Gold Silver Price Crash: कॉपर के बाद सोना-चांदी धड़ाम, एक झटके में ₹10,000 से ज्यादा टूटे दाम; अचानक क्यों आई गिरावट?
सोने-चांदी की कीमतों में सितंबर की शुरुआत से तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 7 सितंबर को MCX पर सोना करीब ₹3,600 प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹6,000 प्रति किलो फिसली थी। इसके बाद भी बाजार में दबाव बना रहा। हालांकि 10 सितंबर को सोने में कुछ रिकवरी दिखी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.4% और सिल्वर 2.2% नीचे थे। मजबूत डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और US inflation data से पहले ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता इसकी बड़ी वजहें हैं।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: सोना और चांदी, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, इन दिनों खुद ही तेज उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं। सितंबर की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचे स्तरों के आसपास पहुंचने के बाद कीमती धातुओं में अचानक बिकवाली देखने को मिली। खासकर चांदी में गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा।
7 सितंबर को MCX पर गोल्ड करीब ₹3,600 प्रति 10 ग्राम, जबकि सिल्वर करीब ₹6,000 प्रति किलो टूटी थी। इस गिरावट के पीछे अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़े और उससे Federal Reserve की दरों को लेकर बदली उम्मीदों को अहम वजह माना गया।
10 सितंबर को क्या है सोने-चांदी का भाव?
10 सितंबर की सुबह भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1,54,290 प्रति 10 ग्राम और 999 सिल्वर करीब ₹2,44,020 प्रति किलो बताई गई। पिछले एक सप्ताह में सोने में करीब 1.2% की गिरावट दर्ज हुई, हालांकि सालाना आधार पर यह अब भी करीब 41% ऊपर था।
MCX पर 10 सितंबर को सोने में शुरुआती कमजोरी के बाद कुछ रिकवरी भी दिखाई दी। दोपहर तक Gold Futures करीब ₹1,53,980 प्रति 10 ग्राम और Silver Futures करीब ₹2,43,574 प्रति किलो पर कारोबार कर रहे थे।
यानी बाजार में सीधी एकतरफा गिरावट नहीं है, बल्कि बेहद तेज volatility देखने को मिल रही है।
फिर ₹10,000 से ज्यादा की गिरावट वाली बात कहां से आई?
चांदी में कुछ कारोबारी सत्रों में हजारों रुपये प्रति किलो का उतार-चढ़ाव होना संभव है, क्योंकि इसका भाव सोने की तुलना में ज्यादा volatile हो सकता है। सितंबर के शुरुआती दिनों में लगातार तेज moves देखने को मिले हैं।
लेकिन ₹10,000 से ज्यादा की गिरावट को किस तारीख, किस एक्सपायरी और किस भाव से तुलना की जा रही है, यह स्पष्ट करना जरूरी है। अलग-अलग रिपोर्टों में MCX futures, spot और retail rates के आंकड़े अलग हो सकते हैं।
इसलिए इसे पूरे देश में हर दुकान पर ₹10,000 की एकसमान गिरावट समझना सही नहीं होगा।
अचानक क्यों गिर रहे हैं Gold और Silver?
1. मजबूत हुआ अमेरिकी डॉलर
सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में आमतौर पर डॉलर में कारोबार करते हैं। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए ये धातुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे demand पर दबाव आ सकता है।
Reuters के अनुसार 10 सितंबर को Dollar Index में मजबूती और अमेरिकी Treasury yields में बढ़ोतरी ने Gold पर दबाव बनाया।
2. US Bond Yield में उछाल
अमेरिकी 10-year Treasury yield में हालिया बढ़ोतरी भी Gold के लिए नकारात्मक संकेत है।
सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला संभावित return बढ़ता है तो कुछ निवेशक non-yielding Gold से पैसा निकालकर fixed-income assets की तरफ जा सकते हैं।
Reuters के मुताबिक लंबी अवधि की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से Gold रखने की opportunity cost बढ़ी है।
3. अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार
इस समय बाजार की नजर अमेरिका के Producer Price Index (PPI) और Consumer Price Index (CPI) पर है।
इन आंकड़ों से यह संकेत मिल सकता है कि Federal Reserve आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपना सकता है। महंगाई ज्यादा रहने पर दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हो सकती है और Gold पर दबाव बढ़ सकता है।
4. Fed Rate को लेकर बाजार में उलझन
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की अगली बैठक 15-16 सितंबर को होनी है। Reuters के मुताबिक ज्यादातर अर्थशास्त्री दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे हैं, लेकिन बाजार में अगले सप्ताह rate hike की करीब 62% संभावना भी price-in की जा रही थी।
यही uncertainty precious metals में volatility बढ़ा रही है।
कॉपर के बाद Gold-Silver पर भी क्यों दबाव?
कॉपर को अक्सर global economic activity का संकेतक माना जाता है क्योंकि इसका इस्तेमाल construction, manufacturing, electronics और infrastructure में बड़े पैमाने पर होता है।
जब industrial metals में बिकवाली होती है तो investors पूरे commodities market को लेकर सतर्क हो सकते हैं। हालांकि कॉपर की गिरावट को सीधे Gold की गिरावट का एकमात्र कारण कहना सही नहीं होगा।
Gold पर इस समय डॉलर, bond yields, interest-rate expectations और geopolitical developments का असर ज्यादा महत्वपूर्ण है।
क्या West Asia तनाव भी जिम्मेदार है?
बाजार पर एक और बड़ा प्रभाव US-Iran conflict और West Asia में बढ़ता तनाव है। हालिया घटनाक्रम ने crude oil को फिर $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचाया है।
इससे एक तरफ inflation की चिंता बढ़ रही है और दूसरी तरफ global investors risk assets को लेकर सतर्क हो रहे हैं। Reuters ने 10 सितंबर को Brent crude को $100/barrel से ऊपर बताया।
दिलचस्प बात यह है कि geopolitical tension आम तौर पर Gold को support कर सकती है, लेकिन अगर उसी समय डॉलर और bond yields तेजी से बढ़ें तो यह फायदा दब सकता है।
क्या सोना पूरी तरह bearish हो गया है?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
10 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold 0.4% नीचे करीब $4,385 प्रति औंस था, जबकि Silver 2.2% गिरकर करीब $65.75 प्रति औंस पर था। लेकिन Gold अभी भी सालाना आधार पर काफी ऊंचे स्तर पर है।
भारत में भी 24K Gold करीब ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है।
इसलिए मौजूदा गिरावट को फिलहाल तेज correction/volatility के रूप में देखना ज्यादा उचित है, न कि निश्चित रूप से लंबे bearish trend की शुरुआत के तौर पर।
चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव क्यों?
Silver की मांग दोहरी है—यह निवेश के साथ-साथ industrial metal भी है। Solar panels, electronics और कई industrial applications में इसका इस्तेमाल होता है।
इसी वजह से Silver पर global economic growth और industrial demand की खबरों का असर Gold से अलग तरीके से पड़ सकता है।
10 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में Silver करीब 2.2% नीचे थी, जबकि Gold की गिरावट करीब 0.4% थी।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
अगर आप Gold या Silver खरीदने की सोच रहे हैं तो केवल एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है।
खासकर:
MCX futures और physical jewellery rates को एक जैसा न समझें।
शहर और dealer के हिसाब से retail rate बदल सकता है।
Jewellery खरीदते समय making charges और GST भी कुल लागत को प्रभावित करते हैं।
Silver में volatility Gold से ज्यादा हो सकती है।
बड़े निवेश में एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय जोखिम और समय-सीमा पर विचार करना जरूरी है।
आगे किस चीज पर रहेगी बाजार की नजर?
अब Gold-Silver बाजार के लिए सबसे अहम संकेत होंगे:
US inflation data → Federal Reserve policy → Dollar → Bond yields → Crude oil → Geopolitical tensions
अगर अमेरिकी inflation उम्मीद से ज्यादा आती है और Fed का रुख सख्त रहता है तो precious metals पर दबाव बना रह सकता है। इसके उलट inflation नरम पड़ती है और rate-cut expectations मजबूत होती हैं तो Gold-Silver को फिर support मिल सकता है।
निष्कर्ष
सोने-चांदी में हालिया गिरावट को सिर्फ 'बाजार टूट गया' के तौर पर देखना सही नहीं होगा। इसके पीछे अमेरिकी रोजगार आंकड़े, inflation की चिंता, Fed की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, मजबूत डॉलर और बढ़ती bond yields जैसे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
वहीं West Asia में बढ़ता तनाव और तेल की कीमतें बाजार की दिशा को और जटिल बना रही हैं। इसलिए आने वाले दिनों में Gold और Silver दोनों में तेज उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
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