15 हजार करोड़ रुपये की परियोजना, 6 राज्यों का समझौता और यमुना को नया जीवन... क्यों खास है किशाऊ प्रोजेक्ट?
किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर वर्षों से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म होने की दिशा में है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने परियोजना को लागू करने के लिए MoU पर सहमति जताई है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना से जल भंडारण, सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के साथ यमुना में स्वच्छ जल का प्रवाह बढ़ाने की उम्मीद है।
लेखक
Vinay Mishra
किशाऊ प्रोजेक्ट क्यों है इतना अहम?
देश में जल संकट, बढ़ती आबादी और नदियों के प्रदूषण के बीच किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना पर वर्षों से राज्यों के बीच पानी और बिजली के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। अब केंद्र की पहल के बाद छह राज्यों ने परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।
16 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने किशाऊ परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन यानी MoU पर सहमति जताई। MoU के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा।
टोंस नदी पर बनेगा बांध
किशाऊ परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस, यमुना की प्रमुख सहायक नदी है और इसका बड़ा हिस्सा हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड की सीमा से होकर गुजरता है। परियोजना का उद्देश्य इस जल संसाधन को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करना है।
इसका मतलब केवल बिजली उत्पादन नहीं है। बांध में जमा पानी का इस्तेमाल सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और क्षेत्रीय जल सुरक्षा के लिए भी किया जाना है।
6 राज्यों की सहमति क्यों महत्वपूर्ण?
किशाऊ परियोजना का सबसे बड़ा पेच था—पानी और परियोजना की लागत का बंटवारा। अलग-अलग राज्यों के हित अलग होने के कारण परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।
अब केंद्र की मध्यस्थता से एक फॉर्मूले पर सहमति बनी है। परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत वित्तीय भार छह राज्यों के बीच साझा किया जाएगा।
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने और इसके बदले परियोजना के हिमाचल से जुड़े बिजली घटक की लागत में हिस्सेदारी करने पर भी सहमति बनी है। यही समझौता इस परियोजना के लंबे गतिरोध को तोड़ने में अहम माना जा रहा है।
यमुना को कैसे मिलेगा फायदा?
किशाऊ परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका यमुना से सीधा संबंध है। चूंकि टोंस यमुना की प्रमुख सहायक नदी है, इसलिए पानी का बेहतर भंडारण और नियमन यमुना बेसिन में जल उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है।
केंद्र सरकार के अनुसार, परियोजना से यमुना में स्वच्छ जल के प्रवाह को बढ़ाने में मदद मिलेगी। यही वजह है कि किशाऊ को सिर्फ एक बांध या हाइड्रोपावर परियोजना के तौर पर नहीं, बल्कि यमुना पुनर्जीवन से जुड़ी बड़ी जल परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
बिजली उत्पादन भी बड़ा फायदा
किशाऊ परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन भी है। पुराने आधिकारिक परियोजना दस्तावेजों में इसकी स्थापित क्षमता 660 मेगावाट बताई गई है। वहीं 2026 की कुछ रिपोर्टों में परियोजना की संशोधित/वर्तमान क्षमता करीब 422 मेगावाट बताई गई है। इसलिए मौजूदा अंतिम परियोजना क्षमता को केंद्रीय मंजूरी और अद्यतन DPR के बाद स्पष्ट रूप से देखना उचित होगा।
इससे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को बिजली क्षेत्र में लाभ मिल सकता है, जबकि अन्य सहभागी राज्यों को पानी और सिंचाई के लिहाज से फायदा मिलने की उम्मीद है।
करीब 15 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट, लेकिन असली कीमत पानी की
किशाऊ परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये है। लेकिन इसकी अहमियत केवल निवेश के आकार से नहीं है। यह परियोजना एक साथ कई जरूरतों को संबोधित करती है—पानी का भंडारण, सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और यमुना में जल प्रवाह।
दिल्ली जैसे तेजी से बढ़ते महानगर के लिए अतिरिक्त जल स्रोत की जरूरत लगातार बढ़ रही है। किशाऊ जैसी परियोजनाओं को इसी व्यापक जल-सुरक्षा रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
क्यों वर्षों तक अटका रहा था प्रोजेक्ट?
किशाऊ परियोजना कोई नई योजना नहीं है। इसे लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है और यह 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित की जा चुकी थी। परियोजना से जुड़े जल और सिंचाई लाभ के बंटवारे तथा बिजली घटक की लागत जैसे मुद्दे लंबे समय तक समाधान की राह में बाधा बने रहे।
अब छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। हालांकि, MoU के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं अभी महत्वपूर्ण अगले चरण हैं।
निष्कर्ष
किशाऊ परियोजना इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ 15 हजार करोड़ रुपये का बांध नहीं है। यह उत्तर भारत के छह राज्यों के बीच जल-साझेदारी, बिजली उत्पादन और पेयजल सुरक्षा को जोड़ने वाली परियोजना है। सबसे बड़ा लक्ष्य है पानी का बेहतर प्रबंधन और यमुना में स्वच्छ जल के प्रवाह को बढ़ाना।
अगर योजना तय समय और सहमति के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो किशाऊ परियोजना दिल्ली की जल सुरक्षा से लेकर हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के जल संसाधन प्रबंधन तक व्यापक असर डाल सकती है।
नोट: परियोजना की क्षमता को लेकर पुराने आधिकारिक दस्तावेजों में 660 MW और हालिया रिपोर्टों में 422 MW का उल्लेख मिलता है। इसलिए प्रकाशित सामग्री में इसे अंतिम क्षमता के रूप में पेश करने से पहले नवीनतम DPR/केंद्रीय स्वीकृति के आंकड़े को प्राथमिकता देना बेहतर होगा।
Keep reading
More in राष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रीय समाचार
गांधी जयंती पर आज देशभर में होंगी विशेष ग्राम सभाएं, विकास और शासन सुधार पर होगी चर्चा
महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को देशभर में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इनमें पंचायतों को मजबूत करने, सरकार…
राष्ट्रीय समाचार
'साबित करो कि तुम भारतीय हो', बांग्लादेशी करार दिए गए व्यक्ति से कलकत्ता हाई कोर्ट ने मांगे सबूत
मुर्शिदाबाद की नरगिस बीबी की उस याचिका को कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने पति सेलिम शेख को बांग्लादेश भेजे जाने से…
राष्ट्रीय समाचार
'मुंबई के लड़के पर गर्व है...'; 174 यात्रियों की जान बचाने वाले पायलट स्मित मछार के लिए अशोक चक्र की उठी मांग
फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में कॉकपिट के भीतर हमले के बाद 174 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी की देश…
राष्ट्रीय समाचार
'ई-चालान नहीं भरा तो जब्त होगी गाड़ी, RC-PUC रिन्यूअल भी होगा बंद'; सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ट्रैफिक ई-चालान की वसूली को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि रैंडम चेकि…
राष्ट्रीय समाचार
'जल्द होने वाली है 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील, भारत के स्वदेशी हथियार भी लगेंगे'; रक्षा सचिव का बड़ा बयान
भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा है कि सौदे की प्रक्र…
राष्ट्रीय समाचार
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, 20 राज्यों में छूटे वोटरों को जोड़ने के लिए चलेगा विशेष अभियान
SIR को लेकर जारी बहस के बीच चुनाव आयोग ने 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य उन पा…
