यूपी की इस सरकारी योजना से लोन लेकर आर्यन और प्रखर ने खड़ा किया बिजनेस, अब दूसरों को दे रहे रोजगार
उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाएं युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने और रोजगार देने का जरिया बन रही हैं। आर्यन और प्रखर की कहानी भी इसी बदलाव की मिसाल है। सरकारी योजना के तहत लोन लेकर दोनों ने अपना कारोबार खड़ा किया और अब अपने साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की अलग-अलग स्वरोजगार योजनाओं में युवाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता और ऋण की सुविधा दी जाती है।
लेखक
Jyoti Mukherjee
सरकारी मदद से बदली तस्वीर, लोन लेकर आर्यन और प्रखर ने शुरू किया कारोबार
लखनऊ: नौकरी की तलाश करने के बजाय अपना काम शुरू करने की सोच रखने वाले युवाओं के लिए सरकारी योजनाएं बड़ा सहारा बन रही हैं। उत्तर प्रदेश में सरकार की ओर से युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता और लोन उपलब्ध कराने की कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन्हीं योजनाओं का लाभ लेकर आर्यन और प्रखर ने अपना कारोबार खड़ा किया और अब खुद के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार का रास्ता तैयार कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार MSME, स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। राज्य की आधिकारिक निवेश एजेंसी के मुताबिक प्रदेश में 90 लाख से अधिक पंजीकृत और गैर-पंजीकृत MSME हैं और ये इकाइयां रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
लोन को बनाया कारोबार का आधार
आर्यन और प्रखर ने सरकारी योजना के जरिए मिलने वाली आर्थिक सहायता का इस्तेमाल अपने बिजनेस को शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने में किया। शुरुआत आसान नहीं थी। कारोबार के लिए पूंजी जुटाना, बाजार समझना और ग्राहकों तक पहुंच बनाना उनके सामने बड़ी चुनौतियां थीं।
लेकिन सरकारी ऋण ने शुरुआती पूंजी की समस्या को काफी हद तक आसान किया। दोनों ने इस अवसर को सिर्फ व्यक्तिगत कमाई तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कारोबार बढ़ने के साथ दूसरे लोगों को भी काम से जोड़ना शुरू किया।
सरकारी योजनाओं का मकसद सिर्फ लोन देना नहीं
उत्तर प्रदेश में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना जैसी योजनाएं संचालित हैं। इनका उद्देश्य शिक्षित युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। राज्य की आधिकारिक वेबसाइट भी मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना को प्रदेश की MSME और उद्यमिता नीतियों का हिस्सा बताती है।
यानी सरकारी मदद का लक्ष्य सिर्फ किसी व्यक्ति को ऋण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसे रोजगार मांगने वाले से रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।
बिजनेस बढ़ा तो रोजगार भी बढ़ा
आर्यन और प्रखर की कहानी का सबसे अहम पहलू यही है कि सरकारी सहायता से शुरू हुआ उनका कारोबार अब दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार का जरिया बन रहा है।
एक छोटे उद्यम की सफलता का असर सिर्फ उसके मालिक तक सीमित नहीं रहता। कारोबार में उत्पादन, बिक्री, पैकेजिंग, डिलीवरी और दूसरी सेवाओं की जरूरत बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार भी MSME क्षेत्र को रोजगार निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम मानती है। राज्य की निवेश वेबसाइट के अनुसार, प्रदेश में MSME की बड़ी मौजूदगी है और पारंपरिक उत्पादों से लेकर इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा और दूसरे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं मौजूद हैं।
युवाओं के लिए क्या है संदेश?
आर्यन और प्रखर की सफलता उन युवाओं के लिए भी संदेश है जो नौकरी न मिलने के कारण परेशान हैं, लेकिन उनके पास कोई कारोबारी विचार या हुनर है।
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से पहले पात्रता, परियोजना की लागत, बैंक ऋण की शर्तें, सब्सिडी/मार्जिन मनी और संबंधित विभाग के नियम अच्छी तरह समझना जरूरी है। उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर अलग-अलग नीतियों और योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
छोटे कारोबार से बड़ी कहानी
आर्यन और प्रखर की कहानी की खासियत यही है कि उन्होंने सरकारी सहायता को अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि कारोबार शुरू करने की सीढ़ी बनाया। लोन लेकर शुरू किया गया काम जब आगे बढ़ता है और उसमें दूसरे लोगों को रोजगार मिलता है, तो इसका असर परिवार से लेकर स्थानीय अर्थव्यवस्था तक दिखाई देता है।
उत्तर प्रदेश में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से MSME, स्टार्टअप और स्वरोजगार से जुड़ी कई नीतियां लागू हैं। राज्य की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 16,000 से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं और स्टार्टअप्स द्वारा एक लाख से अधिक नौकरियां सृजित की गई हैं।
आर्यन और प्रखर की कहानी इसी बदलाव की ओर इशारा करती है—सरकारी योजना से मिला लोन अगर सही बिजनेस आइडिया, मेहनत और बाजार की समझ के साथ इस्तेमाल किया जाए, तो वही पूंजी सिर्फ एक व्यक्ति की आमदनी नहीं बढ़ाती, बल्कि कई परिवारों के लिए रोजगार का जरिया बन सकती है।
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