फॉकलैंड द्वीपों पर फिर गरमाया विवाद, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति माइली ने ब्रिटेन को दी चुनौती; तेल परियोजना पर प्रतिबंध की तैयारी
अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने फॉकलैंड द्वीपों (अर्जेंटीना में मालविनास) पर ब्रिटेन के साथ लंबे समय से चले आ रहे विवाद को फिर हवा दे दी है। माइली ने द्वीपों पर अर्जेंटीना के संप्रभुता दावे को दोहराते हुए वहां तेल खोज परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों ने भी इस पुराने विवाद में नया भू-राजनीतिक मोड़ ला दिया है। ब्रिटेन ने साफ कहा है कि द्वीप ब्रिटिश रहेंगे और वहां के लोगों की इच्छा का सम्मान किया जाएगा।
लेखक
Vinay Mishra
माइली ने फिर उठाया फॉकलैंड का मुद्दा, ब्रिटेन से टकराव बढ़ने के आसार; तेल पर भी कड़ा रुख
नई दिल्ली: अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच दशकों पुराने फॉकलैंड द्वीप विवाद ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने एक राष्ट्रीय संबोधन में फॉकलैंड द्वीपों पर अपने देश के संप्रभुता दावे को दोहराते हुए ब्रिटेन के खिलाफ आर्थिक और कानूनी कदम उठाने की बात कही।
माइली ने विवादित क्षेत्र में चल रही तेल गतिविधियों को निशाना बनाते हुए वहां काम कर रही कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अर्जेंटीना इस मुद्दे पर आगे और कड़ा रुख अपना सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
फॉकलैंड द्वीप दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह है। अर्जेंटीना इसे मालविनास द्वीप कहता है और अपनी संप्रभुता का दावा करता है, जबकि ब्रिटेन लगभग दो शताब्दियों से इस पर नियंत्रण रखता है।
1982 में अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच इन द्वीपों को लेकर युद्ध भी हुआ था। अर्जेंटीना ने द्वीपों पर कब्जा कर लिया था, लेकिन ब्रिटेन ने सैन्य अभियान चलाकर उन्हें वापस अपने नियंत्रण में ले लिया।
युद्ध के बाद से ही यह मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में संवेदनशील बना हुआ है।
माइली ने क्यों फिर तेज किया अभियान?
माइली ने अपने ताजा भाषण में कहा कि अर्जेंटीना फॉकलैंड द्वीपों को वापस पाने के अपने दावे से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने दावा किया कि अर्जेंटीना अपने लक्ष्य को कूटनीतिक, आर्थिक और कानूनी माध्यमों से आगे बढ़ाएगा।
माइली ने ब्रिटेन की स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की और द्वीपों के आसपास तेल की खोज को अर्जेंटीना के हितों के खिलाफ बताया।
तेल परियोजना बनी विवाद का नया केंद्र
फॉकलैंड के आसपास समुद्र में तेल की खोज ने इस विवाद को आर्थिक आयाम भी दे दिया है।
Sea Lion oil field इस समय सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। इसे ब्रिटिश कंपनी Rockhopper Exploration और इजरायली कंपनी Navitas Petroleum मिलकर विकसित कर रही हैं। माइली सरकार ने इन गतिविधियों में शामिल कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है।
रिपोर्टों के मुताबिक यह परियोजना भविष्य में बड़े पैमाने पर तेल उत्पादन की संभावना रखती है। ऐसे में फॉकलैंड का विवाद केवल संप्रभुता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ऊर्जा संसाधनों से भी जुड़ गया है।
ट्रंप की टिप्पणी ने बढ़ाई अर्जेंटीना की उम्मीद
विवाद के ताजा दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियां भी अहम मानी जा रही हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका फॉकलैंड मुद्दे पर अपनी पारंपरिक स्थिति की समीक्षा कर सकता है।
माइली ने इसे अर्जेंटीना के लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर लिया है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदल रही हैं और इससे अर्जेंटीना के लंबे समय से चले आ रहे दावे को नई गति मिल सकती है।
हालांकि, अमेरिका ने अभी तक अर्जेंटीना के संप्रभुता दावे का औपचारिक समर्थन नहीं किया है। यही वजह है कि ट्रंप की टिप्पणियों को लेकर अटकलें तो तेज हैं, लेकिन अमेरिकी नीति में निर्णायक बदलाव अभी स्पष्ट नहीं है।
ब्रिटेन ने तुरंत दिया जवाब
माइली के बयान के बाद ब्रिटेन ने भी अपनी स्थिति साफ कर दी। ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने कहा कि फॉकलैंड द्वीप ब्रिटिश रहेंगे और वहां के लोगों की इच्छा का सम्मान किया जाएगा।
ब्रिटेन का कहना है कि द्वीपों के निवासियों को अपने राजनीतिक भविष्य को तय करने का अधिकार है। 2013 में हुए जनमत संग्रह में लगभग 99.8 प्रतिशत मतदाताओं ने ब्रिटिश क्षेत्र के रूप में बने रहने के पक्ष में मतदान किया था।
ब्रिटिश सरकार ने माइली की संप्रभुता संबंधी मांग को खारिज करते हुए अपनी स्थिति को ‘अडिग’ बताया है।
क्या फिर युद्ध का खतरा है?
फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि अर्जेंटीना सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। माइली का मौजूदा रुख मुख्य रूप से कूटनीतिक, आर्थिक और कानूनी दबाव बढ़ाने पर केंद्रित दिखाई देता है।
1982 के युद्ध की भयावह यादें दोनों देशों के लिए अब भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में मौजूदा विवाद के बावजूद सैन्य टकराव की तुलना में राजनीतिक और आर्थिक दबाव की रणनीति अधिक प्रमुख है।
माइली के लिए घरेलू राजनीति भी अहम
फॉकलैंड का मुद्दा अर्जेंटीना में बेहद भावनात्मक और राष्ट्रवादी महत्व रखता है। ऐसे समय में जब माइली सरकार को आर्थिक चुनौतियों और गिरती लोकप्रियता का सामना करना पड़ रहा है, फॉकलैंड का मुद्दा घरेलू राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि माइली का सख्त रुख घरेलू समर्थन जुटाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर होगी कि अर्जेंटीना तेल कंपनियों के खिलाफ प्रस्तावित प्रतिबंधों को किस तरह लागू करता है और अमेरिका फॉकलैंड विवाद पर अपनी नीति में वास्तव में कोई बदलाव करता है या नहीं।
दूसरी ओर ब्रिटेन द्वीपों के निवासियों के आत्मनिर्णय के अधिकार और अपनी संप्रभुता पर कायम है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
फॉकलैंड विवाद फिलहाल युद्ध की स्थिति में नहीं है, लेकिन माइली के नए कदमों, तेल परियोजनाओं और अमेरिका की संभावित नीति-परिवर्तन ने करीब चार दशक पुराने विवाद को फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है।
Keep reading
More in अंतरराष्ट्रीय समाचार
अंतरराष्ट्रीय समाचार
'यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए पीएम मोदी के पास बेहतरीन आइडिया', रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने की जमकर तारीफ
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों और सुझावों की सराहना की…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
फ्लाईदुबई विमान हमले के बाद ट्रंप की ईरान को चेतावनी, मिडिल ईस्ट भेजे 10,000 अमेरिकी सैनिक
फ्लाईदुबई की इजरायल जा रही उड़ान में भारतीय पायलट स्मित मछार पर सह-पायलट के हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिक…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
गांधी जयंती पर आज देशभर में होंगी विशेष ग्राम सभाएं, विकास और शासन सुधार पर होगी चर्चा
Summary: महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को देशभर में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इनमें पंचायतों को मजबूत कर…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
क्या यूरोपीय संघ में फिर शामिल होगा ब्रिटेन? PM बर्नहम के बयान के बाद फ्रांस और स्पेन ने कहा- वेलकम बैक
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने यूरोपीय संघ के साथ देश के भविष्य के रिश्ते को लेकर सभी विकल्पों पर विचार करने की बात कही है। इनमें EU…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
'सिर और हाथ लगभग कट गए थे...', फ्लाईदुबई फ्लाइट में इजरायली डेंटिस्ट ने बचाई स्मित मछार की जान
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में ओमानी को-पायलट के कथित हमले में गंभीर रूप से घायल भारतीय कैप्टन स्मित मछार की जान बचा…
अंतरराष्ट्रीय समाचार
महिला कर्मचारियों से हाथ मिलाने से मना करता था हमलावर, फ्लाईदुबई के ओमानी को-पायलट को लेकर बड़ा खुलासा
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कप्तान पर कथित हमले और विमान का नियंत्रण लेने की कोशिश के बाद ओमानी को-पायलट को लेकर कई अहम…
