नेपाल त्रासदी: छह गुना चौड़ी हुई त्रिशूली नदी ने निगल लिए गांवों के गांव, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा खौफनाक मंजर
नेपाल में लगातार बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। त्रिशूली नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ उसका फैलाव कई गुना बढ़ गया, जिससे नदी किनारे बसे गांवों और बस्तियों में पानी और मलबा घुस गया। सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद का अंतर साफ दिखाई दे रहा है। कई सड़कें, पुल और घर बाढ़ की चपेट में आए हैं, जबकि राहत और बचाव अभियान जारी है।
लेखक
Vinay Mishra
नेपाल में कुदरत का कहर, छह गुना तक चौड़ी हुई त्रिशूली नदी; सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाया तबाही का सच
नई दिल्ली: नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ ने एक बार फिर भयावह तस्वीर पेश की है। लगातार बारिश के बाद त्रिशूली नदी उफान पर आ गई और कई इलाकों में नदी का फैलाव सामान्य से कई गुना बढ़ गया। सैटेलाइट तस्वीरों में नदी के सामान्य स्वरूप और बाढ़ के बाद के हालात की तुलना करने पर तबाही का पैमाना साफ नजर आता है।
नदी के किनारे बसे कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया। घरों, खेतों और सड़कों पर पानी और मलबा जमा हो गया। कई इलाकों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बाढ़ से पहले और बाद का फर्क
सैटेलाइट तस्वीरों में त्रिशूली नदी के आसपास का इलाका बाढ़ से पहले अपेक्षाकृत संकरा दिखाई देता है। लेकिन बाढ़ के बाद नदी का पानी अपने सामान्य प्रवाह क्षेत्र से काफी दूर तक फैल गया।
कई जगहों पर नदी और आसपास की जमीन के बीच का अंतर लगभग खत्म होता नजर आया। पानी ने खेतों और आबादी वाले हिस्सों को भी अपनी चपेट में ले लिया।
इसी वजह से सोशल मीडिया और स्थानीय रिपोर्टों में त्रिशूली नदी के ‘छह गुना चौड़ा’ होने की चर्चा हो रही है। हालांकि अलग-अलग स्थानों पर नदी के फैलाव का स्तर अलग रहा है और इसे पूरे नदी तंत्र पर एक समान बढ़ोतरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
गांवों में घुसा पानी, घर और सड़कें बनीं निशाना
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नदी किनारे बसे गांवों पर पड़ा। अचानक बढ़े पानी के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा।
कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं, जबकि कुछ जगहों पर भूस्खलन और मलबे ने रास्ते बंद कर दिए। पुलों और संपर्क मार्गों के क्षतिग्रस्त होने से राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
त्रिशूली नदी के आसपास कई महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर परियोजनाएं भी हैं। बाढ़ और मलबे का असर इन परियोजनाओं से जुड़े इलाकों में भी दिखाई दिया है।
सुरंग में फंसे कर्मचारियों का रेस्क्यू बना उम्मीद की खबर
इसी आपदा के बीच त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों को कई दिनों बाद जिंदा बचाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचाव दल को भारी मलबे और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
दो लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने से उन परिवारों में भी उम्मीद जगी है, जिनके परिजन अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
नदी के साथ आया मलबा बना बड़ा खतरा
बाढ़ के दौरान सिर्फ पानी ही गांवों तक नहीं पहुंचा। तेज बहाव अपने साथ पत्थर, मिट्टी, पेड़ और दूसरे मलबे भी लेकर आया। यही वजह है कि कई जगहों पर नुकसान सिर्फ पानी से नहीं बल्कि मलबे के भारी दबाव से भी हुआ।
नदी के किनारे की जमीन कटने से कई मकानों और खेतों के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो गया।
क्यों खतरनाक है त्रिशूली नदी?
त्रिशूली नेपाल की प्रमुख नदियों में से एक है। इसका प्रवाह हिमालयी क्षेत्र से होकर गुजरता है और इसके आसपास कई बस्तियां तथा हाइड्रोपावर परियोजनाएं विकसित हुई हैं।
मानसून के दौरान भारी बारिश होने पर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक आने वाला मलबा स्थिति को और गंभीर बना देता है।
ऐसे में नदी के किनारे बसे गांवों के लिए अचानक आने वाली बाढ़ सबसे बड़ा खतरा बन जाती है।
सैटेलाइट तस्वीरें क्यों महत्वपूर्ण हैं?
आपदा के दौरान सैटेलाइट तस्वीरें प्रशासन और राहत एजेंसियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होती हैं। इनके जरिए यह पता लगाने में मदद मिलती है कि बाढ़ का पानी कितने बड़े क्षेत्र में फैला है और किन इलाकों का संपर्क टूट गया है।
बाढ़ से पहले और बाद की तस्वीरों को मिलाकर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है। इससे बचाव दलों को उन इलाकों तक पहुंचने में मदद मिलती है जहां जमीन से तुरंत पहुंचना मुश्किल होता है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी
बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की है।
कई स्थानों पर सड़क संपर्क बहाल करने और मलबा हटाने का काम भी किया जा रहा है।
त्रिशूली नदी की सैटेलाइट तस्वीरें नेपाल में आई बाढ़ की भयावहता को सामने लाती हैं। जिस नदी का सामान्य प्रवाह एक सीमित क्षेत्र में दिखाई देता है, वही बाढ़ के दौरान आसपास के बड़े भूभाग में फैल गई। गांवों, खेतों और बुनियादी ढांचे पर इसका असर इस प्राकृतिक आपदा की गंभीरता का अंदाजा देता है।
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