UPI से S-400 और एनर्जी तक... पीएम मोदी और पुतिन की आज मुलाकात, भारत-रूस के बीच बड़ी डील पर नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO समिट के इतर द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं की मुलाकात में ऊर्जा, उर्वरक, व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग प्रमुख मुद्दे रहने की उम्मीद है। रूस की ओर से भारत को पांच और S-400 एयर डिफेंस स्क्वाड्रन देने का करीब 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
लेखक
Vinay Mishra
बिश्केक: भारत और रूस के रिश्तों के लिहाज से सोमवार का दिन अहम रहने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात दिसंबर 2025 में हुई वार्षिक शिखर बैठक के बाद पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी।
बैठक में भारत-रूस की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा होने की उम्मीद है। तेल और गैस, उर्वरक, व्यापार, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं।
S-400 पर बड़ा अपडेट
मोदी-पुतिन मुलाकात से ठीक पहले रूस ने भारत के लिए पांच अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस स्क्वाड्रन की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस प्रस्ताव की अनुमानित कीमत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक है और भारतीय रक्षा मंत्रालय फिलहाल इसे देख रहा है।
भारत पहले ही रूस से पांच S-400 स्क्वाड्रन खरीद चुका है। ऐसे में अगर नया प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो देश की लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता और मजबूत होगी।
S-400 सिस्टम विमानों, ड्रोन और मिसाइलों समेत कई तरह के हवाई खतरों से निपटने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल में भारत के लिए मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क की अहमियत और बढ़ गई है।
ऊर्जा सहयोग भी रहेगा अहम
रूस भारत के लिए लंबे समय से एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का व्यापार पिछले कुछ वर्षों में रिश्तों का प्रमुख आर्थिक आधार रहा है।
वहीं, भारत के लिए उर्वरक आपूर्ति भी महत्वपूर्ण है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मॉस्को यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को उर्वरकों की आपूर्ति जारी रखने का आश्वासन दिया था।
ऐसे में मोदी-पुतिन बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरक आपूर्ति को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
UPI और डिजिटल पेमेंट पर भी नजर
भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंध अब सिर्फ तेल और रक्षा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश डिजिटल पेमेंट और वित्तीय कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
UPI और रूस की भुगतान प्रणालियों के बीच संभावित कनेक्टिविटी से दोनों देशों के बीच व्यापार और यात्रियों के लिए भुगतान आसान बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, मौजूदा बैठक में किसी विशेष UPI समझौते पर हस्ताक्षर की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इसलिए UPI को बैठक के संभावित आर्थिक सहयोग के हिस्से के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा, न कि पहले से तय डील के तौर पर।
व्यापार बढ़ाने की चुनौती
भारत-रूस के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। रूस से भारत के बड़े पैमाने पर तेल आयात के कारण द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा ऊंचा हुआ है, लेकिन इसके साथ व्यापार असंतुलन भी एक चुनौती बना हुआ है।
भारत की कोशिश है कि रूस को होने वाला भारतीय निर्यात बढ़े और व्यापार ज्यादा संतुलित हो। इसके लिए दोनों देश नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। हाल में जयशंकर की मॉस्को यात्रा के दौरान भी आर्थिक सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि की बात सामने आई थी।
परमाणु ऊर्जा और तकनीकी सहयोग
ऊर्जा क्षेत्र में बातचीत का दायरा केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहने वाला। भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग भी लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा रहा है।
रूस भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में महत्वपूर्ण साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा, विज्ञान एवं तकनीक और औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा संभव है।
यूक्रेन युद्ध और वैश्विक हालात भी एजेंडे में
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया की स्थिति के बीच मोदी-पुतिन की बैठक का रणनीतिक महत्व भी काफी बढ़ गया है।
भारत लगातार रूस और पश्चिमी देशों दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में मोदी और पुतिन क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी विचार साझा कर सकते हैं।
दिसंबर में फिर हो सकती है मुलाकात
दोनों नेताओं की आज की बैठक के बाद भी भारत-रूस शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क जारी रहने की संभावना है। पुतिन की भारत यात्रा अगले महीने प्रस्तावित है और दोनों नेता सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन के दौरान भी मुलाकात कर सकते हैं।
क्यों अहम है मोदी-पुतिन मुलाकात?
मोदी और पुतिन की बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत अपनी रक्षा क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर कई मोर्चों पर काम कर रहा है।
एक तरफ S-400 जैसे रक्षा सौदों पर आगे बढ़ने की संभावना है, तो दूसरी तरफ तेल, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा और डिजिटल भुगतान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश है।
ऐसे में बिश्केक में होने वाली यह मुलाकात केवल दो नेताओं की नियमित बैठक नहीं होगी। इसके जरिए भारत और रूस यह संकेत भी दे सकते हैं कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी अब भी मजबूत और बहुआयामी है।
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