क्या है जीरो कैजुअल्टी ओडिशा मॉडल? भीषण भूकंप के बाद वेनेजुएला पहुंचे भारत के 'साइक्लोन मैन', दुनिया क्यों कर रही है तारीफ
भीषण भूकंप के बाद वेनेजुएला ने आपदा प्रबंधन में भारत के अनुभव का लाभ लेने के लिए देश के प्रसिद्ध 'साइक्लोन मैन' को आमंत्रित किया है। ओडिशा का जीरो कैजुअल्टी मॉडल वर्षों से दुनिया के लिए मिसाल बना हुआ है। जानिए आखिर इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत क्या है और कैसे इसने लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लेखक
Vinay Mishra

क्या है जीरो कैजुअल्टी ओडिशा मॉडल? भीषण भूकंप के बाद वेनेजुएला पहुंचे भारत के 'साइक्लोन मैन', दुनिया क्यों कर रही है तारीफ
बड़ी खबर
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के बाद आपदा प्रबंधन को लेकर भारत एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। आपदा जोखिम न्यूनीकरण और चक्रवात प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके भारत के वरिष्ठ विशेषज्ञ, जिन्हें 'साइक्लोन मैन' के नाम से जाना जाता है, वेनेजुएला पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य वहां की सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ मिलकर राहत, पुनर्वास और भविष्य की तैयारी के लिए भारत के सफल जीरो कैजुअल्टी ओडिशा मॉडल का अनुभव साझा करना है।
ओडिशा का यह मॉडल आज केवल भारत ही नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा भी एक सफल उदाहरण माना जाता है।
मुख्य बातें
वेनेजुएला में भीषण भूकंप के बाद भारत के विशेषज्ञ पहुंचे।
ओडिशा का जीरो कैजुअल्टी मॉडल दुनिया के लिए बना मिसाल।
समय पर चेतावनी, सुरक्षित निकासी और सामुदायिक भागीदारी इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत।
लाखों लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की रणनीति बनी सफलता की कुंजी।
कई देशों ने भारत के इस मॉडल में रुचि दिखाई है।
क्या है जीरो कैजुअल्टी ओडिशा मॉडल?
जीरो कैजुअल्टी मॉडल का अर्थ है कि प्राकृतिक आपदा चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, बेहतर तैयारी और समय पर कार्रवाई के जरिए मानव जीवन की हानि को शून्य या न्यूनतम स्तर तक लाया जाए।
ओडिशा ने पिछले दो दशकों में चक्रवातों के दौरान इसी सिद्धांत पर काम किया। पहले जहां एक बड़े चक्रवात में हजारों लोगों की जान चली जाती थी, वहीं बाद के वर्षों में अत्यंत शक्तिशाली चक्रवातों के दौरान भी मौतों की संख्या बेहद कम रही।
यह मॉडल केवल राहत कार्य नहीं बल्कि आपदा आने से पहले की तैयारी पर आधारित है।
क्यों कहा जाता है 'साइक्लोन मैन'?
भारत में आपदा प्रबंधन और विशेष रूप से चक्रवातों से निपटने की रणनीति विकसित करने वाले वरिष्ठ विशेषज्ञों को उनके लंबे अनुभव और सफल कार्यों के कारण 'साइक्लोन मैन' कहा जाता है।
इनकी पहचान समय पर चेतावनी प्रणाली को मजबूत बनाने, प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा बड़े पैमाने पर सुरक्षित निकासी अभियान चलाने के लिए रही है।
इसी अनुभव के कारण कई देश भारत से तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते हैं।
जीरो कैजुअल्टी मॉडल के पांच मजबूत स्तंभ
1. समय से पहले चेतावनी
मौसम विभाग से प्राप्त हर सूचना को तेजी से जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों और गांवों तक पहुंचाया जाता है।
2. बड़े पैमाने पर सुरक्षित निकासी
जो क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं, वहां के लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों और चक्रवात शेल्टर में पहुंचा दिया जाता है।
3. मजबूत चक्रवात शेल्टर
ओडिशा में वर्षों से हजारों लोगों की क्षमता वाले विशेष चक्रवात आश्रय केंद्र बनाए गए हैं, जहां भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था रहती है।
4. स्थानीय स्वयंसेवकों की भूमिका
गांव स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रशासन के साथ मिलकर लोगों को सुरक्षित निकालने, बुजुर्गों और बच्चों की मदद करने तथा राहत पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
5. सभी विभागों का समन्वय
पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग, एनडीआरएफ, दमकल, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाएं एक संयुक्त कमांड सिस्टम के तहत काम करती हैं।
ओडिशा ने कैसे बदली अपनी तस्वीर?
1999 के सुपर साइक्लोन ने ओडिशा में भारी तबाही मचाई थी और हजारों लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था में बड़े बदलाव किए।
अगले वर्षों में फानी, अम्फान, यास और अन्य शक्तिशाली चक्रवातों के दौरान लाखों लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। यही कारण है कि ओडिशा का मॉडल आज विश्व स्तर पर अध्ययन का विषय बन चुका है।
वेनेजुएला के लिए यह मॉडल क्यों महत्वपूर्ण?
भूकंप के बाद सबसे बड़ी चुनौती केवल राहत पहुंचाना नहीं होती, बल्कि भविष्य में ऐसी आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी करना भी होता है।
भारत का अनुभव वेनेजुएला को इन क्षेत्रों में मदद कर सकता है—
आपदा जोखिम का आकलन
पूर्व चेतावनी तंत्र विकसित करना
स्थानीय प्रशासन का प्रशिक्षण
सामुदायिक जागरूकता अभियान
राहत और पुनर्वास की वैज्ञानिक योजना
बहु-एजेंसी समन्वय
आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
यदि वेनेजुएला भारत के मॉडल को प्रभावी ढंग से अपनाता है तो भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के दौरान—
अधिक लोगों की जान बचाई जा सकेगी।
राहत कार्य तेजी से पूरे होंगे।
आर्थिक नुकसान कम किया जा सकेगा।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहतर तैयारी होगी।
सरकार और नागरिकों के बीच भरोसा मजबूत होगा।
विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका तैयारी की होती है। आधुनिक तकनीक, मौसम पूर्वानुमान, प्रशिक्षित मानव संसाधन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी मिलकर ही किसी मॉडल को सफल बनाते हैं।
ओडिशा का जीरो कैजुअल्टी मॉडल इसी सोच पर आधारित है, इसलिए इसे दुनिया के सबसे प्रभावी आपदा प्रबंधन मॉडलों में गिना जाता है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
हाल के वर्षों में भारत केवल राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं रहा है। अब देश आपदा प्रबंधन, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी कई देशों का विश्वसनीय साझेदार बनकर उभरा है।
वेनेजुएला में भारतीय विशेषज्ञों की मौजूदगी इसी बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत मानी जा रही है।
निष्कर्ष
वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के बाद भारत के 'साइक्लोन मैन' का वहां पहुंचना केवल एक राहत मिशन नहीं बल्कि भारत की दशकों की आपदा प्रबंधन विशेषज्ञता की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का प्रतीक है। ओडिशा का जीरो कैजुअल्टी मॉडल यह साबित करता है कि सही योजना, समय पर चेतावनी, प्रशिक्षित प्रशासन और जनता की भागीदारी से बड़ी से बड़ी प्राकृतिक आपदा में भी जनहानि को न्यूनतम किया जा सकता है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
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