'दोनों देश मतभेद सुलझाकर बनें अच्छे पड़ोसी', Xi Jinping के भारत दौरे से पहले बदले चीन के सुर
चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के सात साल बाद भारत दौरे से पहले बीजिंग के रुख में नरमी दिखाई दे रही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और चीन को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से रिश्तों को मजबूत करना, संवाद बढ़ाना और मतभेदों को उचित तरीके से संभालना चाहिए। Xi 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit में शामिल होंगे और प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक की तैयारी भी चल रही है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के भारत दौरे से पहले भारत-चीन रिश्तों को लेकर बीजिंग के सुर कुछ नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। चीन ने कहा है कि दोनों देशों को आपसी संवाद और सहयोग बढ़ाते हुए अपने मतभेदों को सही तरीके से संभालना चाहिए।
Xi Jinping 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS Summit में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं। यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Xi Jinping के बीच द्विपक्षीय बैठक भी आयोजित करने की तैयारी है।
चीन ने क्या कहा?
Xi के भारत आने से ठीक पहले चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Mao Ning ने कहा कि चीन भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखता है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों को संवाद और सहयोग मजबूत करना चाहिए तथा मतभेदों को प्रभावी ढंग से संभालना चाहिए। बीजिंग का संदेश साफ है कि प्रतिस्पर्धा और मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।
इसे 2020 के बाद भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे आ रही नरमी का एक और संकेत माना जा रहा है।
सात साल बाद भारत आ रहे हैं Xi
Xi Jinping करीब सात साल बाद भारत आ रहे हैं। उनकी पिछली भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी, जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ चेन्नई के पास महाबलीपुरम में अनौपचारिक शिखर वार्ता की थी।
अब 12-13 सितंबर को BRICS Summit के लिए उनका नई दिल्ली पहुंचना तय है। इस दौरे का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह गलवान संघर्ष के बाद Xi की पहली भारत यात्रा होगी।
मोदी-Xi बैठक में किन मुद्दों पर होगी बात?
प्रधानमंत्री मोदी और Xi Jinping की प्रस्तावित बैठक में कई संवेदनशील मुद्दे एजेंडे में रहने की संभावना है।
सबसे अहम मुद्दों में:
भारत-चीन सीमा विवाद
LAC पर शांति और स्थिरता
द्विपक्षीय व्यापार
व्यापार घाटा और बाजार तक पहुंच
चीनी निवेश
वीजा और सीधी कनेक्टिविटी
दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग
Indian Express के मुताबिक दोनों देश Strategic Economic Dialogue शुरू करने के विकल्प पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें व्यापार घाटे, बाजार पहुंच, वीजा और निवेश जैसी समस्याओं पर चर्चा हो सकती है।
सीमा विवाद सबसे बड़ी चुनौती
भारत और चीन के रिश्तों में सबसे संवेदनशील मुद्दा अभी भी सीमा विवाद है।
2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सैन्य तनाव रहा। हालांकि बाद के वर्षों में सैनिकों की वापसी और सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
नई दिल्ली और बीजिंग के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर सैन्य और राजनयिक संवाद भी जारी है। ऐसे में मोदी-Xi बैठक में सीमा पर स्थिरता और आगे की बातचीत महत्वपूर्ण विषय हो सकती है।
रिश्तों में आई नरमी की वजह क्या है?
पिछले कुछ समय में भारत और चीन ने धीरे-धीरे संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश की है।
सीमा पर तनाव कम होने के बाद दोनों देशों ने संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। भारत ने कुछ क्षेत्रों में चीनी निवेश संबंधी नियमों में नरमी दिखाई है और दोनों देशों के बीच कारोबारी गतिविधियों को सामान्य बनाने की कोशिश भी हुई है।
हालांकि आर्थिक रिश्तों में अभी भी कई अड़चनें हैं। वीजा, निवेश मंजूरी, तकनीक और सुरक्षा संबंधी चिंताएं दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को पूरी तरह खत्म नहीं होने देतीं।
कारोबार में चीन के साथ भारत की बड़ी चुनौती
भारत और चीन के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन इसमें भारत का व्यापार घाटा लगातार चिंता का विषय रहा है।
नई दिल्ली चाहती है कि चीन भारतीय कंपनियों और उत्पादों के लिए अपने बाजार में ज्यादा अवसर उपलब्ध कराए। वहीं चीन भारत में निवेश और कारोबार के लिए ज्यादा स्थिर और अनुमानित नीतिगत माहौल चाहता है।
Reuters के मुताबिक दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में सुधार की कोशिशों के बावजूद regulatory barriers, visa issues और mutual suspicion अभी भी बड़ी बाधाएं हैं।
क्या चीन और भारत फिर बन सकते हैं 'अच्छे पड़ोसी'?
चीन के ताजा बयान को इसी दिशा में एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
बीजिंग का जोर इस बात पर है कि दोनों देशों को मतभेदों को रिश्तों की पूरी दिशा तय करने देने के बजाय उन्हें उचित तरीके से manage करना चाहिए।
लेकिन भारत के लिए केवल बयान पर्याप्त नहीं होंगे। नई दिल्ली लंबे समय से यह स्पष्ट करती रही है कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही व्यापक रिश्तों को सामान्य बनाने की बुनियादी शर्त है।
इसलिए आने वाली मोदी-Xi बैठक में बयान से ज्यादा जमीन पर होने वाली प्रगति महत्वपूर्ण होगी।
BRICS Summit क्यों बना अहम मंच?
Xi की भारत यात्रा का मुख्य कारण 12-13 सितंबर का BRICS Summit है। इस बार नई दिल्ली में BRICS के 11 सदस्य देशों के साथ partner और invited countries के प्रतिनिधि भी जुट रहे हैं।
भारत के लिए यह सम्मेलन चीन के साथ संवाद का अवसर भी है। BRICS के मंच पर भारत एक तरफ चीन और रूस के साथ सहयोग करता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंध भी बनाए हुए है।
क्या बदलेंगे भारत-चीन रिश्ते?
Xi की यात्रा से अचानक सभी विवाद खत्म होने की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। सीमा विवाद, व्यापार घाटा, निवेश और सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद अभी भी मौजूद हैं।
लेकिन अगर मोदी-Xi बैठक में संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने, सीमा पर स्थिरता कायम रखने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने पर ठोस सहमति बनती है, तो यह दोनों देशों के रिश्तों में एक नए चरण की शुरुआत हो सकती है।
फिलहाल चीन का संदेश यही है कि मतभेदों के बावजूद संवाद और सहयोग जारी रखा जाए। अब निगाहें इस बात पर हैं कि Xi के दिल्ली दौरे के बाद यह नरम बयान जमीन पर कितनी ठोस कूटनीतिक प्रगति में बदलता है।
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