'बाढ़ आई, बाढ़ आई'... नेपाल में मची तबाही के दौरान लंच ब्रेक ने ऐसे बचाई स्कूल के बच्चों की जान
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच धाडिंग जिले के एक स्कूल से दिल दहला देने वाली लेकिन राहत भरी कहानी सामने आई है। श्री बागेश्वरी माध्यमिक विद्यालय में कुछ बच्चे जिस वक्त अपनी कक्षा से लंच ब्रेक के लिए बाहर निकले थे, उसी दौरान अचानक बाढ़ का पानी आ गया। बाकी कक्षाओं में मौजूद बच्चों को शिक्षकों ने खतरा भांपते ही तुरंत बाहर निकलने को कहा। इस तेज फैसले ने कई बच्चों की जान बचा दी।
लेखक
Vinay Mishra
काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई इलाकों को तबाह कर दिया। घर, बाजार और स्कूल तक पानी और मलबे की चपेट में आ गए। इस त्रासदी के बीच धाडिंग जिले के गलछी इलाके से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसमें महज कुछ मिनटों के अंतर ने कई स्कूली बच्चों की जिंदगी बचा दी।
यहां कुछ बच्चे उस वक्त अपनी कक्षा से बाहर थे क्योंकि लंच ब्रेक चल रहा था। तभी अचानक बाढ़ का पानी तेजी से स्कूल की ओर बढ़ा। दूसरी कक्षाओं में मौजूद बच्चों को शिक्षकों ने खतरे का अंदाजा होते ही तत्काल बाहर निकलने का निर्देश दिया।
लंच ब्रेक बना जिंदगी और मौत के बीच ढाल
गलछी स्थित श्री बागेश्वरी माध्यमिक विद्यालय में उस दिन सामान्य तरीके से पढ़ाई चल रही थी। कुछ बच्चे लंच ब्रेक के दौरान कक्षाओं से बाहर निकल चुके थे। तभी बाढ़ का पानी तेजी से इलाके में घुसने लगा।
जिन कक्षाओं में बच्चे मौजूद थे, वहां शिक्षकों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलने को कहा। बच्चों से कहा गया कि वे अपने बैग और टिफिन तक छोड़ दें और सुरक्षित जगह की ओर निकलें।
एक छात्र की मां लक्ष्मी श्रेष्ठ ने बताया कि शिक्षकों ने बच्चों को बाढ़ की जानकारी देकर तत्काल बाहर जाने को कहा। उनके मुताबिक, इसी वजह से बच्चे बच सके।
'बाढ़ आई, बाढ़ आई'... और शुरू हो गई भागने की होड़
अचानक मिले खतरे के संकेत के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। बच्चों और शिक्षकों ने समय गंवाए बिना सुरक्षित स्थान की ओर जाने की कोशिश की।
कुछ ही देर में बाढ़ का पानी स्कूल परिसर में घुस आया। पानी अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा लेकर आया था। स्कूल की दीवारों और बेंचों पर कीचड़ की मोटी परत जम गई।
दीवारों पर बने निशान बताते हैं कि पानी कितनी तेजी से ऊपर चढ़ा था।
बच्चों की जान बची, लेकिन स्कूल तबाह
बाढ़ का पानी उतरने के बाद जब बच्चे और उनके माता-पिता स्कूल पहुंचे तो वहां का मंजर देखकर वे सन्न रह गए।
कक्षाओं में कीचड़, पानी और मलबा भरा था। किताबें और कॉपियां खराब हो चुकी थीं। स्कूल परिसर में बच्चों के छोटे-छोटे बैग और दूसरे सामान कीचड़ में दबे मिले।
कई माता-पिता अपने बच्चों के बैग और जरूरी सामान तलाशते नजर आए। लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी राहत यही थी कि उनके बच्चे सुरक्षित थे।
एक मां को अपने बेटे का बैग नहीं मिला, लेकिन उन्होंने कहा कि उनका बेटा जिंदा है, यही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।
सिर्फ एक स्कूल नहीं, पूरे नेपाल की शिक्षा व्यवस्था पर संकट
नेपाल की इस बाढ़ ने शिक्षा व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। सेव द चिल्ड्रेन के अनुसार बाढ़ से प्रभावित जिलों में कम से कम 69 स्कूल नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे करीब 19,000 बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है।
हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों को तीन दिनों के लिए बंद रखने का आदेश दिया था। विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं भी रोक दी गईं। लगातार बाढ़ के खतरे के बीच यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य कक्षाएं कब पूरी तरह शुरू हो पाएंगी।
एक दूसरे स्कूल में शिक्षक ने बचाई 1,600 से ज्यादा जानें
नेपाल की इस आपदा के बीच एक और शिक्षक की बहादुरी की कहानी सामने आई है। नुवाकोट के त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाध्यापक राजेंद्र दवाड़ी ने बाढ़ की चेतावनी मिलने के बाद तत्काल स्कूल खाली कराने का फैसला लिया।
उन्हें कुछ ही मिनटों के भीतर बाढ़ की गंभीरता को लेकर कई चेतावनियां मिली थीं। इसके बाद उन्होंने कक्षाएं रोककर बच्चों को ऊंची और सुरक्षित जगह पर भेजने का फैसला किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, स्कूल में करीब 1,600 छात्र थे। दवाड़ी ने कहा कि अगर फैसला करीब 10 मिनट देर से लिया जाता तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी।
एक छात्रा ने बताया कि वे बाढ़ से महज कुछ सेकंड के अंतर से बच पाए। उसके मुताबिक, बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से भागकर सुरक्षित जगह पहुंचे, जबकि देखते ही देखते पानी और मलबे ने आसपास के इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
एक छोटी सी देरी भी पड़ सकती थी भारी
नेपाल की इस त्रासदी से सामने आई दोनों घटनाओं में एक बात समान है—समय पर लिया गया फैसला।
धाडिंग में लंच ब्रेक के दौरान कई बच्चे कक्षा से बाहर थे और शिक्षकों ने बाकी बच्चों को भी समय रहते निकाल दिया। नुवाकोट में प्रधानाध्यापक ने चेतावनी मिलते ही स्कूल खाली कराने में देर नहीं की।
प्राकृतिक आपदा को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय रहते चेतावनी और त्वरित निकासी से बड़ी संख्या में लोगों की जान जरूर बचाई जा सकती है।
बाढ़ के बाद भी खतरा बरकरार
नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रभावित इलाकों में लगातार खतरे की चेतावनियां दी जा रही हैं और लोगों को ऊंचे तथा सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
इस बीच स्कूलों में लौटे बच्चे अब अपनी किताबों, बैग और दूसरी चीजों को मलबे के बीच तलाश रहे हैं। उनके लिए स्कूल की इमारत भले ही बर्बाद हो गई हो, लेकिन जिंदा बच निकलना इस आपदा के बीच सबसे बड़ी जीत है।
एक लंच ब्रेक, कुछ मिनटों की सतर्कता और शिक्षकों का सही फैसला—नेपाल की इस भयावह बाढ़ में इन बच्चों के लिए यही जिंदगी की सबसे बड़ी वजह बन गया।
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