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Lindsay Clancy Trial Update: क्या सिर्फ एक जूरी सदस्य मानता था कि वह दोषी है? ‘कबूलनामे’ के बावजूद क्यों अटका फैसला

अमेरिका के मैसाचुसेट्स में तीन बच्चों की हत्या के आरोपी लिंडसे क्लैंसी के मुकदमे में जूरी किसी सर्वसम्मत फैसले पर नहीं पहुंच सकी। छह सप्ताह चले ट्रायल के बाद करीब सात दिन तक विचार-विमर्श के बावजूद जूरी में गतिरोध बना रहा। रिपोर्टों के अनुसार, स्थिति 11-1 तक पहुंच गई थी और एक जूरी सदस्य के रुख को लेकर विवाद खड़ा हुआ। क्लैंसी ने बच्चों की मौत की जिम्मेदारी स्वीकार की है, लेकिन उनका बचाव पक्ष कहता है कि उस समय वह गंभीर postpartum psychosis से गुजर रही थीं और कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं थीं। अंततः जज ने mistrial घोषित कर दिया।

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Lindsay Clancy Trial Update: क्या सिर्फ एक जूरी सदस्य मानता था कि वह दोषी है? ‘कबूलनामे’ के बावजूद क्यों अटका फैसला

Lindsay Clancy Trial: एक जूरी सदस्य ने रोका फैसला? बच्चों की मौत कबूलने के बावजूद क्यों नहीं साबित हुआ अपराध

मैसाचुसेट्स: अमेरिका में अपने तीन बच्चों की हत्या के मामले में आरोपी लिंडसे क्लैंसी के ट्रायल का अंत बिना फैसले के हुआ। जूरी करीब सात दिनों तक विचार-विमर्श करती रही, लेकिन सर्वसम्मति नहीं बन सकी। आखिरकार जज विलियम सुलिवन ने mistrial घोषित कर दिया। अब अभियोजन पक्ष के सामने दोबारा मुकदमा चलाने का विकल्प खुला है।

मामला इसलिए और पेचीदा हो गया क्योंकि क्लैंसी ने खुद अपने तीन बच्चों की हत्या की बात स्वीकार की है। लेकिन इस केस में असली कानूनी सवाल यह नहीं था कि बच्चों की मौत में उनकी भूमिका थी या नहीं, बल्कि यह था कि क्या उस समय उनकी मानसिक स्थिति ऐसी थी कि उन्हें अपने कृत्य के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

क्या जूरी में 11-1 का फैसला था?

विचार-विमर्श के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक जूरी में 11-1 का विभाजन दिखाई दे रहा था। क्लैंसी के बचाव पक्ष के वकील केविन रेडिंगटन ने अदालत में दावा किया कि एक जूरी सदस्य फैसला रोक रहा है और वह जज द्वारा समझाए गए reasonable doubt के कानूनी मानक को लागू नहीं कर रहा।

लेकिन इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि ‘11 जूरी सदस्य दोषी मानते थे और सिर्फ एक निर्दोष।’ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी यह स्पष्ट नहीं करती कि हर जूरी सदस्य किस अंतिम verdict के पक्ष में था। इतना जरूर सामने आया कि एक सदस्य का रुख बाकी जूरी से अलग था और उसी कारण सर्वसम्मति नहीं बन पा रही थी।

होल्डआउट जूरी सदस्य को हटाने की मांग

रेडिंगटन ने अदालत से उस कथित holdout juror को हटाने की मांग की। उनका कहना था कि जूरी फोरपर्सन के नोट से पता चलता है कि एक सदस्य ने मामले में संदेह होने की बात मानी, लेकिन उस संदेह को कानूनी मानक के अनुसार verdict पर लागू नहीं किया।

बचाव पक्ष ने इसे गंभीर समस्या बताया और आशंका जताई कि इसी वजह से मुकदमा बिना फैसले के खत्म हो सकता है।

लेकिन जज सुलिवन ने जूरी सदस्य को हटाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि ऐसा कोई संकेत नहीं है कि वह सदस्य विचार-विमर्श से इनकार कर रहा है या कानून का पालन करने से साफ तौर पर मना कर रहा है।

जज ने सभी जूरी सदस्यों से की पूछताछ

विवाद बढ़ने के बाद जज ने जूरी सदस्यों को एक-एक करके शपथ दिलाई और पूछा कि क्या वे अदालत के निर्देशों के मुताबिक अपना काम कर सकते हैं।

इसके बाद जज ने पूरी जूरी को फिर से reasonable doubt का कानूनी अर्थ समझाया। इसके बावजूद जूरी सर्वसम्मत फैसले तक नहीं पहुंच सकी।

जूरी ने इससे पहले भी जज को सूचित किया था कि वह सर्वसम्मत निर्णय तक नहीं पहुंच पा रही है। मंगलवार और बुधवार को भी इसी तरह के संकेत मिलने के बाद जज ने सदस्यों को आगे विचार-विमर्श जारी रखने को कहा था।

लिंडसे ने बच्चों की हत्या की बात मानी, फिर भी सवाल क्या है?

लिंडसे क्लैंसी ने 24 जनवरी 2023 को अपने तीन बच्चों—5 साल की कोरा, 3 साल के डॉसन और 8 महीने के कैलन—की हत्या करने की बात स्वीकार की है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक उन्होंने बच्चों की हत्या जानबूझकर की और इसके बाद खुदकुशी की कोशिश की। वह दूसरी मंजिल की खिड़की से कूद गई थीं और इस प्रयास में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद वह लकवाग्रस्त हो गईं।

लेकिन कानून में सिर्फ यह स्वीकार करना पर्याप्त नहीं है कि किसी व्यक्ति ने कृत्य किया। इस मुकदमे में यह तय करना था कि क्या वह उस समय अपने कृत्य की गलत प्रकृति समझने और उसके लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार होने की मानसिक क्षमता रखती थीं।

बचाव पक्ष ने postpartum psychosis को बनाया आधार

क्लैंसी के वकील का मुख्य तर्क था कि बच्चों की हत्या के समय वह गंभीर postpartum psychosis से गुजर रही थीं।

ट्रायल के दौरान परिवार के सदस्यों और मेडिकल विशेषज्ञों ने उनकी मानसिक स्थिति के बारे में गवाही दी। बचाव पक्ष ने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद उनकी मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई और उन्होंने कई बार इलाज की मांग की थी। उन्हें कई दवाएं भी दी गई थीं।

बचाव पक्ष के मुताबिक, उनकी मानसिक बीमारी ने वास्तविकता को समझने की क्षमता को प्रभावित किया था।

अभियोजन की दलील बिल्कुल अलग

अभियोजन पक्ष ने यह नहीं नकारा कि क्लैंसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। लेकिन उनका तर्क था कि वह जानती थीं कि वह क्या कर रही हैं और समझती थीं कि बच्चों की हत्या गलत है।

अभियोजन के मुताबिक, क्लैंसी ने अपने आत्महत्या के प्रयास से पहले ऐसी परिस्थितियां बनाई थीं जिससे संकेत मिलता है कि उन्होंने घटनाओं के बारे में सोचा और योजना बनाई थी।

यही अंतर इस मुकदमे का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल बना रहा—मानसिक बीमारी थी, लेकिन क्या वह इतनी गंभीर थी कि उन्हें आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाए?

फिर क्यों हुआ Mistrial?

अमेरिकी आपराधिक मामलों में जूरी को आम तौर पर सर्वसम्मत verdict तक पहुंचना होता है। इस मामले में जूरी बार-बार गतिरोध की सूचना देती रही।

करीब सात दिनों के विचार-विमर्श के बाद भी जब सर्वसम्मति नहीं बनी तो जज के पास mistrial घोषित करने का रास्ता बचा। इसका अर्थ यह नहीं है कि क्लैंसी को दोषी या निर्दोष घोषित कर दिया गया है। मुकदमे में फिलहाल कोई अंतिम verdict नहीं आया।

क्या अब दोबारा चलेगा मुकदमा?

Mistrial के बाद अभियोजन पक्ष के सामने मुकदमा दोबारा चलाने का विकल्प है। हालांकि यह फैसला अभियोजन को लेना होगा।

Plymouth County District Attorney Timothy Cruz से जब पूछा गया कि क्या उनकी टीम दोबारा मुकदमा चलाएगी, तो उन्होंने तत्काल कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की।

छह सप्ताह की सुनवाई, 80 से ज्यादा गवाह

यह मुकदमा करीब छह सप्ताह चला और इसमें 80 से अधिक गवाहों की गवाही तथा 300 से ज्यादा exhibits पेश किए गए। केस में परिवार के सदस्यों, डॉक्टरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की गवाही महत्वपूर्ण रही।

इसी वजह से जूरी का फैसला न आना अभियोजन और बचाव दोनों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल: अपराध या मानसिक बीमारी?

लिंडसे क्लैंसी केस अब अमेरिका में postpartum mental health और criminal responsibility को लेकर बहस का एक बड़ा उदाहरण बन गया है।

एक तरफ तीन बच्चों की मौत का बेहद गंभीर मामला है, दूसरी तरफ यह सवाल है कि प्रसव के बाद होने वाली गंभीर मानसिक बीमारी किसी व्यक्ति के फैसले और वास्तविकता को समझने की क्षमता को किस हद तक प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल अदालत ने क्लैंसी को दोषी नहीं ठहराया है। जूरी की असहमति के कारण mistrial हो चुका है और अब आगे की कानूनी रणनीति अभियोजन पक्ष के अगले कदम पर निर्भर करेगी।

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