BRICS देशों से व्यापार में भारत ने गाड़े झंडे, कारोबार दोगुना होकर पहुंचा $417 अरब; ASSOCHAM की रिपोर्ट
भारत का BRICS देशों के साथ कुल व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर करीब 417 अरब डॉलर पहुंच गया है। ASSOCHAM के विश्लेषण के मुताबिक, भारत के BRICS देशों को निर्यात भी बढ़कर करीब 96 अरब डॉलर हो गया है और 2030 तक इसे 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने की क्षमता है। हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भारत का बड़ा व्यापार घाटा है, क्योंकि BRICS देशों से आयात निर्यात की तुलना में काफी ज्यादा है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: भारत की BRICS देशों के साथ आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। ASSOCHAM के Global Strategy and Research Centre के विश्लेषण के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का BRICS देशों के साथ कुल द्विपक्षीय व्यापार करीब 417 अरब डॉलर रहा। उद्योग संगठन का अनुमान है कि सही नीतिगत समर्थन और South-South Cooperation के जरिए भारत BRICS देशों को अपना निर्यात 2030 तक बढ़ाकर 200 अरब डॉलर तक पहुंचा सकता है।
5 साल में दोगुने से ज्यादा हुआ कारोबार
भारत और BRICS देशों के बीच व्यापार में पिछले कुछ वर्षों में तेज बढ़ोतरी हुई है। उपलब्ध व्यापार आंकड़ों के मुताबिक FY2021 में भारत का BRICS के साथ कुल वस्तु व्यापार करीब 203 अरब डॉलर के आसपास था, जो FY2026 में बढ़कर करीब 417 अरब डॉलर हो गया।
हालांकि, व्यापार बढ़ने के साथ भारत के लिए एक बड़ी चुनौती भी सामने आई है—व्यापार संतुलन। हालिया विश्लेषण के मुताबिक FY2026 में भारत ने BRICS देशों से करीब 321.8 अरब डॉलर का माल आयात किया, जबकि निर्यात करीब 95.7 अरब डॉलर रहा। यानी व्यापार घाटा लगभग 226.1 अरब डॉलर रहा।
भारत का निर्यात 96 अरब डॉलर
ASSOCHAM के मुताबिक FY2026 में BRICS देशों को भारत का निर्यात करीब 96 अरब डॉलर रहा। संगठन का मानना है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ने, सप्लाई चेन में सुधार और BRICS Plus देशों में बदलती मांग के कारण निर्यात में और तेजी की गुंजाइश है।
ASSOCHAM का अनुमान है कि यदि जरूरी नीतिगत कदम उठाए गए तो भारत का BRICS देशों को निर्यात 2030 तक 200 अरब डॉलर के पार जा सकता है।
किन चीजों का निर्यात बढ़ सकता है?
ASSOCHAM ने कई ऐसे सेक्टर की पहचान की है, जहां भारत BRICS बाजारों में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर सकता है।
इनमें शामिल हैं:
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
इंजीनियरिंग उत्पाद
ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स
फार्मास्युटिकल्स
केमिकल्स
टेक्सटाइल और लेदर
जेम्स एंड ज्वेलरी
मिनरल्स और मेटल उत्पाद
चावल
खाद्य एवं समुद्री उत्पाद
इन क्षेत्रों में भारत की उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ने से BRICS बाजारों में निर्यात के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
चीन, रूस और UAE से बड़ा आयात
BRICS के साथ भारत का कारोबार केवल निर्यात की कहानी नहीं है। चीन, रूस और UAE जैसे देशों से भारत बड़ी मात्रा में सामान और ऊर्जा उत्पाद आयात करता है।
चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल उत्पादों का आयात महत्वपूर्ण है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरकों का प्रमुख स्रोत बन गया है, जबकि UAE और सऊदी अरब से ऊर्जा उत्पाद और सोने का आयात महत्वपूर्ण है।
यही आयात भारत के बढ़ते BRICS व्यापार घाटे का बड़ा कारण भी हैं।
व्यापार बढ़ा, लेकिन घाटा भी चिंता
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि BRICS के साथ बढ़ता कारोबार अभी संतुलित नहीं है।
FY2026 में BRICS के 10 साझेदार देशों ने भारत के कुल merchandise imports में करीब 42 फीसदी हिस्सेदारी रखी, जबकि भारत के कुल exports में इनकी हिस्सेदारी करीब 22 फीसदी थी। नतीजा यह रहा कि BRICS के साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 226 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
इसलिए आने वाले वर्षों में भारत के लिए सिर्फ व्यापार का आकार बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। लक्ष्य यह भी होगा कि भारतीय उत्पादों के लिए BRICS बाजारों में बेहतर market access मिले।
2030 तक 200 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य
ASSOCHAM के अनुसार, यदि भारत अपनी manufacturing competitiveness को और मजबूत करता है और BRICS देशों के साथ व्यापारिक बाधाओं को कम किया जाता है, तो 2030 तक निर्यात को 200 अरब डॉलर तक ले जाना संभव है।
इसके लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स, कम गैर-टैरिफ बाधाएं, तेज कस्टम प्रक्रिया, regulatory alignment और cross-border payment systems को मजबूत करना अहम माना जा रहा है।
BRICS Summit के बीच बढ़ी इस आंकड़े की अहमियत
भारत इस समय BRICS 2026 की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS Leaders' Summit आयोजित हो रहा है। भारत की अध्यक्षता में व्यापार, resilient supply chains, MSMEs और digitally delivered services पर विशेष जोर दिया गया है।
भारत के Commerce Secretary के मुताबिक, पूरे BRICS समूह के बीच intra-BRICS merchandise trade 2003 के 84 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 1.17 ट्रिलियन डॉलर हो चुका है। फिर भी यह वैश्विक व्यापार का लगभग 5 फीसदी ही है, जिससे आगे विस्तार की बड़ी गुंजाइश बताई गई है।
भारत के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण?
BRICS अब 11 सदस्य देशों का समूह है—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, इंडोनेशिया और सऊदी अरब। समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार में बड़ा हिस्सा रखता है।
भारत के लिए BRICS केवल व्यापार का मंच नहीं है। ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, निवेश, डिजिटल भुगतान, MSMEs और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे भी इसके एजेंडे में हैं।
आगे भारत के सामने दोहरी चुनौती
BRICS के साथ 417 अरब डॉलर का व्यापार भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक पहुंच को दिखाता है। लेकिन 226 अरब डॉलर का व्यापार घाटा यह भी बताता है कि भारत को इस साझेदारी को ज्यादा संतुलित बनाने की जरूरत है।
अगर भारत 2030 तक BRICS देशों को अपना निर्यात 200 अरब डॉलर तक ले जाने में सफल रहता है, तो यह सिर्फ निर्यात के आंकड़े में वृद्धि नहीं होगी, बल्कि भारतीय विनिर्माण, MSME और उच्च मूल्य वाले उत्पादों के लिए एक बड़ा वैश्विक बाजार तैयार कर सकती है।
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