ईरान-अमेरिका युद्ध: AI 'किल चेन' ने निगली 123 बच्चों की जिंदगी, US से कहां हुई चूक?
ईरान के मिनाब शहर में एक स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमले में कम से कम 123 बच्चों समेत 150 से अधिक लोगों की मौत के मामले ने युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर 2026 में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, पेंटागन की आंतरिक जांच में पुराने खुफिया डेटा, पुरानी सैटेलाइट इमेजरी, जल्दबाजी में तैयार की गई टारगेट लिस्ट और AI पर अत्यधिक निर्भरता को इस त्रासदी के पीछे की प्रमुख वजहों में बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले Maven Smart System ने उस स्थान को संभावित सैन्य लक्ष्य के रूप में प्रोसेस किया, जबकि वहां वर्षों पहले एक स्कूल स्थापित हो चुका था। हालांकि, यह कहना कि AI ने अकेले हमला तय किया, पूरी तस्वीर नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में मानवीय सत्यापन, खुफिया डेटा की गुणवत्ता और लक्ष्य चयन की प्रक्रिया में कई स्तरों पर चूक की बात सामने आई है।
लेखक
Vinay Mishra
मिनाब के स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमला और 123 बच्चों की मौत
नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान 28 फरवरी 2026 को दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में स्थित Shajarah Tayyebeh Elementary School पर दो अमेरिकी Tomahawk मिसाइलें गिरीं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, हमले में 150 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें कम से कम 123 बच्चे शामिल थे।
अब इस हमले से जुड़ी एक आंतरिक अमेरिकी जांच के विवरण ने युद्ध में AI आधारित टारगेटिंग सिस्टम की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। Bloomberg की जांच पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने इसे एक ऐसी घटनाओं की श्रृंखला बताया है, जिसमें पुरानी खुफिया जानकारी, लक्ष्य की बदल चुकी स्थिति, कम समय में बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी और AI पर जरूरत से ज्यादा भरोसा शामिल था।
जिस जगह को सैन्य परिसर माना गया, वहां स्कूल चल रहा था
मिनाब का यह परिसर अतीत में एक सैन्य परिसर का हिस्सा रहा था। इसी पुराने रिकॉर्ड के कारण अमेरिकी सैन्य डेटाबेस में यह स्थान सैन्य प्रतिष्ठान के रूप में दर्ज रहा।
लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि परिसर में वर्षों पहले बदलाव हो चुके थे। स्कूल क्षेत्र को अलग दीवारों और प्रवेश द्वारों से सैन्य क्षेत्र से अलग किया गया था। 2018 की तस्वीरों में स्कूल परिसर में रंगीन दीवारें, फुटबॉल मैदान और बच्चों की गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली जगहें भी दिखाई देती थीं।
यानी जिस डेटा के आधार पर पुराना सैन्य वर्गीकरण बना हुआ था, जमीन पर उस स्थान का इस्तेमाल बदल चुका था।
AI 'किल चेन' में Maven की भूमिका क्या थी?
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की लक्ष्य पहचान और सैन्य संचालन प्रक्रिया में Maven Smart System का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह AI आधारित प्रणाली बड़ी मात्रा में डेटा को एक साथ प्रोसेस करके सैन्य अधिकारियों को जानकारी और संभावित लक्ष्यों के बारे में विश्लेषण उपलब्ध कराती है।
Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, Maven में 150 से अधिक डेटा स्रोतों से जानकारी को एक साथ जोड़ने की क्षमता है। समस्या यह बताई गई कि सिस्टम के सामने मौजूद मूल डेटा में पुरानी जानकारी थी और कुछ महत्वपूर्ण बदलाव मुख्य टारगेटिंग डेटाबेस तक नहीं पहुंच पाए थे।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक AI ने स्वतंत्र रूप से मिसाइल दागने का फैसला नहीं लिया था। AI-सहायता प्राप्त प्रक्रिया में मानवीय निर्णय और लक्ष्य सत्यापन भी शामिल थे। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले भी कहा था कि अंतिम फैसला इंसान लेते हैं।
फिर US से कहां हुई चूक?
हालिया रिपोर्टों में एक अकेली गलती के बजाय कई स्तरों पर हुई चूकों की श्रृंखला की बात कही गई है।
पहली चूक—पुराना खुफिया डेटा: अमेरिकी डेटाबेस में परिसर का पुराना सैन्य वर्गीकरण बना हुआ था।
दूसरी—नई जानकारी का सही सिस्टम तक नहीं पहुंचना: रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी विश्लेषक ने 2019 के आसपास परिसर में हुए बदलावों पर ध्यान दिया था, लेकिन उसकी टिप्पणियां ऐसे सिस्टम में दर्ज हुईं जो मुख्य सैन्य खुफिया डेटाबेस से जुड़ा नहीं था।
तीसरी—सैटेलाइट इमेजरी का पर्याप्त इस्तेमाल न होना: उपलब्ध तस्वीरों में स्कूल के रूप में परिसर के इस्तेमाल के संकेत मौजूद थे, लेकिन लक्ष्य तैयार करने की प्रक्रिया में इन बदलावों को पर्याप्त महत्व नहीं मिला।
चौथी—AI पर अत्यधिक निर्भरता: अधिकारियों के अनुसार कुछ कर्मियों ने Maven से यह उम्मीद की कि वह पुराने या विरोधाभासी डेटा को खुद पहचानकर चेतावनी देगा। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसा भरोसा उचित था या नहीं, यह खुद जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पांचवीं—कम समय में बड़े पैमाने पर लक्ष्य तय करना: रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी प्रशासन ने बेहद बड़े पैमाने पर हवाई हमले का आदेश दिया। पहले 24 घंटों में 1,000 से अधिक ईरानी लक्ष्यों पर हमले की बात सामने आई है। इससे लक्ष्य तय करने के लिए उपलब्ध समय कम हो गया।
क्या मानव निगरानी भी विफल हुई?
यह सवाल इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने मार्च में कहा था कि सेना AI टूल्स का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर डेटा को तेजी से समझने के लिए कर रही है, लेकिन अंतिम लक्ष्य चयन और हमला करने का फैसला इंसानों द्वारा किया जाना था।
मगर हालिया जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, मिनाब मामले में लक्ष्य की वास्तविक स्थिति को पर्याप्त रूप से सत्यापित करने के कई अवसर मौजूद थे। यही कारण है कि विवाद केवल AI की क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय जांच, डेटा प्रबंधन और सैन्य निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र की जांच में भी उठे सवाल
मिनाब हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र की Independent International Fact-Finding Mission on Iran ने भी गंभीर निष्कर्ष दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई में यह सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध सभी व्यवहार्य उपाय नहीं किए गए कि लक्ष्य वास्तव में वैध सैन्य लक्ष्य था।
संयुक्त राष्ट्र की जांच ने हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के संदर्भ में गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि, अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से स्कूल को निशाना बनाने की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है और अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका नागरिकों को निशाना नहीं बनाता।
अमेरिका ने अब तक क्या कहा?
अमेरिकी रक्षा विभाग ने मामले की जांच जारी होने का हवाला देते हुए विस्तृत टिप्पणी से परहेज किया है। रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन की पूरी जांच सार्वजनिक नहीं की गई है, हालांकि अधिकारियों के मुताबिक जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि Maven या AI सिस्टम को अकेले इस त्रासदी का जिम्मेदार ठहराना सही तस्वीर नहीं होगी। सिस्टम जिन डेटा पर काम करता है, उनकी गुणवत्ता और उन्हें सत्यापित करने की जिम्मेदारी भी सैन्य प्रक्रिया का हिस्सा है। Palantir ने भी रिपोर्टों के अनुसार कहा है कि उसके सॉफ्टवेयर की जिम्मेदारी मूल डेटा की गुणवत्ता या खुफिया कमियों की पहचान करना नहीं है।
AI से युद्ध तेज हुआ, लेकिन सवाल जवाबदेही का
इस घटना ने युद्ध में AI के इस्तेमाल की एक बड़ी चुनौती सामने रखी है। AI बड़ी मात्रा में डेटा को इंसानों की तुलना में बहुत तेजी से प्रोसेस कर सकता है, लेकिन यदि उसके सामने पुराना या गलत डेटा हो तो तेज विश्लेषण गलत परिणाम को और तेजी से आगे बढ़ा सकता है।
यही कारण है कि विशेषज्ञ अब AI आधारित टारगेटिंग में मानवीय निगरानी, डेटा की ताजगी, स्वतंत्र सत्यापन और जवाबदेही को लेकर नए नियमों की मांग कर रहे हैं। Article 36 जैसे विशेषज्ञ संगठनों ने भी सैन्य लक्ष्य निर्धारण में AI की भूमिका के लिए स्पष्ट सुरक्षा उपायों और मानव नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मिनाब स्कूल पर हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सवाल सिर्फ एक तकनीक की विफलता का नहीं है। यह इस बात की परीक्षा है कि अत्याधुनिक AI, विशाल खुफिया नेटवर्क और इंसानी निर्णय प्रक्रिया के बीच गलत जानकारी को अंतिम सैन्य आदेश तक पहुंचने से रोकने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाए।
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