'कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन में ना जाएं छात्र', विजय सरकार ने विवादित आदेश लिया वापस
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने छात्रों को लेफ्ट पार्टियों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाला विवादित आदेश वापस ले लिया है। कॉलेजिएट एजुकेशन विभाग ने सरकारी कॉलेजों के अधिकारियों को छात्रों और युवाओं को ऐसे प्रदर्शनों से दूर रखने के लिए समन्वित कार्रवाई करने को कहा था। आदेश सामने आने के बाद विरोध और आलोचना शुरू हो गई, जिसके बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया।
लेखक
Vinay Mishra
छात्रों को CJP और लेफ्ट के प्रदर्शनों से दूर रहने का आदेश, विजय सरकार ने कुछ ही देर में लिया यू-टर्न
चेन्नई: तमिलनाडु की विजय सरकार ने छात्रों की राजनीतिक भागीदारी को लेकर जारी किए गए एक विवादित आदेश पर यू-टर्न ले लिया है। सरकार के कॉलेजिएट एजुकेशन विभाग ने सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के छात्रों तथा युवाओं को लेफ्ट पार्टियों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया था। हालांकि, आदेश जारी होने के कुछ ही समय बाद इसे वापस ले लिया गया।
क्या था सरकार का विवादित आदेश?
कॉलेजिएट एजुकेशन विभाग की ओर से सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपलों को भेजे गए पत्र में अधिकारियों से छात्रों और युवाओं को संबंधित राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने के लिए 'उचित समन्वित कार्रवाई' करने को कहा गया था।
इसमें स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन के बीच समन्वय की बात कही गई थी। आदेश को बेहद तत्काल यानी 'most immediate' बताया गया था।
सरकारी कॉलेजों को इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
CJP और लेफ्ट के प्रदर्शनों का था खास जिक्र
विवादित निर्देश में खास तौर पर लेफ्ट पार्टियों और तमिलनाडु कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शनों का उल्लेख किया गया था।
CJP हाल के दिनों में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में रही है। संगठन ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध-प्रदर्शन किए हैं।
इसी वजह से आदेश सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि सरकार ने प्रदर्शन आयोजित करने वाले कुछ खास संगठनों के नाम ही क्यों लिए।
विरोध बढ़ा तो सरकार ने वापस लिया आदेश
सरकार के इस निर्देश के सामने आने के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक समूहों की ओर से विरोध शुरू हो गया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने चेन्नई में कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय के बाहर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के राजनीतिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश कर रही है।
इसके बाद कॉलेजिएट एजुकेशन विभाग ने नया आदेश जारी कर पहले भेजे गए पत्र को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया।
विभाग के संयुक्त निदेशक की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि पहले जारी किया गया कार्यालय पत्र 'with immediate effect' वापस लिया जाता है।
छात्रों के विरोध के अधिकार पर उठे सवाल
विवाद के केंद्र में छात्रों का राजनीतिक और लोकतांत्रिक गतिविधियों में हिस्सा लेने का अधिकार भी रहा। आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या सरकार को छात्रों को किसी खास राजनीतिक संगठन के प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में भी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां सामने आई थीं। ऐसे माहौल में तमिलनाडु सरकार के इस आदेश ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।
सरकार की सफाई क्या है?
सरकार के आदेश में छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने के लिए प्रशासनिक समन्वय की बात कही गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इसका उद्देश्य राजनीतिक गतिविधियों के प्रभाव को कम करना और शैक्षणिक गतिविधियों में व्यवधान रोकना बताया गया था।
हालांकि, आदेश वापस लिए जाने के बाद फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार छात्रों की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कोई नया दिशानिर्देश जारी करेगी या नहीं।
क्यों चर्चा में है कॉकरोच जनता पार्टी?
कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP एक ऐसा संगठन है जो छात्रों, युवाओं, किसानों और श्रमिकों से जुड़े मुद्दों को उठाने का दावा करता है। संगठन ने तमिलनाडु में भी अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाई हैं और क्षेत्रीय राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण के लिए निर्वाचन आयोग से संपर्क किया है।
कॉकरोच का प्रतीक हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान चर्चा में आया और इसे आंदोलनकारियों ने संघर्ष और प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया।
विवाद के बीच विजय सरकार का यू-टर्न
तमिलनाडु सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र और युवा शिक्षा, परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर आंदोलनों में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
पहले छात्रों को CJP और लेफ्ट के प्रदर्शनों से दूर रखने का निर्देश और फिर कुछ ही समय में उसे वापस लेना विजय सरकार के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
फिलहाल आदेश वापस ले लिया गया है और सरकारी कॉलेजों में पहले जारी निर्देश प्रभावी नहीं रहेगा।
नोट: छात्रों को प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाला निर्देश अब वापस लिया जा चुका है। सरकार की ओर से भविष्य में कोई नया आदेश जारी होता है तो स्थिति उसके अनुसार बदल सकती है।
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