नीति आयोग की रिपोर्ट: 15-29 आयुवर्ग के 8.7 करोड़ युवा न पढ़ाई में, न रोजगार में, जानिए क्या कहती है रिपोर्ट
नीति आयोग की नई रिपोर्ट 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047' के मुताबिक 2021 में 15-29 वर्ष की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में थे, यानी वे न शिक्षा, न रोजगार और न ही ट्रेनिंग से जुड़े थे। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन 8.7 करोड़ युवाओं को सीधे 'बेरोजगार' कहना सही नहीं है। इनमें घरेलू काम, स्वैच्छिक गतिविधियों और अन्य कारणों से पढ़ाई या रोजगार से बाहर युवा भी शामिल हैं।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: भारत की युवा आबादी को देश की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, लेकिन नीति आयोग की नई रिपोर्ट ने युवाओं की शिक्षा, रोजगार और स्किलिंग के बीच मौजूद बड़ी खाई को सामने रखा है। रिपोर्ट के अनुसार 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में हैं।
NEET का अर्थ है Not in Education, Employment or Training, यानी ऐसे युवा जो फिलहाल न पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न किसी तरह की ट्रेनिंग ले रहे हैं। यह आंकड़ा नीति आयोग की अगस्त 2026 में जारी रिपोर्ट 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047' में सामने आया है।
लेकिन यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। 8.7 करोड़ NEET युवाओं का मतलब 8.7 करोड़ बेरोजगार युवा नहीं है। सरकार ने इस आंकड़े को लेकर गलत व्याख्या से बचने की सलाह दी है।
8.7 करोड़ का आंकड़ा आया कहां से?
नीति आयोग की रिपोर्ट में भारत के करीब 60 करोड़ नागरिकों को शिक्षा और रोजगार की स्थिति के आधार पर अलग-अलग वर्गों में देखा गया है। इनमें स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, औपचारिक-अनौपचारिक रोजगार, NEET युवा और महिलाओं को शामिल किया गया है।
15-29 आयु वर्ग के NEET युवाओं का यह अनुमान NSS के 78वें राउंड के 2021 के आंकड़ों पर आधारित है। यानी यह 2026 में मौजूद युवाओं की वास्तविक समय की गिनती नहीं है, बल्कि उपलब्ध 2021 के डेटा पर आधारित विश्लेषण है।
क्या ये सभी युवा बेरोजगार हैं?
नहीं।
यही इस रिपोर्ट के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। PIB ने 25 अगस्त को स्पष्ट किया कि NEET श्रेणी को बेरोजगारी के आंकड़े के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
इस श्रेणी में ऐसे युवा भी शामिल हैं जो:
घरेलू जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
घरेलू उद्यम या पारिवारिक काम में लगे हैं।
स्वैच्छिक काम कर रहे हैं।
स्वास्थ्य संबंधी कारणों से काम नहीं कर पा रहे।
अपना समय पढ़ाई या रोजगार के बाहर बिता रहे हैं।
अन्य कारणों से शिक्षा, रोजगार या ट्रेनिंग से बाहर हैं।
इसलिए NEET और unemployment दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं।
फिर चिंता की बात क्या है?
चिंता यह है कि करोड़ों युवा अपनी सबसे महत्वपूर्ण कार्यशील उम्र के शुरुआती वर्षों में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार की मुख्यधारा से बाहर हैं।
अगर लंबे समय तक कोई युवा पढ़ाई या ट्रेनिंग से बाहर रहता है और रोजगार से भी नहीं जुड़ पाता, तो उसके लिए बाद में औपचारिक नौकरी के बाजार में प्रवेश करना मुश्किल हो सकता है।
नीति आयोग ने इसी वजह से स्किलिंग सिस्टम को रोजगार की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया है।
डिग्री है, फिर भी नौकरी क्यों नहीं?
रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद mismatch को लेकर है।
उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार केवल 8.25% ग्रेजुएट्स ही ऐसी नौकरियों में काम कर रहे हैं जो उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप हैं। इससे संकेत मिलता है कि केवल डिग्री हासिल करना रोजगार की गारंटी नहीं है।
यानी चुनौती दो स्तरों पर है:
पहली— युवाओं को शिक्षा और प्रशिक्षण से जोड़ना।
दूसरी— उन्हें ऐसी स्किल देना जिसकी बाजार में वास्तविक मांग हो।
महंगी ट्रेनिंग भी बड़ी बाधा
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक NEET युवाओं के सामने एक बड़ी समस्या अतिरिक्त शिक्षा और ट्रेनिंग की लागत भी है।
कई युवाओं के लिए नौकरी पाने के लिए जरूरी अतिरिक्त कौशल हासिल करना आर्थिक रूप से आसान नहीं होता। ऐसे में स्किलिंग कार्यक्रम अगर महंगे या आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, तो युवा रोजगार बाजार से और दूर हो सकते हैं।
नीति आयोग ने क्या सुझाव दिए?
रिपोर्ट ने भारत के स्किलिंग सिस्टम को ज्यादा सुलभ, रोजगार-केंद्रित और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाने की जरूरत बताई है।
प्रमुख सुझावों में शामिल हैं:
युवाओं के लिए सस्ती और आसानी से उपलब्ध स्किलिंग।
शिक्षा और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल।
Apprenticeship के अवसर बढ़ाना।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और उभरते क्षेत्रों के अनुरूप प्रशिक्षण।
युवाओं के लिए self-employment के रास्ते मजबूत करना।
स्कूल स्तर से ही व्यावसायिक कौशल पर जोर।
उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाना।
रोजगार के परिणामों से जोड़कर स्किलिंग कार्यक्रमों का मूल्यांकन।
स्कूल से ही शुरू हो स्किलिंग
नीति आयोग का प्रस्ताव केवल कॉलेज और ITI स्तर तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में स्कूल की शुरुआती कक्षाओं से ही व्यावसायिक कौशल और करियर संबंधी जानकारी को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
इसका उद्देश्य यह है कि छात्र सिर्फ परीक्षा और डिग्री की तैयारी न करें, बल्कि उन्हें भविष्य के रोजगार बाजार में जरूरी कौशल की जानकारी भी मिले।
Apprenticeship पर भी जोर
रिपोर्ट में apprenticeship को शिक्षा और रोजगार के बीच पुल के रूप में देखा गया है।
किसी छात्र या युवा को सीधे नौकरी के लिए तैयार करने के बजाय अगर उसे पढ़ाई के साथ वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव मिले, तो उसके रोजगार पाने की संभावना बेहतर हो सकती है।
इसीलिए नीति आयोग ने उद्योगों, MSMEs और प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका बढ़ाने की जरूरत बताई है।
सरकार ने आंकड़े को लेकर क्या कहा?
8.7 करोड़ के आंकड़े पर उठी बहस के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि इसे '8.7 करोड़ बेरोजगार युवा' कहना गलत होगा।
PIB के मुताबिक रिपोर्ट में NEET युवाओं की श्रेणी उन लोगों को दर्शाती है जो शिक्षा, रोजगार या ट्रेनिंग में शामिल नहीं हैं। वहीं बेरोजगारों की गणना अलग परिभाषा और अलग आबादी आधार पर होती है।
सरकार ने यह भी बताया कि इस विश्लेषण में इस्तेमाल किया गया NSS डेटा COVID-19 महामारी के दौरान 2020-21 में जुटाया गया था। इसलिए इसे वर्तमान 2026 की बेरोजगारी का सीधा आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा।
8.7 करोड़ NEET युवाओं का मतलब क्या समझें?
इसे आसान भाषा में ऐसे समझें:
8.7 करोड़ = ऐसे 15-29 वर्षीय युवा जो उपलब्ध 2021 के डेटा के आधार पर उस समय न शिक्षा में थे, न रोजगार में और न ट्रेनिंग में।
लेकिन:
8.7 करोड़ ≠ 8.7 करोड़ बेरोजगार।
कई लोग घरेलू जिम्मेदारियों, पारिवारिक काम, स्वैच्छिक गतिविधियों या अन्य वजहों से भी इस श्रेणी में आ सकते हैं।
एक नजर में
मुद्दाजानकारीरिपोर्टReimagining Skilling for Viksit Bharat@2047जारी करने वाली संस्थानीति आयोगरिपोर्टअगस्त 2026संबंधित आयु वर्ग15-29 वर्षNEET युवाकरीब 8.7 करोड़डेटाNSS 78वां राउंड, 2021NEET का अर्थNot in Education, Employment or Trainingक्या सभी बेरोजगार हैं?नहींबड़ी चुनौतीशिक्षा, स्किल और रोजगार के बीच अंतरएक प्रमुख आंकड़ाकेवल 8.25% ग्रेजुएट्स को योग्यता से मेल खाती नौकरीसुझाए गए उपायस्किलिंग, apprenticeship, self-employment, industry linkage
भारत के लिए क्यों अहम है यह रिपोर्ट?
भारत के पास दुनिया की बड़ी युवा आबादी है। ऐसे में युवाओं को शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार तक पहुंचाने की क्षमता आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर युवा आबादी को सही प्रशिक्षण और अवसर मिलते हैं, तो यही जनसांख्यिकीय ताकत भारत की आर्थिक वृद्धि को गति दे सकती है। लेकिन अगर बड़ी संख्या में युवा लंबे समय तक शिक्षा और रोजगार की मुख्यधारा से बाहर रहती है, तो यह संभावित demographic dividend के लिए चुनौती बन सकता है।
यही वजह है कि नीति आयोग ने Viksit Bharat@2047 के लक्ष्य के संदर्भ में स्किलिंग व्यवस्था को फिर से तैयार करने की जरूरत बताई है।
निष्कर्ष
नीति आयोग की रिपोर्ट का 8.7 करोड़ वाला आंकड़ा निश्चित तौर पर बड़ा है, लेकिन इसे '8.7 करोड़ बेरोजगार युवा' कहना सही नहीं होगा। यह उन 15-29 वर्षीय युवाओं का अनुमान है जो 2021 के उपलब्ध डेटा के मुताबिक शिक्षा, रोजगार या ट्रेनिंग में शामिल नहीं थे। इस समूह में घरेलू काम और अन्य गतिविधियों से जुड़े युवा भी शामिल हैं।
रिपोर्ट की असली चिंता इससे आगे है—भारत के युवाओं को सिर्फ डिग्री नहीं, बाजार की जरूरत के मुताबिक कौशल और वास्तविक रोजगार के अवसर कैसे दिए जाएं।
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