अफगानिस्तान को अपनी रक्षा करने का अधिकार, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान को सीमा-पार हमलों के खिलाफ दी चेतावनी
अफगान तालिबान सरकार ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर उसकी सेना अफगानिस्तान के भीतर सैन्य कार्रवाई करती है तो काबुल अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जवाब देगा। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान के सीमा-पार आतंकवाद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अफगानिस्तान बातचीत और सुरक्षा सहयोग के लिए तैयार है। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ आतंकवादी हमलों के लिए नहीं होना चाहिए।
लेखक
Vinay Mishra
Afghanistan-Pakistan Tension: सीमा-पार हमलों को लेकर आमने-सामने काबुल और इस्लामाबाद
काबुल: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इस्लामाबाद अफगान क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई करता है, तो अफगानिस्तान को अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने का अधिकार है।
मुजाहिद ने यह टिप्पणी Al Arabiya English को दिए एक इंटरव्यू में की। उन्होंने पाकिस्तान के उस आरोप को भी खारिज किया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए किया जा रहा है।
'हम अपने देश की रक्षा करेंगे'
तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि अगर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देकर अफगान क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई करता है, तो अफगानिस्तान को अपनी रक्षा करने का अधिकार है।
उन्होंने संकेत दिया कि अफगान क्षेत्र में किसी भी पाकिस्तानी सैन्य अभियान को काबुल अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानेगा और इसका जवाब दिया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुजाहिद ने पाकिस्तान को संभावित सैन्य कार्रवाई के गंभीर परिणामों की चेतावनी भी दी।
पाकिस्तान का क्या है आरोप?
अफगानिस्तान की चेतावनी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान लगातार आरोप लगा रहा है कि उसके खिलाफ सक्रिय आतंकवादी समूहों को अफगान क्षेत्र में पनाह, प्रशिक्षण और अन्य सहायता मिल रही है।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि इस्लामाबाद की मुख्य मांग है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए न किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर यह समस्या दूर नहीं होती तो पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है।
पाकिस्तानी पक्ष विशेष रूप से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) समेत कई सशस्त्र समूहों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताता रहा है। हालांकि, काबुल इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने देता।
तालिबान ने TTP को लेकर भी आरोप नकारे
जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान के उन आरोपों को भी खारिज किया कि अफगानिस्तान में TTP को पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति दी जा रही है।
काबुल का कहना है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करना चाहिए। तालिबान ने यह भी दावा किया है कि पाकिस्तान में TTP और बलूच सशस्त्र समूहों से जुड़ी समस्याएं अफगान तालिबान के सत्ता में लौटने से पहले से मौजूद हैं।
तनाव के बावजूद बातचीत का रास्ता खुला
हालांकि बयान में कड़ा रुख अपनाया गया है, लेकिन तालिबान सरकार ने बातचीत की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान पाकिस्तान के साथ संवाद, खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा सहयोग के लिए तैयार है।
उन्होंने दोनों देशों के बीच मतभेदों को सुलझाने में सऊदी अरब की संभावित भूमिका का भी स्वागत किया। उनके अनुसार, रियाद के दोनों देशों के साथ संबंध हैं और वह मध्यस्थता में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
पाकिस्तान भी बातचीत के लिए शर्त रख रहा है
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने हालिया बयान में कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार, ट्रांजिट और सीमा संपर्क बहाल करने की संभावनाएं आतंकवाद के मुद्दे से जुड़ी हैं। इस्लामाबाद का कहना है कि अगर अफगान पक्ष आतंकवाद को लेकर सहयोग करता है तो संबंधों में सुधार का रास्ता खुल सकता है।
इस बीच पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता ने कहा है कि इस्लामाबाद का विवाद अफगानिस्तान के लोगों से नहीं, बल्कि तालिबान सरकार की उन नीतियों से है जिन्हें पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
दोनों देशों के बीच पहले भी हो चुका है सैन्य टकराव
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद और आतंकवाद के आरोपों को लेकर 2026 में कई बार तनाव सैन्य टकराव तक पहुंच चुका है। फरवरी-मार्च में दोनों देशों के बीच सीमा पर संघर्ष और हवाई हमलों की घटनाएं हुई थीं। बाद में बातचीत और मध्यस्थता के प्रयास भी हुए, लेकिन सुरक्षा संबंधी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
जून में भी अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के भीतर कथित सशस्त्र समूहों के ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई का दावा किया था। इससे दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी थी।
क्यों अहम है यह ताजा चेतावनी?
अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों ही एक-दूसरे पर सीमा पार सुरक्षा समस्याओं को बढ़ावा देने के आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में किसी नए सैन्य अभियान की स्थिति दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकती है।
फिलहाल काबुल ने सैन्य कार्रवाई की स्थिति में जवाब देने की चेतावनी दी है, लेकिन साथ ही बातचीत और सुरक्षा सहयोग के लिए दरवाजा खुला रखा है। दूसरी ओर, इस्लामाबाद अफगान जमीन से होने वाले कथित आतंकवादी हमलों को रोकने की मांग पर जोर दे रहा है।
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