देश के 10 राज्यों में 14,468 झरने, 15 प्रतिशत आबादी इनके पानी पर निर्भर
जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक देश में पहली बार किए जा रहे झरना सर्वेक्षण के दूसरे हिस्से में 10 राज्यों में कुल 14,468 झरनों की पहचान की गई है। इनमें मणिपुर में सबसे ज्यादा 3,941 और महाराष्ट्र में 3,652 झरने दर्ज किए गए। रिपोर्ट में नीति आयोग के 2018 के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि देश की करीब 15 प्रतिशत आबादी यानी लगभग 20 करोड़ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी जरूरतों के लिए झरनों के पानी पर निर्भर हैं।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: भारत में जल सुरक्षा और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर किए जा रहे झरना सर्वेक्षण में महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। जल शक्ति मंत्रालय की ‘First Census of Springs (Volume II, Part-II)’ रिपोर्ट के अनुसार, 10 राज्यों में कुल 14,468 झरनों की पहचान की गई है। रिपोर्ट में झरनों की मैपिंग, संरक्षण और उनके आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों के प्रबंधन की जरूरत पर जोर दिया गया है।
किन राज्यों में कितने झरने मिले?
सर्वेक्षण में आंध्र प्रदेश, असम, गोवा, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया है।
राज्यवार आंकड़े इस प्रकार हैं:
मणिपुर: 3,941
महाराष्ट्र: 3,652
ओडिशा: 1,957
पश्चिम बंगाल: 1,686
गोवा: 1,196
त्रिपुरा: 1,049
असम: 792
तेलंगाना: 148
आंध्र प्रदेश: 34
राजस्थान: 13
इनमें मणिपुर और महाराष्ट्र में झरनों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है।
करीब 20 करोड़ लोग झरने के पानी पर निर्भर
रिपोर्ट में जल सुरक्षा से जुड़े नीति आयोग के 2018 के कार्य समूह के अध्ययन का हवाला दिया गया है। इसके मुताबिक देश की करीब 15 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 20 करोड़ लोग, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी जरूरतों के लिए झरनों के पानी पर निर्भर हैं। पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में ये प्राकृतिक जलस्रोत पीने के पानी और स्थानीय जरूरतों के लिए खास महत्व रखते हैं।
मणिपुर में सबसे ज्यादा झरने, बड़ी संख्या खतरे में
मणिपुर में सर्वेक्षण के दौरान 3,941 झरने दर्ज किए गए। इनमें 3,419 बारहमासी, 457 मौसमी और 65 सूख चुके झरने हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 1,336 झरने खतरे का सामना कर रहे हैं। इनमें 3,127 झरनों का इस्तेमाल स्थानीय निवासी, 634 का गैर-निवासी और 113 का जंगली जानवर करते हैं।
महाराष्ट्र में 3,652 झरने
महाराष्ट्र में कुल 3,652 झरने दर्ज किए गए हैं। इनमें 2,629 बारहमासी, 909 मौसमी और 114 सूख चुके झरने हैं।
राज्य के 3,612 झरने ग्रामीण क्षेत्रों और 40 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खतरे के आकलन के दायरे में आए झरनों में 265 यानी करीब 7.6 प्रतिशत खतरे में पाए गए।
पश्चिम बंगाल में 1,686 झरने
पश्चिम बंगाल में सर्वेक्षण के दौरान 1,686 झरनों की पहचान की गई। इनमें 1,568 ग्रामीण और 118 शहरी क्षेत्रों में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दार्जिलिंग में 1,200 और कलिम्पोंग में 427 झरने दर्ज किए गए। इन क्षेत्रों के कई ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए झरने पीने के पानी का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
ओडिशा और गोवा में भी कई झरने खतरे में
ओडिशा में कुल 1,957 झरने मिले हैं। इनमें 1,568 बारहमासी, 315 मौसमी और 74 सूखे हुए झरने हैं। खतरे के आकलन में शामिल झरनों में 295 यानी 15.7 प्रतिशत खतरे में पाए गए।
गोवा में 1,196 झरनों की पहचान हुई। इनमें 1,105 बारहमासी, 66 मौसमी और 25 सूखे हुए झरने हैं। राज्य में आकलन किए गए झरनों में 61 यानी 5.2 प्रतिशत खतरे में पाए गए।
झरनों के संरक्षण पर जोर
रिपोर्ट में कमजोर और गंभीर स्थिति वाले झरनों की पहचान के लिए व्यवस्थित मैपिंग की जरूरत बताई गई है। साथ ही, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के दौरान झरनों के संरक्षण और स्प्रिंग-एरिया मैनेजमेंट प्रोग्राम के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की सिफारिश की गई है।
झरनों का संरक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इन पर निर्भर आबादी के लिए इनका सूखना या प्रदूषित होना स्थानीय जल सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। सर्वेक्षण से तैयार हो रहा डेटा भविष्य में जलस्रोतों की निगरानी और संरक्षण योजनाओं के लिए आधार उपलब्ध करा सकता है।
पहली बार तैयार हो रहा व्यवस्थित डेटा
झरना सर्वेक्षण का उद्देश्य अलग-अलग राज्यों में मौजूद इन प्राकृतिक जलस्रोतों का एक समान तरीके से डेटा तैयार करना है। इससे झरनों की स्थिति, उनका उपयोग, स्वामित्व और संभावित खतरे जैसे पहलुओं को समझने में मदद मिल सकती है।
इससे पहले सर्वेक्षण के एक अन्य हिस्से में बिहार, कर्नाटक, केरल, लद्दाख, सिक्किम और तमिलनाडु को शामिल किया गया था।
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