अमेरिका के स्कूलों में AI पर एक और बड़ा बैन, लॉस एंजिल्स ने सभी छात्रों के लिए बंद किए Generative AI टूल्स
अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े पब्लिक स्कूल डिस्ट्रिक्ट Los Angeles Unified School District (LAUSD) ने 2026-27 शैक्षणिक वर्ष में छात्रों के लिए जिला-प्रदत्त डिवाइसों पर Generative AI टूल्स का इस्तेमाल रोक दिया है। यह रोक उम्र की परवाह किए बिना सभी छात्रों पर लागू है। ChatGPT और Claude जैसे टूल्स तक पहुंच प्रतिबंधित कर दी गई है, जबकि जिला AI के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है।
लेखक
Vinay Mishra

लॉस एंजिल्स के स्कूलों में AI पर बड़ा फैसला, सभी छात्रों के लिए Generative AI पर रोक; जानिए क्यों
लॉस एंजिल्स: अमेरिका में स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज होती जा रही है। इसी बीच Los Angeles Unified School District (LAUSD) ने 2026-27 शैक्षणिक वर्ष के लिए छात्रों के लिए Generative AI टूल्स पर रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध जिला द्वारा उपलब्ध कराए गए लैपटॉप, टैबलेट और अन्य डिवाइसों पर लागू होगा और सभी छात्रों, यानी उम्र की परवाह किए बिना, इसका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका के कई स्कूल और शिक्षा संस्थान इस सवाल पर विचार कर रहे हैं कि छात्रों को AI से पूरी तरह दूर रखा जाए या उन्हें इसका जिम्मेदार इस्तेमाल सिखाया जाए।
ChatGPT और Claude जैसे AI टूल्स की पहुंच बंद
LAUSD के स्कूलों में छात्रों के लिए Generative AI टूल्स की पहुंच जिला-प्रदत्त डिवाइसों पर रोक दी गई है। इसमें ChatGPT और Claude जैसे लोकप्रिय AI प्लेटफॉर्म शामिल हैं। बोर्ड की बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी भी छात्र को जिला डिवाइस के जरिए Generative AI इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।
इससे पहले 13 वर्ष और उससे अधिक उम्र के छात्रों को डिजिटल सिटिजनशिप से जुड़ा प्रशिक्षण पूरा करने और जिम्मेदार इस्तेमाल की शर्तें स्वीकार करने के बाद कुछ स्वीकृत AI टूल्स इस्तेमाल करने की अनुमति थी। नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत के साथ यह व्यवस्था बदल दी गई।
Google सर्च चलेगा, लेकिन AI Mode नहीं
दिलचस्प बात यह है कि LAUSD ने छात्रों के लिए सामान्य Google सर्च को बंद नहीं किया है। छात्र अभी भी इंटरनेट पर जानकारी खोज सकते हैं।
हालांकि, Google का AI Mode छात्र अकाउंट और जिला डिवाइसों पर बंद कर दिया गया है। यानी छात्र सामान्य सर्च तो कर सकेंगे, लेकिन AI के साथ बातचीत कर फॉलो-अप सवाल पूछने वाली सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
सर्च रिजल्ट के ऊपर Google की ओर से दिखाई देने वाला छोटा AI-generated summary कुछ मामलों में नजर आ सकता है, लेकिन छात्र उससे बातचीत नहीं कर पाएंगे।
निजी मोबाइल या लैपटॉप पर क्या होगा?
यह प्रतिबंध मुख्य रूप से district-issued devices पर लागू है। स्कूल डिस्ट्रिक्ट फिलहाल यह तय नहीं कर सकता कि छात्र अपने निजी मोबाइल, लैपटॉप या दूसरे डिवाइस पर AI का इस्तेमाल करते हैं या नहीं।
हालांकि, अगर कोई छात्र निजी डिवाइस पर अपने स्कूल अकाउंट से लॉग इन करके AI इस्तेमाल करता है, तो उस गतिविधि को ट्रैक किया जा सकता है।
यही वजह है कि स्कूल बोर्ड के सामने अब यह सवाल भी है कि निजी डिवाइस पर AI के इस्तेमाल को लेकर भविष्य में स्पष्ट नियम बनाए जाएं या नहीं।
AI को पूरी तरह खत्म नहीं करना चाहता LAUSD
LAUSD का फैसला AI को शिक्षा से हमेशा के लिए हटाने की कोशिश नहीं है। डिस्ट्रिक्ट फिलहाल यह समीक्षा कर रहा है कि AI को छात्रों की पढ़ाई में किस तरह सुरक्षित और प्रभावी तरीके से शामिल किया जाए।
इसके लिए एक विशेष Generative AI Committee बनाई गई है, जो AI के शैक्षणिक इस्तेमाल, सुरक्षा और संभावित जोखिमों पर सिफारिशें तैयार करेगी। समिति की सिफारिशें शैक्षणिक वर्ष के अंत में स्कूल बोर्ड के सामने रखी जाएंगी।
AI के गलत इस्तेमाल और निर्भरता की चिंता
स्कूलों में Generative AI को लेकर सबसे बड़ी चिंताओं में नकल, असाइनमेंट खुद न करना और तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता शामिल हैं।
AI कुछ ही सेकंड में निबंध, उत्तर, कोड या दूसरी सामग्री तैयार कर सकता है। इससे शिक्षकों के सामने यह चुनौती पैदा हुई है कि छात्र वास्तव में खुद सीख रहे हैं या AI से अपना काम करवा रहे हैं।
इसके अलावा AI द्वारा गलत या भ्रामक जानकारी देने की समस्या भी शिक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। LAUSD के अधिकारियों ने भी छात्रों को यह समझाने की जरूरत पर जोर दिया है कि AI के जवाब हमेशा सही नहीं होते।
स्कूलों में स्क्रीन टाइम घटाने की भी कोशिश
LAUSD का AI प्रतिबंध स्कूलों में तकनीक के इस्तेमाल को सीमित करने की बड़ी नीति का हिस्सा है। इससे पहले स्कूल बोर्ड ने छात्रों के स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए उम्र के आधार पर नए नियम लागू किए थे।
छोटी कक्षाओं में स्क्रीन के इस्तेमाल पर ज्यादा सख्ती की गई है, जबकि बड़ी कक्षाओं के छात्रों के लिए भी स्क्रीन टाइम सीमित करने की व्यवस्था शुरू की गई है।
यानी लॉस एंजिल्स में बहस सिर्फ AI तक सीमित नहीं है। स्कूलों में छात्रों के लिए कंप्यूटर और स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता भी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
न्यूयॉर्क के बाद लॉस एंजिल्स का बड़ा कदम
LAUSD का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अमेरिका के सबसे बड़े स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स में से एक है। वहीं न्यूयॉर्क सिटी ने भी हाल में छात्रों के AI इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।
हालांकि दोनों नीतियों में अंतर है। न्यूयॉर्क का प्रतिबंध मुख्य रूप से आठवीं कक्षा तक के छात्रों पर केंद्रित है, जबकि लॉस एंजिल्स का मौजूदा मोरेटोरियम जिला-प्रदत्त डिवाइस इस्तेमाल करने वाले सभी छात्रों पर लागू है।
क्या AI बैन सही रास्ता है?
AI पर रोक लगाने के समर्थकों का कहना है कि छात्रों को पहले बुनियादी सोच, लेखन और समस्या-समाधान कौशल विकसित करने चाहिए। उनका तर्क है कि अगर हर काम के लिए AI का सहारा लिया गया तो छात्रों की स्वतंत्र सोच प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर, कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि AI को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय छात्रों को AI literacy सिखाना ज्यादा प्रभावी तरीका हो सकता है। उनका कहना है कि आने वाले समय में AI कामकाज और शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, इसलिए छात्रों को इससे पूरी तरह दूर रखना लंबे समय के लिए समाधान नहीं है।
LAUSD की अगली रणनीति क्या होगी?
फिलहाल छात्रों के लिए जिला डिवाइसों पर Generative AI का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। इसी दौरान LAUSD AI से जुड़े नए नियम और पाठ्यक्रम तैयार करेगा।
डिस्ट्रिक्ट का लक्ष्य यह समझना है कि AI छात्रों की पढ़ाई को बेहतर कैसे बना सकता है, बिना उन्हें तकनीक पर निर्भर किए।
लॉस एंजिल्स का यह फैसला अमेरिका में शिक्षा और AI के रिश्ते को लेकर चल रही बड़ी बहस का हिस्सा है। एक तरफ स्कूल छात्र-छात्राओं को ChatGPT जैसे टूल्स से दूर कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यही संस्थान आने वाले समय के लिए AI शिक्षा तैयार करने की कोशिश भी कर रहे हैं। अब देखना होगा कि यह अस्थायी रोक आगे चलकर स्थायी प्रतिबंध बनती है या जिम्मेदार AI इस्तेमाल की नई नीति का रास्ता खोलती है।
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