूरी पीढ़ी पर लागू होने वाला निष्कर्ष नहीं है।

कंपनियां आखिर AI को क्यों चुनना चाहती हैं?

सबसे बड़ा कारण है लागत और उत्पादकता

AI ऐसे कई एंट्री-लेवल काम कर सकता है जिनके लिए पहले बड़ी संख्या में जूनियर कर्मचारियों की जरूरत पड़ती थी। डेटा प्रोसेसिंग, बेसिक रिसर्च, कंटेंट ड्राफ्टिंग, कस्टमर सपोर्ट और नियमित प्रशासनिक कार्यों में ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है।

ऐसे में कुछ कंपनियों के लिए एक AI सिस्टम को अपनाना, बड़ी संख्या में नए कर्मचारियों को भर्ती करके उन्हें ट्रेन करने की तुलना में ज्यादा आकर्षक विकल्प दिखाई दे सकता है।

लेकिन असली संकट सिर्फ Gen Z की ‘कमी’ नहीं

यही वह जगह है जहां विशेषज्ञ इस बहस को थोड़ा अलग नजरिए से देखते हैं।

एंट्री-लेवल कर्मचारी आमतौर पर नौकरी के साथ ही कई जरूरी चीजें सीखते हैं—क्लाइंट से बात करना, मीटिंग में अपनी बात रखना, वरिष्ठ सहयोगियों से सीखना, गलतियों को सुधारना और मुश्किल परिस्थितियों में फैसला लेना।

लेकिन कंपनियों में ट्रेनिंग और मेंटरशिप पर निवेश लंबे समय से घटने की बात सामने आई है। Business Insider की हालिया रिपोर्ट में भी विशेषज्ञों ने कहा कि नियोक्ताओं की ओर से नए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी कम हुई है।

यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Gen Z नौकरी के लिए तैयार है या नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या कंपनियां उन्हें तैयार करने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन दे रही हैं।

Remote work ने भी बढ़ाई चुनौती

युवा कर्मचारियों के लिए ऑफिस में वरिष्ठ सहयोगियों को देखकर सीखने के अवसर कम होने की बात भी सामने आई है।

एक हालिया अध्ययन पर चर्चा करते हुए Fortune ने बताया कि रिमोट वर्क के बढ़ने के साथ कंपनियों में जूनियर कर्मचारियों की भर्ती प्रभावित हुई है। ऑफिस से दूर रहने पर नए कर्मचारी अनौपचारिक बातचीत, वरिष्ठों का काम देखने और रोजमर्रा की छोटी-छोटी सीख से वंचित हो सकते हैं।

यही वजह है कि कुछ कंपनियां अनुभवी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने लगी हैं—क्योंकि उन्हें कम ट्रेनिंग की जरूरत होती है।

AI से एंट्री-लेवल नौकरियों पर सबसे ज्यादा दबाव

AI का असर सबसे पहले उन नौकरियों पर दिखाई दे रहा है जिनमें काम अपेक्षाकृत दोहराव वाला या आसानी से डिजिटल किया जा सकता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, Stanford के 2025 के शोध में AI से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में 22 से 25 वर्ष के कर्मचारियों के रोजगार में 13% की गिरावट देखी गई थी।

यह आंकड़ा बताता है कि AI का असर सिर्फ भविष्य की आशंका नहीं है; कुछ एंट्री-लेवल भूमिकाओं में इसका प्रभाव पहले से दिखाई दे रहा है।

फिर Gen Z के लिए रास्ता क्या है?

विशेषज्ञों के मुताबिक युवा ग्रेजुएट्स के लिए सिर्फ डिग्री या AI टूल चलाने की क्षमता पर्याप्त नहीं होगी।

Communication, problem-solving, critical thinking, teamwork और adaptability जैसी क्षमताएं ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसके साथ AI को समझना और उसे अपने काम को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करना भी जरूरी होता जा रहा है।

यानी भविष्य की प्रतिस्पर्धा शायद “इंसान बनाम रोबोट” की नहीं होगी। असली मुकाबला उन कर्मचारियों के बीच हो सकता है जो AI का प्रभावी इस्तेमाल कर सकते हैं और उन लोगों के बीच जो तकनीकी बदलाव के साथ खुद को नहीं बदल पाते।

क्या पूरी Gen Z को ‘कामचोर’ कहना सही है?

यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

Gen Z की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाले मैनेजर जरूर हैं, लेकिन दूसरी तरफ युवा कर्मचारी भी ऐसे बाजार में प्रवेश कर रहे हैं जहां एंट्री-लेवल नौकरियां कम, AI का इस्तेमाल ज्यादा और कंपनियों की अपेक्षाएं पहले से ऊंची हैं।

इसलिए समस्या को सिर्फ “Gen Z काम नहीं करना चाहती” कहकर समझना अधूरा होगा। कंपनियों को भी यह तय करना होगा कि वे नए कर्मचारियों से तैयार प्रोफेशनल चाहते हैं या उन्हें नौकरी के दौरान सीखने का मौका देने को तैयार हैं।

AI भले ही कई शुरुआती काम संभाल ले, लेकिन किसी संगठन के लिए अगली पीढ़ी के अनुभवी कर्मचारी अपने आप तैयार नहीं होंगे। अगर कंपनियां आज जूनियर कर्मचारियों को भर्ती और ट्रेन करना बंद कर देती हैं, तो कल उनके पास अनुभवी प्रतिभाओं की कमी भी हो सकती है।

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