बड़ी खबर: देशभर में डिजिटल जनगणना की तैयारी तेज, पहली बार ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन
देश में Census 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार पहली बार डिजिटल जनगणना और ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा दी जा सकती है। सरकारी पोर्टल अपडेट और डिजिटल सर्वे मॉडल की चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इससे करोड़ों लोगों को घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज कराने की सुविधा मिल सकती है।
लेखक
Vinay Mishra

बड़ी खबर: देशभर में डिजिटल जनगणना की तैयारी तेज, पहली बार ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन
भारत में होने वाली अगली जनगणना अब पूरी तरह नई तकनीक और डिजिटल सिस्टम के साथ होने जा रही है। Census 2027 को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियां तेजी पकड़ चुकी हैं और इस बार सबसे ज्यादा चर्चा “ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन” को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि पहली बार देश के नागरिक खुद सरकारी पोर्टल पर जाकर अपनी जनगणना संबंधी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
सरकारी स्तर पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का काम तेजी से चल रहा है। हाल ही में Census Portal से जुड़े अपडेट और डिजिटल सिस्टम की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। विशेषज्ञ इसे भारत की जनगणना व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव मान रहे हैं।
क्या है ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन?
ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन का मतलब है कि नागरिक खुद अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर से सरकारी पोर्टल पर लॉगिन करके परिवार और घर से जुड़ी जानकारी भर सकेंगे।
अब तक जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करते थे, लेकिन नई डिजिटल व्यवस्था में आम लोगों को खुद डेटा दर्ज करने का विकल्प मिल सकता है। इससे प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ डेटा की सटीकता बढ़ाने का भी दावा किया जा रहा है।
Census 2027 में क्या-क्या हो सकता है नया?
डिजिटल मोड में होगी जनगणना
इस बार टैबलेट और मोबाइल ऐप आधारित डेटा कलेक्शन पर जोर दिया जा रहा है। फील्ड कर्मचारियों को डिजिटल डिवाइस उपलब्ध कराए जाने की तैयारी है।
ऑनलाइन पोर्टल पर खुद भर सकेंगे जानकारी
सरकारी पोर्टल के जरिए परिवार के सदस्य, शिक्षा, नौकरी, मकान और अन्य जानकारी ऑनलाइन अपडेट की जा सकेगी।
डेटा प्रोसेसिंग होगी तेज
पहले जनगणना रिपोर्ट तैयार होने में वर्षों लग जाते थे, लेकिन डिजिटल सिस्टम से डेटा प्रोसेसिंग काफी तेज हो सकती है।
फर्जी डेटा पर सख्ती
डिजिटल वेरिफिकेशन और आधार आधारित पहचान प्रणाली से गलत जानकारी रोकने की तैयारी भी चर्चा में है।
क्यों खास है Census 2027?
भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में जनगणना सिर्फ आंकड़ों का सर्वे नहीं बल्कि सरकार की भविष्य की नीतियों की नींव होती है।
जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही तय होता है:
किस राज्य को कितना बजट मिलेगा
शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं की जरूरत
नए शहर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान
रोजगार और गरीबी से जुड़ी नीतियां
लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन
इसी वजह से Census 2027 को बेहद अहम माना जा रहा है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
घर बैठे जानकारी अपडेट करने की सुविधा
अगर ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन लागू होता है तो लोगों को सरकारी कर्मचारी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
समय और कागजी प्रक्रिया में राहत
डिजिटल मोड से लंबी प्रक्रिया और कागजी काम कम हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौती
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट और डिजिटल जागरूकता अभी भी बड़ी चुनौती है।
डेटा सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
डिजिटल जनगणना के साथ साइबर सुरक्षा और निजी डेटा की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रहा Census Portal?
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Census Portal से जुड़े स्क्रीनशॉट और अपडेट वायरल हो रहे हैं। कई यूजर्स दावा कर रहे हैं कि पोर्टल के डिजिटल फीचर्स को अपग्रेड किया जा रहा है।
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक सभी फीचर्स को लेकर आधिकारिक विस्तृत घोषणा नहीं की गई है, लेकिन डिजिटल जनगणना को लेकर तैयारियों के संकेत लगातार मिल रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
जनसंख्या और डेटा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना भारत के लिए बड़ा तकनीकी बदलाव साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
डेटा कलेक्शन की स्पीड बढ़ेगी
मानवीय त्रुटियां कम होंगी
सरकारी योजनाओं की सटीक प्लानिंग संभव होगी
रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग आसान होगी
हालांकि साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को लेकर मजबूत व्यवस्था जरूरी बताई जा रही है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां
डिजिटल डिवाइड
देश के करोड़ों लोगों के पास अभी भी स्थायी इंटरनेट सुविधा नहीं है।
भाषा और तकनीकी समझ
कई राज्यों में स्थानीय भाषाओं और डिजिटल साक्षरता की समस्या सामने आ सकती है।
डेटा सिक्योरिटी
इतने बड़े स्तर पर नागरिकों का डेटा सुरक्षित रखना सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
क्या आधार और मोबाइल नंबर होंगे जरूरी?
सूत्रों के मुताबिक डिजिटल सत्यापन के लिए आधार आधारित ऑथेंटिकेशन और मोबाइल OTP सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि अंतिम नियमों को लेकर आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है।
भारत की जनगणना का इतिहास
भारत में पहली आधिकारिक जनगणना 1872 में शुरू हुई थी, जबकि स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना 1951 में हुई। तब से हर 10 साल में जनगणना कराई जाती रही है।
लेकिन महामारी और अन्य कारणों की वजह से पिछली प्रक्रिया में देरी हुई थी। अब Census 2027 को नई डिजिटल पहचान के साथ लाने की तैयारी हो रही है।
निष्कर्ष
Census 2027 भारत की जनगणना व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। पहली बार ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन और डिजिटल डेटा कलेक्शन जैसी सुविधाएं आम लोगों तक पहुंच सकती हैं। इससे जहां प्रक्रिया तेज और आसान होने की उम्मीद है, वहीं डेटा सुरक्षा और डिजिटल पहुंच जैसी चुनौतियां भी सामने रहेंगी।
आने वाले महीनों में सरकार की आधिकारिक घोषणाओं पर पूरे देश की नजर रहेगी, क्योंकि यह बदलाव करोड़ों भारतीयों के जीवन और सरकारी योजनाओं को सीधे प्रभावित कर सकता है।
Keep reading
More in राष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रीय समाचार
'हमारा धर्म, हम तय करेंगे', स्कूलों में हिजाब को लेकर इलाहाबाद HC के फैसले पर भड़के ओवैसी
स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की मांग वाली एक छात्रा की याचिका खारिज करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी…
राष्ट्रीय समाचार
नीति आयोग की रिपोर्ट: 15-29 आयुवर्ग के 8.7 करोड़ युवा न पढ़ाई में, न रोजगार में, जानिए क्या कहती है रिपोर्ट
नीति आयोग की नई रिपोर्ट 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047' के मुताबिक 2021 में 15-29 वर्ष की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा NEET श्र…
राष्ट्रीय समाचार
ऑफिस से ले लें छुट्टी! आज दिल्ली-NCR में बारिश का अलर्ट, IMD ने यूपी-बिहार समेत 23 राज्यों के लिए जारी की चेतावनी
दिल्ली-NCR समेत देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय है। IMD ने आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य…
राष्ट्रीय समाचार
भारत में बदल रहा क्लाइमेट पैटर्न... अधिक उग्र होगा मानसून, बारिश कम दिनों में लेकिन होगी बहुत जोरदार
भारत में मानसून का मिजाज बदल रहा है। नई रिसर्च के मुताबिक आने वाले समय में बारिश के दिनों की संख्या में बहुत बड़ी बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन क…
राष्ट्रीय समाचार
'क्या हमें 4th पार्टी के ऑडिट की जरूरत है?', सार्वजनिक परियोजनाओं को लेकर PM मोदी की सचिवों को फटकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। 53…
राष्ट्रीय समाचार
काशी में 84 घाट डूबे, बेगूसराय में बाढ़ की स्थिति... यूपी से बिहार-केरल तक आज कहां-कहां बारिश का अलर्ट
देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से 84 घाट जलमग्न हैं, जबकि बिहार के बेगूसराय और भागलपुर…
