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सोनीपत के अंडरब्रिज बने जलभराव का अड्डा, करोड़ों खर्च फिर भी नहीं निकला कोई समाधान

हर बारिश के बाद सोनीपत के कई अंडरब्रिज जलभराव का केंद्र बन जाते हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए इन अंडरब्रिजों में जल निकासी की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने बड़े खर्च के बाद भी स्थायी समाधान क्यों नहीं मिल पाया।

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सोनीपत के अंडरब्रिज बने जलभराव का अड्डा, करोड़ों खर्च फिर भी नहीं निकला कोई समाधान

सोनीपत के अंडरब्रिज बने जलभराव का अड्डा, करोड़ों खर्च फिर भी नहीं निकला कोई समाधान

हर बारिश के साथ लौट आती है पुरानी समस्या

सोनीपत शहर में अंडरब्रिजों में जलभराव की समस्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। बारिश शुरू होते ही शहर के कई प्रमुख अंडरब्रिज पानी से लबालब भर जाते हैं, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इन अंडरब्रिजों का उद्देश्य लोगों को सुगम और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यही तस्वीर देखने को मिलती है। बारिश होते ही अंडरब्रिज तालाब का रूप ले लेते हैं और प्रशासन केवल अस्थायी उपायों तक सीमित रह जाता है।

मुख्य बिंदु

  • बारिश के बाद कई अंडरब्रिजों में गंभीर जलभराव।

  • करोड़ों रुपये की परियोजनाओं पर उठ रहे सवाल।

  • वाहन चालकों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी।

  • जल निकासी व्यवस्था की पोल खुली।

  • प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर।

करोड़ों की लागत, लेकिन व्यवस्था फेल

सोनीपत में रेलवे क्रॉसिंग से होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए विभिन्न स्थानों पर अंडरब्रिजों का निर्माण कराया गया था। इन परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। उम्मीद थी कि इससे ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और लोगों को राहत मिलेगी।

लेकिन बारिश के मौसम में ये अंडरब्रिज खुद समस्या बन जाते हैं। कई जगहों पर पानी इतना भर जाता है कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों का निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार वाहन बीच रास्ते में बंद हो जाते हैं, जिससे लंबा जाम लग जाता है।

जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अंडरब्रिज के निर्माण में प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पानी निकालने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो तो थोड़ी सी बारिश भी बड़े संकट का कारण बन सकती है।

सोनीपत के कई अंडरब्रिजों में यही स्थिति देखने को मिल रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जल निकासी के लिए लगाए गए पंप और नालियां या तो पर्याप्त क्षमता की नहीं हैं या फिर उनका रखरखाव ठीक से नहीं किया जाता।

परिणामस्वरूप बारिश का पानी तेजी से जमा होता है और कई घंटों तक वहीं बना रहता है।

लोगों को झेलनी पड़ रही रोजाना परेशानी

जलभराव का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को हर बारिश के दौरान वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है।

कई वाहन चालक बताते हैं कि पानी में सड़क की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि जलभराव के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ता है।

प्रशासनिक दावे बनाम जमीनी हकीकत

हर वर्ष मानसून से पहले प्रशासन की ओर से जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और पंपों की जांच के दावे किए जाते हैं। हालांकि पहली ही तेज बारिश के बाद अंडरब्रिजों में पानी भरने की घटनाएं इन दावों पर सवाल खड़े कर देती हैं।

नागरिकों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान खोजने के बजाय केवल अस्थायी उपाय किए जाते हैं। पानी निकालने के लिए पंप लगाए जाते हैं, लेकिन मूल समस्या जस की तस बनी रहती है।

क्या है स्थायी समाधान?

शहरी विकास विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या का समाधान केवल पानी निकालने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए व्यापक स्तर पर ड्रेनेज नेटवर्क की समीक्षा और पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।

संभावित समाधान:

बेहतर ड्रेनेज सिस्टम

अंडरब्रिजों के आसपास उच्च क्षमता वाली जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए।

स्वचालित पंपिंग सिस्टम

बारिश के दौरान स्वतः संचालित होने वाले आधुनिक पंप लगाए जाएं।

नियमित रखरखाव

नालियों और ड्रेनेज चैनलों की समय-समय पर सफाई सुनिश्चित की जाए।

तकनीकी ऑडिट

निर्माण कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन कराया जाए ताकि खामियों की पहचान हो सके।

जनता पूछ रही है—जिम्मेदार कौन?

लगातार सामने आ रही समस्याओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि अंडरब्रिज हर बारिश में जलभराव का शिकार हो रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल योजनाओं की घोषणा और निर्माण कार्य पर्याप्त नहीं हैं। जब तक परियोजनाओं की गुणवत्ता और उनकी उपयोगिता सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक जनता को राहत नहीं मिल पाएगी।

निष्कर्ष

सोनीपत के अंडरब्रिज आज विकास और व्यवस्था के बीच की खाई को उजागर कर रहे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने ये ढांचे लोगों को सुविधा देने के बजाय बारिश के मौसम में परेशानी का कारण बन रहे हैं। जब तक जल निकासी की समस्या का स्थायी और तकनीकी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक हर मानसून में यही तस्वीर दोहराई जाती रहेगी। अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों पर है कि वे इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का ठोस समाधान कब तक निकालते हैं।

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