NHAI का बड़ा फैसला, PM के लोकार्पण वाले प्रोजेक्ट्स पर होगी 6 महीने सख्त निगरानी
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पित किए जाने वाले और हाल में खोले गए हाईवे प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और सुरक्षा पर निगरानी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हालिया हाईवे परियोजनाओं में सामने आई निर्माण संबंधी कमियों के बाद गुणवत्ता जांच और तकनीकी मॉनिटरिंग पर जोर बढ़ा है। NHAI पहले से ही ड्रोन, सेंसर और तकनीकी आकलन जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर रहा है।
लेखक
Vinay Mishra
PM के हाथों लोकार्पण के बाद भी नजर से नहीं हटेंगे प्रोजेक्ट, NHAI करेगा 6 महीने तक सख्त निगरानी
नई दिल्ली: देश में तेजी से तैयार हो रहे एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता को लेकर अब NHAI निगरानी व्यवस्था और मजबूत करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पित किए जाने वाले हाईवे प्रोजेक्ट्स पर उद्घाटन के बाद भी विशेष नजर रखी जाएगी। इसका मकसद शुरुआती महीनों में सामने आने वाली निर्माण संबंधी खामियों को समय रहते पकड़ना और उन्हें ठीक कराना है।
NHAI देशभर में बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे विकसित कर रहा है। हाल के वर्षों में कई प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है। NHAI के अपने प्रकाशनों में भी इन परियोजनाओं की गुणवत्ता और निर्माण मानकों पर जोर दिया गया है।
उद्घाटन के बाद भी खत्म नहीं होगी जिम्मेदारी
अब किसी हाईवे के उद्घाटन के साथ ही उसकी निगरानी खत्म नहीं होगी। नए प्रोजेक्ट के संचालन के शुरुआती चरण में सड़क की सतह, ड्रेनेज, संरचनाओं, सुरक्षा व्यवस्था और दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री और तकनीक वास्तविक परिस्थितियों में अपेक्षित प्रदर्शन कर रही है या नहीं।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की घटना ने बढ़ाई चिंता
NHAI के लिए हाल में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सामने आई तकनीकी समस्या एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनी। 13 जुलाई को उद्घाटन के कुछ ही दिन बाद उन्नाव के पास करीब 300 मीटर हिस्से में सड़क की सतह पर समस्या सामने आई थी।
इसके बाद NHAI ने टोल वसूली निलंबित कर दी और ठेकेदार तथा कंसल्टेंट के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। तकनीकी जांच के लिए IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की समिति भी गठित की गई।
इस घटना ने नए हाईवे के उद्घाटन से पहले और उसके बाद गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े किए।
IIT विशेषज्ञों से लेकर लेजर जांच तक
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे मामले में NHAI ने सड़क की तकनीकी स्थिति का विस्तृत आकलन कराने के लिए लेजर प्रोफाइलोमीटर आधारित जांच भी शुरू की। इसका उद्देश्य पूरे प्रोजेक्ट की सड़क सतह की स्थिति का पता लगाना था, न कि केवल उस हिस्से की जहां समस्या सामने आई थी।
यह तरीका भविष्य में भी हाईवे की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
ड्रोन और सेंसर से होगी मॉनिटरिंग
NHAI अब हाईवे निर्माण और निगरानी में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। प्राधिकरण ने ड्रोन, AI, मशीन लर्निंग और सेंसर आधारित तकनीकों को अपने मॉनिटरिंग सिस्टम में शामिल करने की दिशा में काम किया है।
NHAI के मई 2026 के प्रकाशन के मुताबिक, सड़क की परत की मोटाई और उसकी compaction की निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉनिक सेंसर के इस्तेमाल पर भी काम किया जा रहा है। इससे मैनुअल निरीक्षण पर निर्भरता कम करने और निर्माण गुणवत्ता बेहतर करने का लक्ष्य है।
सिर्फ सड़क नहीं, सुरक्षा पर भी नजर
छह महीने की निगरानी का उद्देश्य केवल सड़क की ऊपरी सतह देखना नहीं माना जा सकता। नए प्रोजेक्ट में सड़क सुरक्षा, साइनेज, ड्रेनेज, क्रैश बैरियर, जंक्शन और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं की स्थिति भी अहम होगी।
खराब ड्रेनेज या सड़क की सतह में शुरुआती नुकसान बाद में बड़ी समस्या का रूप ले सकता है। इसलिए शुरुआती महीनों में नियमित निरीक्षण से मरम्मत का खर्च और यात्रियों के लिए जोखिम दोनों कम किए जा सकते हैं।
NHAI पहले से गुणवत्ता को दे रहा है प्राथमिकता
NHAI के आधिकारिक प्रकाशनों में निर्माण और रखरखाव के दौरान वैश्विक गुणवत्ता मानकों का पालन करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। प्राधिकरण ने कहा है कि हाईवे निर्माण में गुणवत्ता पर ध्यान देने से परियोजनाओं की दीर्घकालिक उपयोगिता और सुरक्षा बेहतर होगी।
नए निगरानी तंत्र को इसी दिशा में एक और कदम के तौर पर देखा जा सकता है।
ठेकेदारों की जवाबदेही भी होगी अहम
किसी परियोजना में शुरुआती दौर में गंभीर खामी मिलने पर जिम्मेदारी तय करना भी इस व्यवस्था का अहम हिस्सा होगा।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे मामले में NHAI ने ठेकेदार को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने के साथ प्रदर्शन सुरक्षा पर जुर्माना और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए थे।
इससे ठेकेदारों और कंसल्टेंट्स पर निर्माण गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
अगर निगरानी व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इसका सीधा फायदा हाईवे इस्तेमाल करने वालों को मिल सकता है। सड़क में शुरुआती दरार, धंसाव, जलभराव या सुरक्षा संबंधी कमी सामने आने पर उसे लंबे समय तक छोड़ने के बजाय जल्द ठीक किया जा सकेगा।
इससे यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ हाईवे की उम्र बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए अहम कदम
भारत में एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में सिर्फ नई सड़कें बनाना ही पर्याप्त नहीं है; उनकी गुणवत्ता और प्रदर्शन पर लगातार नजर रखना भी उतना ही जरूरी है।
NHAI की मौजूदा तकनीकी पहल—ड्रोन मॉनिटरिंग से लेकर सेंसर और लेजर आधारित सड़क जांच तक—इसी बदलती कार्यप्रणाली का संकेत देती है।
अब प्रधानमंत्री के हाथों लोकार्पित होने वाले हाईवे प्रोजेक्ट्स के शुरुआती छह महीने खास निगरानी के दायरे में रहेंगे। इससे सरकार और NHAI दोनों के सामने एक स्पष्ट लक्ष्य होगा—सड़क का उद्घाटन सिर्फ समय पर हो, इतना ही नहीं; वह सुरक्षित, टिकाऊ और तय गुणवत्ता मानकों पर भी खरी उतरे।
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