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'किराया भरना है...', शहजाद पूनावाला ने बताई BJP से इस्तीफे की वजह; कांग्रेस में जाने के लिए रखी ये शर्त

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी छोड़ने के बाद अपने फैसले की वजह साफ की है। उन्होंने कहा कि राजनीति में प्रवक्ता के तौर पर कोई नियमित वेतन नहीं मिलता और उन्हें अपनी निजी आर्थिक जिम्मेदारियां पूरी करनी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में वापसी तभी संभव है, जब गांधी परिवार पार्टी नेतृत्व से हटे और कुछ ऐतिहासिक मुद्दों पर माफी मांगे।

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'किराया भरना है...', शहजाद पूनावाला ने बताई BJP से इस्तीफे की वजह; कांग्रेस में जाने के लिए रखी ये शर्त

मुझे किराया भरना है...', शहजाद पूनावाला ने बताया BJP क्यों छोड़ी; कांग्रेस में वापसी पर रखी बड़ी शर्त

नई दिल्ली: बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के पार्टी छोड़ने के फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब पूनावाला ने एक इंटरव्यू में अपने इस्तीफे की वजह स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनके सामने आर्थिक और निजी जिम्मेदारियां हैं और उन्हें अपना घर चलाने के लिए कमाई की जरूरत है।

पूनावाला ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बीजेपी छोड़ने का फैसला किसी राजनीतिक नाराजगी या पार्टी नेतृत्व से मतभेद की वजह से नहीं है। उन्होंने बताया कि वह इस फैसले पर 2024 से ही विचार कर रहे थे और कुछ सप्ताह पहले उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी थी।

'मुझे अपना किराया भरना है'

पूनावाला ने कहा कि राजनीतिक दलों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं को नियमित वेतन नहीं मिलता। ऐसे में उनके लिए निजी आर्थिक जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो रहा था।

उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि उन्हें अपना किराया भरना है और मकान मालिक यह नहीं देखेगा कि वह किसी पार्टी के प्रवक्ता हैं या नहीं। उन्होंने अपने फैसले को व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि राजनीति में सक्रिय रहने के साथ-साथ आजीविका की जरूरतों को भी पूरा करना जरूरी है।

2024 से इस्तीफे पर कर रहे थे विचार

बीजेपी छोड़ने के बाद पहली बार विस्तार से अपनी बात रखते हुए पूनावाला ने कहा कि उनका इस्तीफा अचानक लिया गया फैसला नहीं था।

उनके मुताबिक, वह 2024 से ही इस बारे में सोच रहे थे। कुछ सप्ताह पहले जब उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियां रखीं, तो नेतृत्व ने उनकी मदद करने की कोशिश भी की। इसके बावजूद उन्होंने पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा देने का फैसला किया।

उन्होंने राजनीतिक हलकों में चल रही उन अटकलों को भी खारिज किया, जिनमें उनके इस्तीफे के पीछे किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम या बीजेपी नेतृत्व से मतभेद की बात कही जा रही थी।

बीजेपी छोड़कर भी पीएम मोदी की तारीफ

पूनावाला ने अपने इस्तीफे के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की विचारधारा के प्रति सम्मान जताया है।

उन्होंने कहा कि बीजेपी उनके लिए कभी सिर्फ नौकरी या रोजगार का जरिया नहीं रही। उनके मुताबिक, पार्टी से जुड़ना उनके लिए एक विचारधारा से जुड़ने का अवसर था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की भी प्रशंसा की।

पूनावाला ने यह भी कहा कि पार्टी छोड़ने का मतलब यह नहीं है कि वह बीजेपी के काम या प्रधानमंत्री मोदी के विजन का समर्थन करना बंद कर देंगे।

क्या कांग्रेस में लौटेंगे शहजाद पूनावाला?

बीजेपी से इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या शहजाद पूनावाला एक बार फिर कांग्रेस का रुख कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने फिलहाल कांग्रेस में लौटने की संभावना को लगभग खारिज किया है।

पूनावाला ने कांग्रेस में शामिल होने को लेकर एक बेहद सख्त शर्त रखी। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस के शीर्ष गांधी परिवार के सदस्य पार्टी नेतृत्व से हट जाएं और कुछ ऐतिहासिक मुद्दों पर माफी मांगी जाए, तभी वह कांग्रेस में शामिल होने पर विचार कर सकते हैं।

यानी फिलहाल उनका कांग्रेस में लौटने का कोई इरादा नजर नहीं आता।

2017 में कांग्रेस से अलग हुए थे

शहजाद पूनावाला पहले कांग्रेस से जुड़े हुए थे। उन्होंने 2017 में कांग्रेस के आंतरिक चुनाव को लेकर सवाल उठाए थे और बाद में पार्टी से अलग हो गए। इसके बाद उन्होंने बीजेपी का रुख किया और पिछले कुछ वर्षों में वह टीवी डिबेट्स और सार्वजनिक मंचों पर बीजेपी के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल रहे।

अब बीजेपी से इस्तीफे के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम पर नजर बनी हुई है। हालांकि, पूनावाला ने संकेत दिया है कि वह फिलहाल निजी और आर्थिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना चाहते हैं तथा निजी क्षेत्र में जाने पर विचार कर रहे हैं।

'राजनीति कोई नौकरी नहीं'

पूनावाला के बयान का एक अहम हिस्सा यह भी रहा कि उन्होंने राजनीति को नियमित नौकरी की तरह नहीं बताया। उनका कहना है कि पहली पीढ़ी के राजनेता के तौर पर उनके सामने आर्थिक स्थिरता की चुनौती है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राजनीतिक व्यवस्था में ऐसे लोग हैं जिनके पास या तो पारिवारिक राजनीतिक विरासत है या फिर राजनीति से जुड़े दूसरे आर्थिक संसाधन हैं, लेकिन उनके मामले में स्थिति अलग है।

इस्तीफे के बाद अब क्या करेंगे पूनावाला?

शहजाद पूनावाला ने अभी अपने अगले कदम का पूरा खुलासा नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया है कि वह प्राइवेट सेक्टर में काम करने पर विचार कर रहे हैं।

इस बीच उनका यह बयान कि उन्होंने आर्थिक दबाव और घर का किराया चुकाने की जरूरत के चलते राजनीति से ब्रेक लिया, सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

फिलहाल इतना साफ है कि पूनावाला ने बीजेपी से दूरी बनाई है, लेकिन उन्होंने पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपना समर्थन पूरी तरह खत्म नहीं किया है। वहीं कांग्रेस में वापसी के लिए रखी उनकी शर्त ने उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है।

नोट: कांग्रेस में शामिल होने की शर्त और बीजेपी छोड़ने की वजह शहजाद पूनावाला के हालिया इंटरव्यू में दिए गए बयानों पर आधारित हैं। उनके अगले राजनीतिक कदम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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