नेपाल आपदा: हाइडिल सुरंगों में फंसे 121 कर्मियों को बचाने की जंग जारी, पाइप से पहुंचाई जा रही ऑक्सीजन
नेपाल में 26 अगस्त को आए विनाशकारी ग्लेशियर-जनित बाढ़ और मलबे के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे करीब 121 लोगों को बचाने के लिए अभियान जारी है। नेपाली सेना के मुताबिक शुरुआती तौर पर लापता बताए गए करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मियों में से 121 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। रेस्क्यू टीमें चिलिमे और अपर त्रिशूली-3A/3B समेत कई सुरंगों पर काम कर रही हैं और संभावित जीवित लोगों तक ऑक्सीजन पाइप के जरिए पहुंचाई जा रही है।
लेखक
Vinay Mishra
काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़े मलबे की तबाही के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं की भूमिगत सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश लगातार जारी है। नेपाली सेना के अनुसार प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े करीब 900 लोग शुरुआती तौर पर लापता बताए गए थे, लेकिन इनमें से सभी के सुरंगों में फंसे होने की बात सही नहीं है। मौजूदा आकलन के मुताबिक करीब 121 लोग सुरंगों के अंदर हो सकते हैं।
सुरंगों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती
26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के ढहने से अचानक आई बाढ़ ने त्रिशूली नदी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। पानी के साथ आए मलबे ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं के रास्ते, सड़कें और सुरंगों के प्रवेश द्वार तक बंद कर दिए।
कई जगहों पर रेस्क्यू टीमों को पहले मलबा हटाकर सुरंग तक पहुंचने का रास्ता बनाना पड़ा। कुछ सुरंगों में कई सौ मीटर अंदर तक जाने के बाद भी रास्ता पूरी तरह बंद मिला।
पाइप से पहुंचाई जा रही ऑक्सीजन
रेस्क्यू अभियान में सबसे महत्वपूर्ण प्रयासों में से एक सुरंगों के भीतर संभावित जीवित लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाना है। अधिकारियों ने उन हिस्सों में पाइप डालने की कोशिश की है जहां माना जा रहा है कि हवा की जेब या अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान मौजूद हो सकते हैं।
Upper Trishuli 3A परियोजना में पहले भी ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था। वहां सुरंग तक पहुंचने में करीब छह दिन लगे और बचाव दलों ने संभावित फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइप का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी।
दो कर्मियों का जिंदा निकलना बढ़ा रहा उम्मीद
रेस्क्यू अभियान को सबसे बड़ी उम्मीद संजय साह और कबीर महारजन के जीवित बचाए जाने से मिली। दोनों को Upper Trishuli 3A हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग से करीब नौ दिन बाद जिंदा बाहर निकाला गया था।
मैकेनिकल फोरमैन संजय साह और मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महारजन मलबे के बीच बने एक सीमित एयर पॉकेट में फंसे रहे। बचाव दल ने सुरंग तक पहुंचने के बाद मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला।
इस बचाव ने अधिकारियों और सुरंगों में फंसे अन्य कर्मियों के परिवारों में उम्मीद जगाई है कि अन्य लोग भी भूमिगत हिस्सों में जीवित हो सकते हैं।
चिलिमे परियोजना पर खास फोकस
फिलहाल बचाव अभियान का एक अहम केंद्र चिलिमे हाइड्रोपावर परियोजना है। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ कर्मचारी ऐसे हिस्सों में फंसे हो सकते हैं जहां भोजन और पानी तक पहुंच संभव रही हो।
रेस्क्यू टीमों को सुरंगों में भारी मलबे और बदले हुए भूगोल से जूझना पड़ रहा है। बाढ़ ने परियोजनाओं के आसपास का पूरा इलाका बदल दिया है, जिससे पुराने नक्शों और मौजूदा स्थिति के बीच भी अंतर पैदा हो गया है।
Upper Trishuli 3A और 3B में भी अभियान
अपर त्रिशूली क्षेत्र में आपस में जुड़ी सुरंगों में भी खोज जारी है। बचाव दल विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाने और सुरंग के अंदर सुरक्षित रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि अभियान बेहद जोखिम भरा है क्योंकि अंदर फिर से पानी भरने, मलबा खिसकने और ऑक्सीजन की कमी का खतरा बना हुआ है।
26 अगस्त की आपदा ने मचाई थी भारी तबाही
26 अगस्त की ग्लेशियर-जनित बाढ़ ने नेपाल के उत्तरी हिस्सों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुईं और बिजली उत्पादन से जुड़ा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा नष्ट या क्षतिग्रस्त हुआ।
रेस्क्यू अभियान के बीच नेपाल में मरने वालों की संख्या 1,300 से अधिक पहुंच चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
परिवारों की निगाहें सुरंगों पर
लापता कर्मियों के परिवार लगातार अधिकारियों से जानकारी की मांग कर रहे हैं। कई परिवारों के लिए हर गुजरता दिन चिंता बढ़ा रहा है, लेकिन संजय साह और कबीर महारजन की वापसी ने यह उम्मीद भी कायम रखी है कि लंबे समय तक भूमिगत फंसे लोगों को बचाया जा सकता है।
रेस्क्यू टीमों का फोकस अब उन सुरंगों तक जल्द से जल्द पहुंचने पर है जहां हवा, पानी या भोजन की उपलब्धता के संकेत मिले हैं।
बचाव अभियान में अंतरराष्ट्रीय मदद
नेपाल के इस बड़े बचाव अभियान में नेपाली सेना के साथ कई देशों की टीमें और विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। सुरंगों के नक्शे, तकनीकी सलाह, भारी मशीनरी और विशेष बचाव उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
रेस्क्यू अधिकारियों के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य अब स्पष्ट है—121 संभावित सुरंग-पीड़ितों तक पहुंचना और उन्हें जिंदा बाहर निकालना।
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