शी चिनफिंग के शाही स्वागत के बदले क्या चाहते हैं ट्रंप? ड्रैगन-अमेरिका की जुगलबंदी की पूरी कहानी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के वॉशिंगटन दौरे के लिए बेहद भव्य स्वागत की तैयारी की है। 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में स्टेट अराइवल सेरेमनी, सैन्य सम्मान और B-2 बॉम्बर व F-22 रैप्टर के फ्लाईओवर की योजना है। यह शी की एक दशक से अधिक समय बाद वॉशिंगटन यात्रा है। हालांकि इस राजकीय स्वागत के पीछे अमेरिका और चीन के बीच कई अहम सौदेबाजी के मुद्दे हैं। ट्रंप प्रशासन चीन से रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों की नियमित आपूर्ति, व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने, अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों की खरीद तथा AI और ईरान जैसे मुद्दों पर सहयोग चाहता है। वहीं ताइवान, टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट कंट्रोल और चीन के ईरान के साथ संबंध बातचीत के संवेदनशील विषय बने हुए हैं।
लेखक
Vinay Mishra
शी चिनफिंग का ‘शाही’ स्वागत, लेकिन बातचीत में कई बड़े मुद्दे
वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापार और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का वॉशिंगटन दौरा दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी के स्वागत के लिए असाधारण स्तर की तैयारियां की हैं।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, 24 सितंबर को शी चिनफिंग के सम्मान में स्टेट अराइवल सेरेमनी होगी, जिसमें 479 सैन्यकर्मी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में अमेरिकी और चीनी राष्ट्रगान, सैन्य सम्मान और सैन्य फ्लाईओवर शामिल होगा। फ्लाईओवर में B-2 Spirit और चार F-22 Raptors शामिल होंगे। शाम को व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर भी आयोजित किया जाएगा।
लेकिन इस भव्य स्वागत के पीछे कूटनीति और आर्थिक हितों की एक लंबी सूची है। सवाल यही है कि ट्रंप चीन से बदले में क्या हासिल करना चाहते हैं?
1. रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई
अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और आधुनिक औद्योगिक तकनीक में इन खनिजों की अहम भूमिका है।
रॉयटर्स के अनुसार, चीन वैश्विक रेयर-अर्थ माइनिंग का करीब 70 प्रतिशत, रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 85 प्रतिशत और रेयर-अर्थ मेटल एलॉय व मैग्नेट उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत नियंत्रित करता है। यही निर्भरता अमेरिका के लिए रणनीतिक चिंता का विषय है।
ट्रंप प्रशासन चाहता है कि चीन रेयर अर्थ और दूसरे रणनीतिक खनिजों के निर्यात को अधिक नियमित और भरोसेमंद बनाए। चीन ने पहले अमेरिकी टैरिफ के जवाब में रेयर-अर्थ निर्यात पर नियंत्रण कड़ा किया था, जिससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ी थी।
2. ट्रेड ट्रूस को आगे बढ़ाने की कोशिश
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव कम करने के लिए बनी मौजूदा ट्रेड ट्रूस नवंबर में समाप्त होनी है। दोनों देशों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि बातचीत टूटने की स्थिति में फिर से ऊंचे टैरिफ और टेक्नोलॉजी प्रतिबंधों का दौर न शुरू हो।
रिपोर्टों के मुताबिक, वॉशिंगटन और बीजिंग के अधिकारी ट्रूस को आगे बढ़ाने पर बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका जहां अवधि और चीन की प्रतिबद्धताओं को लेकर अपनी शर्तें रखना चाहता है, वहीं बीजिंग लंबी अवधि की स्थिरता चाहता है।
यानी ट्रंप के लिए शी के साथ मुलाकात का एक बड़ा लक्ष्य अमेरिकी बाजार और उद्योगों के लिए ठोस आर्थिक प्रतिबद्धताएं हासिल करना है।
3. चीन से अमेरिकी सामान की ज्यादा खरीद
अमेरिका लंबे समय से चीन के साथ व्यापार घाटे को लेकर चिंता जताता रहा है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन चीन से अमेरिकी उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है।
मई 2026 में दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में चीन की ओर से अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद और 200 बोइंग विमानों की शुरुआती खरीद की प्रतिबद्धता शामिल थी। अमेरिकी सरकार ने इसे अमेरिकी किसानों और उद्योगों के लिए बाजार खोलने वाली व्यवस्था के रूप में पेश किया था।
सितंबर की बातचीत में इन मौजूदा प्रतिबद्धताओं की समीक्षा और आगे की खरीदारी भी चर्चा का हिस्सा हो सकती है।
4. AI पर सहयोग, लेकिन तकनीकी बढ़त की लड़ाई भी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा का एक प्रमुख क्षेत्र बन चुका है।
सितंबर में दोनों देशों ने US-China AI Dialogue शुरू करने पर सहमति बनाई है। इसका उद्देश्य AI से जुड़े सुरक्षा जोखिमों और राष्ट्रीय सुरक्षा स्तर तक पहुंचने वाली घटनाओं पर बातचीत के लिए एक तंत्र बनाना है।
हालांकि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका और चीन AI प्रतिस्पर्धा खत्म करने जा रहे हैं। वॉशिंगटन अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखना चाहता है, जबकि बीजिंग अपने AI विकास पर ऐसे प्रतिबंधों का विरोध करता रहा है जिन्हें वह अपनी तकनीकी प्रगति सीमित करने वाला मानता है।
5. ईरान के मुद्दे पर चीन का रुख
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर भी ट्रंप-शी वार्ता पर पड़ सकता है। चीन के ईरान के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंध हैं और बीजिंग मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव से अपने आर्थिक हितों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है।
रिपोर्टों के मुताबिक, चीन ईरान के साथ संवाद में भूमिका निभाने की इच्छा दिखा सकता है। वहीं वॉशिंगटन बीजिंग के प्रभाव का इस्तेमाल क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए करना चाहे तो यह भी बातचीत का हिस्सा बन सकता है।
6. ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल
अमेरिका-चीन रिश्तों में ताइवान सबसे जटिल रणनीतिक मुद्दों में से एक है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान के साथ सुरक्षा संबंध और हथियारों की बिक्री बनाए रखता है।
ट्रंप के लिए यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि वह चीन के साथ आर्थिक समझौते करते समय सुरक्षा और व्यापार के मुद्दों को अलग-अलग रखने की कोशिश कर रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, शी बातचीत में ताइवान पर अमेरिकी समर्थन को लेकर अपनी स्थिति मजबूती से रख सकते हैं।
‘शाही स्वागत’ के पीछे असल सौदेबाजी क्या है?
शी चिनफिंग का वॉशिंगटन में भव्य स्वागत दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर रखने की कोशिश का संकेत है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है।
मौजूदा बातचीत में व्यापार, रेयर अर्थ, अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों की खरीद, AI, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अमेरिका चीन से ठोस आर्थिक और रणनीतिक प्रतिबद्धताएं चाहता है, जबकि चीन व्यापारिक स्थिरता, तकनीकी क्षेत्र में अपनी गुंजाइश और ताइवान जैसे मुद्दों पर अमेरिकी नीति में राहत चाहता है।
इसलिए ट्रंप का शी के लिए लाल कालीन बिछाना केवल राजकीय शिष्टाचार नहीं, बल्कि ऐसे समय में कूटनीतिक संवाद का हिस्सा है जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सहयोग और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा दोनों को एक साथ संभालने की कोशिश कर रही हैं।
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